रागनी

भारत तै चल लंदन पोहंच्या, दिल भर रया इंतकाम का
दुनिया के म्हं रुक्का पाट्या, ऊधम सिंह तेरे नाम का

जलियांवाळे बाग की घटना, पूरी दिल पै ला ली रै
खून का बदला खून तै लेऊं, या ए कसम उठा ली रै
उस डायर नै छोडूं ना, जो मुजरिम कत्लेआम का
दुनिया के म्हं रूक्का पाट्या ….

याणी उम्र म्हं उधम सिंह नै, काम रै ठाड़ा हाथ लिया
दिल म्हं आग कसूती लागी, मिस मैरी नै साथ दिया
करकै खाया सदा सराया, हुनरमंद था काम का
दुनिया के म्हं रू क्का पाट्या ….

तेरां मार्च सन् चालीस नै, दिन खुशी का आया रै
कैक्स्टन हाल म्हं मारया डायर, फूल्या नहीं समाया रै
आग की ढ़ाळयां फैल गया यू, चर्चा काम तमाम का
दुनिया के म्हं रूक्का पाट्या ….

मास्टर मनोज नै तेरी शान मैं, सच्ची कलम चलाई रै
सोनू नैगल भर गीतां म्हं, दुनिया तै सुणाई रै
रमेश माठड़े चुका ना पावै, कर्जा तेरे श्यान का
दुनिया के म्हं रूक्का पाट्या ….

स्रोतः सं. सुभाष चंद्र, देस हरियाणा (जुलाई-अगस्त 2016), पेज-38

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