शिमलाः  मई, 2018ः कला, भाषा, संस्कृति एवं समाज सेवा को समर्पित संस्था ‘नवल प्रयास‘ द्वारा 12 मई को शिमला स्थित दयानंद पब्लिक स्कूल के सभागार में एक दिवसीय राज्य स्तरीय साहित्य उत्सव का सफल आयोजन हुआ जिसमें 16 साहित्यकारों को सम्मानित किया गया. समारोह के मुख्य अतिथि भारतीय ज्ञानपीठ के निदेशक व नया ज्ञानोदय के संपादक प्रख्यात कवि लीलाधर मंडलोई रहे। उन्होंने कहा कि इतने व्यापक स्तर पर साहित्यिक कार्यक्रम का आयोजन अपने आप में बड़ी बात है। इस तरह के समावेशी आयोजनों की आज बड़ी आवश्यकता है। यह वैचारिक लोकतन्त्र के लिए भी महत्वपूर्ण है। संस्था के अध्यक्ष व लेखक डॉ. विनोद प्रकाश गुप्ता ने मुख्य अतिथि सहित सभी उपस्थित रचनाकारों का स्वागत किया और इस आयोजन को सफल बनाने के लिए उनका आभार व्यक्त किया। Naval_2

इस आयोजन के पहले सत्र का आकर्षण विभिन्न डीएवी स्कूलों से पधारे 25 बच्चों का कविता पाठ एवं कविता कार्यशाला रही जिसकी अध्यक्षता डॉ. प्रेम लता ने की. कार्यशाला का संयोजन चर्चित कवि आत्मा रंजन ने डॉ. कुलराजीव पंत और डॉ. प्रियंका वैद्य की सहभागिता से किया। कविता प्रतियोगिता में स्वास्तिक  प्रथम, अक्षत शर्मा को द्वितीय और सना को तृतीय पुरस्कार से नवाजा गया। इसके साथ 2 बच्चों आकृत शर्मा और इषा गौतम को सांत्वना पुरस्कार प्रदान किए गए।

दूसरा सत्र कहानी पाठ का रहा जिसमें श्रीनिवास जोशी, गंगाराम राजी, बद्रीसिंह भाटिया और सुरेष शांडिल्य ने कहानी पाठ किया। चारों कहानियों को खूब सराहा गया।

इस उत्सव का मुख्य आकर्षण नवल प्रयास साहित्य सम्मान रहे। पुरस्कार चार श्रेणियो में दिए गए। ‘नवल स्मृति आजीवन शिरोमणि सम्मान-2018‘ श्री निवास जोशी, डॉ. अनिल राकेशी, ओम चंद हांडा और रमेशचन्द्र शर्मा को प्रदान किया गया। प्रकाश साहित्य रत्न सम्मान-2018 से केषव, डॉ. हेम राज कौशिक, डॉ. सुशील कुमार फुल्ल, बद्री सिंह भाटिया, डॉ  रेखा वषिष्ठ, के आर भारती, चन्द्र रेखा ढडवाल और आत्मा रंजन को नवाजा गया तथा धर्म प्रकाश साहित्य मणिसम्मान 2018 पवन चौहान और संजय ठाकुर को दिए गए। नवल प्रयास उभरती प्रतिभा सम्मान देव कन्या ठाकुर और दिनेश शर्मा को प्रदान किए गए। प्रत्येक श्रेणी में सम्मानित साहित्यकार को क्रमशः 11000/-, 5100/-3100/- और 2100/-रूपए  की नकद धन राषि प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिन्ह और अंग वस्त्र प्रदान किया गया। प्रत्येक बच्चों को पुरस्कार के रूप में पांच-पांच हजार तक की राशि के उपहार दिए गए। साथ ही प्रत्येक भागीदार बच्चों को भी उपहारों और समृति चिन्हों से नवाजा गया। शशि किरण गुप्ता, क्षेत्रिय निदेशक, डीएवी पब्लिक स्कूल, हिमाचल जोन द्वरा प्रत्येक साहित्यकार का प्रशस्ति वाचन प्रस्तुत किया गया।

इस अवसर पर लीलाधर मंडलोई के निर्देशन में तैयार मुक्तिबोध की कविताओं पर आधारित लघु फिल्म आत्मसंभवना भी दिखाई गई।
तीसरा सत्र कविता पाठ का रहा जिसे 10 उप सत्रों में बांटा गया। प्रत्येक सत्र में एक अध्यक्ष और पांच कवियों ने कविता पाठ किए। इनमें प्रदेश भर से तकरीबन 50 कवियों ने अपनी रचनाएं पढ़ीं। कवियों में डां लीलाधर मंडलोई, विजय स्वर्णकार, कमलेष भारतीय, मनोहर बाथम, श्रीनिवास श्रीकांत, केशव, रेखा, सुदर्शन वशिष्ठ, अनिल राकेशी, के आर भारती, आत्मारंजन, चन्द्र रेखा ढडवाल, कुल राजीव पंत, पूनम तिवारी, अश्विनी गर्ग, दिनेश शर्मा, देवकन्या ठाकुर, अंजलि दिवान, देवरानी, सत्य नारायण स्नेह, संजय ठाकुर, भारतीय कुठियाला, हेमराज चौहान, पवन चौहान, पौमिला ठाकुर, प्रियंवदा, नीता अग्रवाल, रौशन जसवाल, कृष्ण चंद महादेविया, वीरेन्द्र शर्मा वीर, विनोद रोहतकी, नरेश दओग, राजीव त्रिगर्ती, अशोक गौतम, प्रियंका वैद्य, विजय पूरी, शरत, सुमित राज वशिष्ठ, मुनीष तन्हा, उमा ठाकुर, पोरस ठाकुर, कौशल मुगटा आदि ने भाग लिया। सत्र का संचालन डा. कर्मसिंह ने किया।
इस आयोजन में विशेष भागीदारी और सहयोग हिमालय साहित्य एवं संस्कृति मंच, शशि किरण गुप्ता, क्षेत्रीय निदेशक, डीएवी पब्लि स्कूल, हिमाचल जोन एवं दयानंद पब्लिक स्कूल प्रबंधन रहा।

(डॉ0 विनोदप्रकाश गुप्ता) संस्थापक अध्यक्ष, नवल प्रयास शिमला

 

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