तारा पांचाल

परिचय

तारा पांचाल

28 मई,1950 – 20 जून, 2009

 

 

साहित्य की यथार्थवादी परंपरा के कहानीकार तारा पांचाल का जन्म 28 मई, 1950 को नरवाना, जिला जींद में हुआ। पंजाब विश्वविद्यालय से स्नातक की उपाधि प्राप्त की। प्रारंभिक जीवन से जीवन से ही लेखन के प्रति रूझान रहा। किशोरावस्था में ही अखबारों में उनकी लघुकथाएं व कहानियां प्रकाशित होने लगी थी।  ‘सारिका’, ‘हंस’, ‘कथन’, ‘वर्तमान साहित्य’, ‘पल-प्रतिपल’, ‘बया’, ‘गंगा’, ‘अथ’, ‘सशर्त’, ‘जतन’, ‘अध्यापक समाज’, ‘हरकारा’ जैसी प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में पाठक उनकी कहानियों से निरन्तर परिचित होते रहे हैं। ‘गिरा हुआ वोट’ संग्रह की दस कहानियों समेत तारा पांचाल की कुल चालीस के आसपास कहानियां हैं, जिनमें कुछ अप्रकाशित हैं।

                                अपनी युवावस्था में हरियाणा के कहानीकारों की कहानियों का संग्रह ‘बणछटी’ का संपादन-प्रकाशन किया, जिसकी उस समय काफी सराहना हुई थी। तारा पांचाल लगातार अपने साथी रचनाकारों तथा नव-रचनाकारों को प्रोत्साहित करते रहे हैं। बेहद विपरीत परिस्थितियों में उन्होंने ‘जतन’ पत्रिका के संपादन की मुख्य जिम्मेवारी निभाई। उनका छोटा सा घर साहित्यिक-गोष्ठियों और विमर्श का अड्डा था। तारा पांचाल कई वर्षों तक हरियाणा के जनवादी लेखक संघ के अध्यक्ष रहे। जोड़-तोड़ करके पुरस्कार हथियाना तथा स्वयं को सर्वश्रेष्ठ रचनाकार की घोषणा के लिए हिन्दी के कथित आलोचकों व पत्रिकाओं के संपादकों के आगे-पीछे फिरना उनकी फितरत का हिस्सा नहीं था। हरियाणा की साहित्य अकादमी ने भी वर्ष 2007-08 का बाबू बालमुकुन्द गुप्त सम्मान प्रदान करके  तारा पांचाल की रचनात्मक प्रतिभा का सम्मान किया।

कहानी 

संकट मोचन 
फूली