सिनेमा

सीक्रेट सुपरस्टार :मुखर अभिव्यक्ति है महिलाओं के डर की

किशु गुप्ता

समस्त बन्धनों को तोडकर अपने सपनों को सच करने की कहानी है सीक्रेट सुपरस्टार। समर्पित है हर औरत को व हर मां को जो जीवन में कुछ करने की उमंग अपने मन में रखती है। मां-बेटी के रिश्ते को लेकर बनी फिल्म बेहद खास है। कहानी है सपनों की, त्याग की, समर्पण व संघर्ष की। आमिर खान की फिल्म में कोई न कोई संदेश छिपा होता है। यह फिल्म मुखर अभिव्यक्ति है महिलाओं के डर की जो उनके दिलों में बस गया है। घरेलू महिलाएं जो इस माहौल से बाहर तो आना चाहती है, पर आर्थिक तौर पर आत्मनिर्भर हुए बिना व्यक्तिगत स्वतंत्रता हासिल नहीं कर सकती।

बडोदरा के एक मिडल क्लास परिवार की लडकी इंशिया(जायरा वसीम) सिंगर बनना चाहती है पर उसके पिता का उसके घर में बहुत खौफ है पिता चाहता है इंशिया अपने सिंगिग के सपने को छोड़कर शादी कर घर बसाए। इंशिया अपने सपनों के साथ मुक्त गगन में उडऩा चाहती है। इंशिया के अब्बा उसकी अम्मी को प्रताडि़त करते हैं, लेकिन इंशिया की मां (मेहर विज) घुट-घुट कर रहने के बावजूद भी अपने बच्चों के हर एक सपने को पूरा करने में उनकी मदद करती है।

महिलाएं इस उत्पीडन की हैबिच्युल हो चुकी हैं। वे चाहकर भी इससे बाहर नहीं निकल पाती। इंशिया जब अपनी मां को अपने अब्बा से तलाक लेने की बात कहती है तो उसकी अम्मी नाराज होकर कहती है कहां जाएगें हम? कौन तुम्हारी स्कूल की फीस भरेगा?

लेकिन इंशिया सोचती है उसकी मां डरपोक है और वह अपनी आजादी के लिए कुछ नहीं करना चाहती। जब उसे पता लगता है कि उसके अब्बा उसे पेट में ही मारना चाहते थे और उसकी अम्मी ने उसको भागकर बचाया था तब उसे अहसास होता है कि मां ही असली सुपरस्टार है। इंशिया की मां ही सच में $िफल्म की सीक्रेेट-सुपरस्टार है। वह अपने पति की जेब से पैसे चुराकर इंशिया के लिए गिटार लाती है, अपने गहने बेचकर लेपटॉप खरीदती है।

औरतों की स्वतन्त्रता को क्षति पहुंचाने का कारक बुर्के  को आजादी व सपनों को पूरा करने का जरिया बना लेती है। इंशिया को संगीत से दूर रहने का आदेश था तो उसकी अम्मी उसको आईडिया देती है कि बुर्का पहनकर गाना गा। इंशिया इस बात को मानकर वीडियो बनाती है और यु-ट्यूब पर अपलोड करती है। उसकी वीडियो को लाखों लोग पसन्द करते हैं और संगीतकार शक्ति कुमार (आमिर खान) उसके गाने को पसन्द करते हैं और उसको अपनी फिल्म के लिए गाना गाने का ऑफर देते है, जिसे वह पहले स्वीकार नही करती, पर अपनी मां की मदद के लिए वह शक्ति कुमार से बात करती है और उसका दोस्त चिन्तन उसकी मदद करता है। चिन्तन का करैक्टर फिल्म में स्कूली बच्चों के मनोविश्लेषणात्मक नजरिए को स्पष्ट करता है।

कहानी में नया मोड़ तब आता है जब इंशिया सब कुछ जानकर मां के फैसले से समर्थन करती है और अपने सपनों का गला घोटकर पिता के साथ दुबई जाने को तैयार हो जाती है। पर वहां मां की आत्मा का जागृत होती है अपने पति को एयरपोर्ट पर तलाक के पेपर साईन करके देती है और मर्दवादी सोच पर करारा थप्पड़ जड़ देती है और सभी बन्धनों को तोड़ मुक्त होकर अपनी बेटी के अवार्ड-शो में जाती है। मां को आजादी की और कदम रखते देख, इंशिया भी बुर्का उतार फैंक देती है और अपने सीक्रेट सुपरस्टार की पहचान सबके सामने लाती हैै। बुर्का उतारना प्रतीक बन जाता है औरतों की आजादी व उनके जीवन को जीने की एक नई राह दिखलाने का।

स्रोत ः सं. सुभाष चंद्र, देस हरियाणा (नवम्बर-दिसम्बर, 2017), पेज-57

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