कछुआ और खरगोश – इब्ने इंशा

Post Views: 66 लोक कथा एक था कछुआ, एक था खरगोश। दोनों ने आपस में दौड़ की शर्त लगाई। कोई कछुए से पूछे कि तूने शर्त क्यों लगाई? क्या सोचकर…

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भीतरला हो साफ मणस का चाहे रंग बेशक तै काला हो – विक्रम राही

Post Views: 209 भीतरला हो साफ मणस का चाहे रंग बेशक तै काला हो हो रंग भी काला दिल भी काला उसका के उपराला हो भूरा हो जै देखण मैं…

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बेटी गैल्यां धोखा होग्या इब के कह दयूं सरकार तनै- विक्रम राही

Post Views: 55 बेटी गैल्यां धोखा होग्या इब के कह दयूं सरकार तनै जै गर्भ बीच तै बचा लई तो आग्गे फेर दई मार तनै लिंगानुपात सुधर गया इसका कारण…

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गहराई तक जावण म्हं बखत तो लागै सै -रिसाल जांगड़ा

Post Views: 31 हरियाणवी ग़ज़ल रिसाल जांगड़ा   गहराई तक जावण म्हं बखत तो लागै सै। सच्चाई उप्पर ल्यावण म्हं बखत तो लागै से।   करैग जादां तावल जे उलझ…

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साथ चांदडे माणस का दिया होया तंग करज्यागा- विक्रम राही

Post Views: 140 विक्रम राही साथ चांदडे माणस का दिया होया तंग करज्यागा जीण जोग भी खामैखा तो बिन आई मैं मरज्यागा चतुर चलाक बेशर्म आदमी सदा मीट्ठे चोपे लावैगा…

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छब्बीस जनवरी आले पर ना बात होवै सविंधान की- विक्रम राही

Post Views: 45 विक्रम राही छब्बीस जनवरी आले पर ना बात होवै सविंधान की टैंक तोप झांकी भाषण तै खुश जनता हिन्दूस्तान की । सविंधान सभा नै लिखया म्हारा संविधान…

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अम्मा का संसार – डा. राजेंद्र गौतम

Post Views: 113 (वरिष्ठ साहित्यकार एवं समीक्षक राजेंद्र गौतम, दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदी-विभाग से सेवानिवृत हुए हैं। इनके दोहे छंद-निर्वाह की कारीगरी नहीं, बल्कि आधुनिक कविता के तमाम गुण लिए…

कौण कड़ै ताहीं तरै आडै कौण कड़ै कद बहज्या- विक्रम राही

Post Views: 59 विक्रम राही कौण कड़ै ताहीं तरै आडै कौण कड़ै कद बहज्या बालू बरगी भीत समझले कौण जमै कौण ढहज्या समो समो का मोल बताया पर समो आवणी…

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रोज ताण ल्यो कट्टे पिस्टल जेली और तलवारां नै- विक्रम राही

Post Views: 108 विक्रम राही रोज ताण ल्यो कट्टे पिस्टल जेली और तलवारां नै हांगें आली जिद्द ले बैठी या बहोत घणे परिवारां नै छोट्टी मोट्टी कहया सुणी रुप दूसरा…

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हुण दस्स चौकीदारा! – हिमाचली लोक कथा

Post Views: 138 प्रस्तुती – दुर्गेश नंदन एक चोर था । छोटी-मोटी चोरियां करके अपना और अपने परिवार का पेट पाल रहा था पर गुज़ारा वामुश्किल होता । चोर ने…