कबीर

परिचय
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पद

मौको कहां ढूंढे रे बन्द

साधौ पांडे निपुन  कसाई

तेरा मेरा मनुवा

अवधू भजन भेद है न्यारा

म्हारो हीरो हेराणो कचरा में

नाम से मिल्या ना कोई

पंडित छाण पियो जल पाणी

तन काया का मन्दिर

मुल्ला कहो किताब की बातें

पंडित की धेनु दूध नहीं देती

बेराग कठे है मेरा भाई

जोगी मन नी रंगाया

कोई सफा न देखा दिल का

क्यों भूलीगी थारो देस क्यों भूलीगी थारो देस

अमल करे सो पाई

न जाने तेरा साहेब कैसा है

पंडित तुम कैसे उत्तम कहाये

जग मैं भूला रे भाई

भक्ति करो ब्राह्मांड में

कहां से आया कहां जाओग

अवधू दोनों दीन कसाई

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