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धर्म में लिपटी वतनपरस्ती क्या-क्या स्वांग रचाएगी – गौहर रज़ा

देस हरियाणा और सत्यशोधक फाउंडेशन द्वारा 14-15 मार्च को कुरुक्षेत्र स्थित सैनी धर्मशाला में आयोजित हरियाणा सृजन उत्सव में दोनों दिन सवाल उठाने और चेतना पैदा करने वाली कविताएं गूंजती रही। देश के जाने-माने वैज्ञानिक एवं शायर गौहर रज़ा के कविता पाठ के लिए विशेष सत्र आयोजित किया गया। सत्र का संचालन रेतपथ के संपादक डॉ. अमित मनोज ने किया।

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गहराई तक जावण म्हं बखत तो लागै सै -रिसाल जांगड़ा

Post Views: 121 हरियाणवी ग़ज़ल रिसाल जांगड़ा   गहराई तक जावण म्हं बखत तो लागै सै। सच्चाई उप्पर ल्यावण म्हं बखत तो लागै से।   करैग जादां तावल जे उलझ…

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सीली बाळ रात चान्दनी आए याद पिया -कर्मचंद केसर

Post Views: 168   कर्मचन्द ‘केसर’  ग़ज़ल सीळी बाळ रात चान्दनी आए याद पिया। चन्दा बिना चकौरी ज्यूँ मैं तड़फू सूँ पिया। तेरी याद की सूल चुभी नींद नहीं आई,…

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धरम घट्या अर बढ़ग्या पाप -कर्मचन्द ‘केसर’

Post Views: 139   कर्मचन्द ‘केसर’  ग़ज़ल कलजुग के पहरे म्हं देक्खो, धरम घट्या अर बढ़ग्या पाप। समझण आला ए समझैगा, तीरथाँ तै बदध सैं माँ बाप। सारे चीब लिकड़ज्याँ…

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हालात तै मजबूर सूं मैं -कर्मचन्द केसर

Post Views: 142 कर्मचन्द ‘केसर’  ग़ज़ल हालात तै मजबूर सूँ मैं। दुनियां का मजदूर सूँ मैं। गरीबी सै जागीर मेरी, राजपाट तै दूर सूँ मैं। कट्टर सरमायेदारी नैं। कर दिया…

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जीन्दे जी का मेल जिन्दगी – कर्मचंद केसर

Post Views: 185 हरियाणवी ग़ज़ल जीन्दे जी का मेल जिन्दगी। च्यार दिनां का खेल जिन्दगी। फल लाग्गैं सैं खट्टे-मीठे, बिन पात्यां की बेल जिन्दगी। किसा अनूठा बल्या दीवा, बिन बात्ती…

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सादी भोली प्यारी माँ – कर्मचंद केसर

Post Views: 251 हरियाणवी ग़ज़ल सादी भोली प्यारी माँ, सै फुल्लां की क्यारी माँ। सबके चरण नवाऊं मैं, मेरी हो चै थारी माँ। सारी दुनियां भुल्ली जा, जाती नहीं बिसारी…

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नफरत नै भी प्रीत समझ ले – कर्मचंद केसर

Post Views: 165 हरियाणवी ग़ज़ल नफरत नै भी प्रीत समझ ले, सबनैं अपणा मीत समझ ले। लय, सुर, ताल सहीं हों जिसके, जिन्दगी नै वा गीत समझ ले। आदर तै…