मीडिया

हरियाणा बनने के बाद पिछले 50 वर्षों में हरियाणा में बड़े बदलाव हुए हैं। हरियाणा व इसके समाज को सशक्त बनाने में संचार माध्यमों की भूमिका काफी महत्वपूर्ण रही है। देश के अन्य हिस्सों की तरह नई सूचना एवं संचार तकनीक के कारण मीडिया के उपभोग व उत्पादन दोनों स्तरों पर बड़ा परिवर्तन इस प्रदेश में भी हुआ है।

समाचार पत्र-पत्रिकाओं, टीवी कार्यक्रमों, हरियाणवी फिल्मों की उत्पादकता व उपभोग दोनों बढ़े हैं। प्रदेश में सूचना एवं संचार माध्यमों के विकास व विस्तार ने कई नए मीडिया नगर, मीडिया मालिक, समाचार चैनल, कलाकार देश व हरियाणा को दिए हैं। हरियाणा औद्योगिक क्रान्ति, हरित क्रान्ति श्वेत क्रान्ति, तकनीकी क्रान्ति के बाद सूचना क्रान्ति के प्रयोग में भी सफल रहा है।

मीडिया के विकास के नजरिए से पंचकूला, पानीपत, रोहतक, हिसार, अम्बाला, रेवाडी, गुडगांव व फरीदाबाद हरियाणा के नए मीडिया नगर बनकर उभरे हैं। गुडगांव, रोहतक व पंंचकूला से कई समाचार चैनलों का प्रसारण हो रहा है।

गुडगांव, फरीदाबाद, पानीपत, रोहतक, सोनीपत में हुए औद्योगिकरण, एनसीआर में रीयल एस्टेट के कारोबार से बढ़े जमीन के भाव ने हरियाणा में एक नया मध्यवर्ग तैयार हुआ है। यह ऐसा वर्ग है जो अब पहले से अधिक अखबार पढ़ता है। टीवी देखता है। फिल्में देखता है। सोशल मीडिया का इस्तेमाल करता है। सुविधाभोगी है। जिसकी मनोरंजन व सूचनाओं की भूख को पूरा करने के लिए भी हरियाणा में मीडिया का विस्तार हुआ है।

मध्यवर्ग के उभार के कारण हरियाणा में पाठकों, दर्शकों व श्रोताओं की एक नई पीढ़ी तैयार हुई है जो मीडिया का प्रयोग व उपभोग करने की आदी है। दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण व अमर उजाला हरियाणा के हर हिस्से में फैल चुके हैं।

हिंदी अखबारों की तरह अंग्रेजी अखबारों के पाठक बढ़े हैं, जिसका सबसे अधिक फायदा हिन्दुस्तान टाईम्स, टाईम्स आफ इंडिया व दि ट्रिब्यून को मिला है। अंग्रेजी समाचार पत्रों में हरियाणा के स्थानीय मुद्दों पर संवाद करने के लिए क्षेत्रीय पुलआउट निकल रहे हैं।

देश व दुनिया में हाईपर लोकलाईज होते मीडिया का लाभ हरियाणा को भी मिला है। हरियाणा के जिलों से समाचार चैैनलों का प्रसारण व अखबारों का प्रकाशन हो रहा है। रजिस्ट्रार न्यूज पेपर आफ इंडिया के रिकार्ड में हरियाणा से करीब पांच हजार से अधिक पत्र व पत्रिकाएं पंजीकृत हैं।

दैनिक ट्रिब्यून व पंजाब केसरी हरियाणा बनने से पहले से हैं। इसके बाद पानीपत, हिसार व रोहतक से क्रमश दैनिक भास्कर, जागरण व हरिभूमि छपने लगे और कहने को हरियाणा व उसकी भूमि के अखबार लोगों को मिलने लगे। गांव-गांव तक अखबार को पहुंचाने व अपने उत्पाद को बेचने की ललक में हरियाणा में अखबारों के बीच ऐसी जंग शुरू हुई जिसे शायद ही देश के किसी अन्य हिस्से में देखी गई हो। अखबार तैयार करने वालों को न केवल घर-घर जाना पड़ा बल्कि लोगों में समाचार-पत्र पढऩे की रूचि भी पैदा करनी पड़ी। बड़े-बड़े अखबारों के अलावा लघु समाचार पत्र भी खूब निकलने शुरू हुए।

हरियाणा में रेडियों की विकास यात्रा में आकाशवाणी रोहतक व कुरुक्षेत्र की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण रही है। कुरुक्षेत्र व रोहतक के आकाशवाणी केन्द्रों ने शुरू से ही हरियाणा की सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने का काम किया है। आज भी सांग, रागनियां व हरियाणा की झलक इन कार्यक्रमों में नजर आती हैं। अम्बाला, फरीदाबाद, गुडगांव, हिसार, करनाल, कुरुक्षेत्र, मेवात, रोहतक व सिरसा में नए रेडियो स्टेशन बने हैं।

हरियाणा में टेलिविजन की विकास यात्रा दूरदर्शन हिसार से शुरू होकर असंख्य प्राईवेट टीवी चैनलों से होकर गुजरती है। स्थानीय समाचार चैनलों के विकास में हरियाणा में टीवी पत्रकारिता को एक नई दिशा दी है।  टेलिविजन समाचार चैनलों की विकास यात्रा में हरियाणा में टोटल टीवी, सहारा समय, एवन तहलका, इंडिया न्यूज हरियाणा, डे एड नाइट, हरियाणा न्यूज, पीटीसी, फोकस हरियाणा खबरें अभी तक, खबर फास्ट जैसे स्थानीय चैनल शामिल हैं।

हरियाणा के मीडिया उद्योगपति मीडिया एवं मनोरंजन उद्योग में भी अपना वर्चस्व बनाए हुए हैं। जी ग्रुप के मालिक सुभाष चंद्रा हरियाणा से हैं। नवीन जिंदल ,इंडिया न्यूज ग्रुप के सीईओ कार्तिकेय शर्मा इंडिया न्यूज, न्यूज एक्स, आज समाज समाचार पत्र सहित कईं अन्य समाचार माध्यमों के मालिक हैं।  हरियाणा के पूर्व गृह मंत्री गोपाल कांडा भी हरियाणा न्यूज के मालिक हैं। हरियाणा कई राजनेता समाचार पत्र पत्रिकाओं व समाचार चैनलों के स्वामित्व से संबंध रखते हैं।

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यह बात भी सही है कि हरियाणा में अपने राजनैतिक एजेंडे को पूरा करने के लिए कुछ राजनेताओं ने अपने चैनल शुरु किए। कुछ चैनल सफल रहे, लेकिन कुछ हरियाणा की आया राम गया राम राजनीति की तरह कुछ दिनों तक टिके और चले गए। राष्ट्रीय मीडिया में विजुअली हरियाणा के लिए समय व स्थान दोनो बढ़े हैं। मीडिया के इस विस्तार का फायदा तो मिला, लेकिन इससे मीडिया में विकृतियां भी बढ़ी हैं।

हरियाणा की पत्रकारिता ऐसे सैकड़ों उदाहरणों से भरी पड़ी है जब सरकार व नौकरशाहों ने अपने मनमाफिक इसका इस्तेमाल किया। मीडिया में खबरों की जो खरीद फरोख्त हुई है हरियाणा इस मामले में सबसे आगे रहा है। पैकेज के लिए राजनैतिक पार्टियों व नेताओं के समाचार को बैन करना व विज्ञापन मिलने के बाद उसे हटाना इसका चलन यहां पर हमेशा रहा है। नेताओं, अफसरों व सरकारों से हरियाणा के पत्रकारों की दोस्ती किसी से छिपी नहीं है। पत्रकारिता को सत्ता हासिल करने के यंत्र की तरह हमेशा इस्तेमाल किया गया। हवा के विपरीत बहने वाले पत्रकार इस माटी में विरले ही हुए हैं। अपनी राजनैतिक महत्वकांक्षाओं को पूरा करने के लिए कई राजनैतिक पार्टियों ने अपने अखबार भी निकाले। हरियाणा के लोगों ने तो उन्हें रिजेक्ट किया लेकिन वे हरियाणा में पत्रकारिता की जमीन को खोखला कर गए। हरियाणा की पत्रकारिता में विश्वसनीयता का संकट ऐसे समाचार पत्र -पत्रिकाओं के आने से ही बढ़ा।

Image result for बाबू बाल मुकुन्द,बाबू बाल मुकुन्द, माधव प्रसाद मिश्र, विष्णु प्रभाकर व गिरिलाल जैसे कई नाम हेैं जो हरियाणा की पत्रकारिता के आधार स्तंभ रहे हैं। इन गिने-चुने हस्ताक्षरों के बाद हरियाणा की पत्रकारिता में कुछ याद करने लायक आज भी नहीं है। अंग्रेजी अखबारों के स्थानीय संस्करण भी शुरू हो गए हैं, लेकिन हरियाणा से कोई भी बड़ा सम्पादक, विचारक नहीं है। विचार का संकट हरियाणा की पत्रकारिता में बना हुआ है। तकनीकी विकास व विस्तार के बाद भी हरियाणा की माटी देश को बड़े पत्रकार व राष्ट्रीय स्तर पर पत्रकारिता को दिशा देने में असफल रही है।

हरियाणा में नए मीडिया का विस्तार भी बड़ी तेजी से हुआ है।  स्मार्ट फोन क्रांति के कारण अब हर हाथ में मोबाइल है। वट्सअप, फेसबुक, इंस्टाग्राम, टविटर, यू टयूब जैसे सोशल मीडिया का हरियाणा के युवा प्रयोग कर रहे हैं। केरल, हिमाचल व पंजाब के बाद हरियाणा में इंटनेट उपभोक्तओं की संख्या में देश में तेजी के साथ बढ़ रही है।

हरियाणा में चन्द्रावल, गुलाबो, लाडो जैसी फिल्में बनने के बाद इस दिशा में कोई काम नही हुआ। फिल्म निर्माण में कुछ नए प्रयोग अभी शुरु हुए हैं। यशपाल शर्मा, मल्लिका सराहवत,अति अहलावत, रणदीप हुड्डा सहित ऐसे कई नाम हैं जिन्होंने हिन्दी सिनेमा में अपनी एक अलग पहचान बनायी है। पंजाबी, भोजपुरी, तमिल व तेलगु फिल्मों की तरह हमारे क्षेत्रीय हीरो नहीं है। रोहतक में बनाए गए फिल्म इंस्टीच्यूट से लोगों को कुछ उम्मीदें थी, लेकिन वहां भी कुछ नया कर नहीं पा रहे हैं।

हरियाणा बनने के बाद राज्य के विश्वविद्यालयों में पिछले तीन दशकों से पत्रकारिता का पठन-पाठन का कार्य भी जारी है। हर वर्ष करीब एक हजार से अधिक विद्यार्थी पत्रकारिता की डिग्री लेकर हरियाणा से निकल रहे हैं। पत्रकारिता शिक्षण संस्थान प्रदेश में पत्रकारिता को नयी दिशा देने में असफल साबित रहे हैं। हमारे पत्रकारिता शिक्षण संस्थान उद्योग व अकादमिक क्षेत्र के बीच की दूरी को नाप नहीं पाए हैं, परंतु समाचार पत्रों व टैलीविजन चैनल के न्यूज रूम में यहॉं के विश्वविद्यालयों से निकले युवा पत्रकार नजर आने लगे हैं।

अच्छी बात यह है कि मीडिया ने हरियाणा के रूढिवादी समाज की जड़ता तोड़ने में सराहनीय काम किया है। ऐसे माहौल मेंं भी ऑनर कीलिंग, भ्रूण हत्या, लड़कियों की खरीद-फरोख्त, जातिगत झगड़े, भ्रष्टाचार व मौकापरस्त राजनीति को बेनकाब करने में मीडिया सफल रहा है।

स्रोतः सं. सुभाष चंद्र, देस हरियाणा ( अंक 8-9, नवम्बर 2016 से फरवरी 2017), पृ.- 63

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  1. ज्ञातव्‍य है कि हरियाणा के गठन का यह 52वां वर्ष है। चंडीगढ़़ से दैनिक ट्रिब्‍यून के प्रकाशन का यह 41वां तथा अम्‍बाला से पंजाब केसरी के प्रकाशन का28वां वर्ष चल रहा है। लेखक सुभाष चन्‍द्र उपर्युक्‍त लेख में यह किस आधार पर कह रहे हैं कि ये दोनों समाचार पत्र हरियाणा राज्‍य में पहले से प्रकाशित हो रहे हैं। हां, तब पंजाब के जालन्‍धर से प्रकाशित पंजाब केसरी का प्रसार तथा वितरण वर्तमान हरियाणा तत्‍कालीन पंजाब में भी होता था। दोनों अखबारों का प्रकाशन राज्‍य में राज्‍य पुनर्गठन के वर्षों बाद शुरू हुआ था। प्रकाशित लेख में यह गंभीर तथ्‍यात्‍मक भूल है, जोकि स्‍थानीय पत्रकारिता की ि‍विश्‍वसनीयता पर प्रश्‍न चिन्‍ह लगाती है।

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