साखी –
अलख1 इलाही2 एक है, नाम धराया दोय।
कहे कबीर दो नाम सुनी, भरम3 पड़ो मति कोय।।टेक

कहां से आया कहां जाओगे, खबर करो अपने तन की।
सतगुरु मिले तो भेद बतावें, खुल जाए अंतर घट की।।
चरण – हिन्दू मुसलिम दोनों भुलाने, खटपट माय रिया4 अटकी5।
जोगी जंगम शेख सन्यासी, लालच माय रिया भटकी।।
काजी बैठा कुरान बांचे, जमी जोर वो करे चटकी।
हमदम साहेब नहीं पेचाना, पकड़ा मुरगी ले पटकी।।
माला मुन्दरा तिलक छापा, तीरथ बरत में रिया भटकी6।।
गावे बजावे लोक रिझावे, खबर नहीं अपने तन की।।
बाहर बेठा ध्यान लगावे, भीतर सुरता7 रही अटकी।
बाहर बंदा भीतर गंदा, मन मैल मछली झटकी।।
बिना विवेक से गीता बांचे, चेतन को लगी नहीं चटकी।
कहे कबीर सुणो भाई-साधो, आवागमन में रिया भटकी।।

  1. ईश्वर 2. अल्लाह 3. भ्रम में 4. रहे 5. लगना (महसूस करना) 6. भ्रमित 7. सूरत

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