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कविता हमारे भीतर की देवतुल्य मौजूदगी के प्रति एक संकेत है – बेन ओकरी

कविता हमारे भीतर की देवतुल्य मौजूदगी के प्रति एक संकेत है और हमें अस्तित्व के उच्चतम स्थानों तक ले जा एक गूंज में बदल जाने का कारण बनती है। कवि आपसे कुछ नहीं चाहते, सिवाय इसके कि आप अपने आत्म की गहनतम ध्वनि को सुनें।

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गढ़ घासेड़ा – ऐतिहासिक गांव – सिद्दीक अहमद मेव

Post Views: 953  सिद्दीक अहमद मेव (सिद्दीक अहमद मेव पेशे से इंजीनियर हैं, हरियाणा सरकार में कार्यरत हैं। मेवाती समाज, साहित्य, संस्कृति के  इतिहासकार हैं। इनकी मेवात पर कई पुस्तकें…

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तरक्की का दौर -विनोद सिल्ला

Post Views: 105 विनोद सिल्ला कविता तरक्की के दौर में गुम हो गया भाईचारा टूट गई स्नेह की तार व्यक्ति का नाम छिप गया सरनेम की आड़ में पड़ोसी हो…

दो मुंह वाला देवता

Post Views: 340 अमृत लाल मदान                 मामी जी को दो दिनों के लिए तावडू वापिस जाना पड़ा, जहां जाकर उन्हें अपने और मामा जी के मैले कपड़े धोने थे,…

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लड़की जो कर सकती है अमा अता आयडू, अनु.- विपुला

Post Views: 872 अफ्रीकी कहानी उनका कहना है कि मेरा जन्म घाना के मध्यभाग में स्थित एक बड़े गांव हसोडजी में हुआ। वे ऐसा भी कहते हैं कि जब सारा…

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फेस बुक – गंगा राम राजी

Post Views: 904 कहानी उठते ही मोबाइल पकड़ने लगा हूं। पकड़ने क्या अपने आप ही हाथ मोबाइल पर चला जाता है ठीक उसी तरह से जैसे सिग्रेट के प्यक्कड़ का…

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तुम कबीर न बनना- हरभजन सिंंह रेणु

Post Views: 623     कविता जब मेरे दोस्त मुझे कबीर बना रहे थे मैं प्यादों की ताकत से ऊंटों की शह मात बचा रहा था घोड़े दौड़ा रहा था…

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कहा था न -हर भजन सिंह रेणु

Post Views: 748 कविता मैंने तुम्हें कहा था न मत कर कबीर-कबीर और अब शहर के बाहर खड़ा रह अकेला। अपने फुंके घर का देख तमाशा हक सच की आवाज…