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हुण दस्स चौकीदारा! – हिमाचली लोक कथा

प्रस्तुती – दुर्गेश नंदन एक चोर था । छोटी-मोटी चोरियां करके अपना और अपने परिवार का पेट पाल रहा था पर गुज़ारा वामुश्किल होता । चोर ने एक योजना बनाई…

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ठाड्डा रहया पाल बांदता पुश्त आगली की खातिर- विक्रम राही

विक्रम राही ठाड्डा रहया पाल बांदता पुश्त आगली की खातिर कमजोर कमी तेरी रहगी तनै समझे नहीं कदे चात्तर वेद शास्त्र छाण लिए वैं के कहरे सै पुराण बता रामायण…

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झूठ फरेब छल बेगैरत का ना कती सहारा चाहिए- विक्रम राही

विक्रम राही झूठ फरेब छल बेगैरत का ना कती सहारा चाहिए मनै प्यार प्रेम और भाईचारे तै मेल गुजारा चाहिए ढोंग रचाकै यारी ला लें पाप भरया हो नस नस…

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जड़ै दीखज्या ज़ुल्फ़ उड़ै ए रात करणीया कोन्या मैं – मनजीत भोला

मनजीत भोळा इश्क़-विश्क, प्यार-व्यार की बात करणीया कोन्या मैं जड़ै दीखज्या ज़ुल्फ़ उड़ै ए रात करणीया कोन्या मैं ना परचम ना कोए पार्टी ना लड़ता मैं निशानां पै कलमकार हूँ…

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डरैगा सो मरैगा

राजकिशन नैन एक बै जंगल के सारे खरगोशां नै आपणी सभा करी अर सभ आपणे-आपणे दुःखां का रोणा रोण लागे। एक जणां बोल्या, ‘आखिर कित लिकड़ कै चालां? पीण नै…

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किताब का लिख्या

 राजकिशन नैन (राजकिशन नैन हरियाणवी संस्कृति के ज्ञाता हैं और बेजोड़ छायाकार हैं। साहित्यिक पत्र-पत्रिकाओं उनके चित्र प्रकाशित होते रहे हैं।) घसीटा कतई भोला अर घणा सीधा था। आठ पहर…

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म्हारै गाम का चौकीदार

म्हारै गाम का चौकीदार बोहत टैम पहल्यां की बात सै। म्हारै गाम म्हं एक चौकीदार था। उसके बोहत सारे काम थे। गाम कुछ भी होंदा उसका गोहा (संदेशा, मुनियादी) उसने…

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सोनकेसी – पहाड़ी लोक-कथा

एक बार एक साहुकार था। उसके चार पुत्र थे ।चार में से बड़े तीन पुश्तैनी धन्धे के साथ अपना-अपना काम धन्धा  भी करते थे पर सबसे छोटा बेटा कोई काम-धाम…

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चुराही पहेलियां (फड़ौणी)

चुराही (चंबा जिले के चुराह तहसील की पहाड़ी बोली) में पहेलियों को फड़ौणी कहा जाता है। जब बर्फ गिर रही होती है तो घर के सारे सदस्य रसोई में जमा…

जाट कहवै, सुण जाटणी – प्रदीप नील वशिष्ठ

एक बात ने कई सालों से मुझे परेशान कर रखा था। और वह शर्म की बात यह कि अपने  हरियाणा में हरियाणवी बोलने वाले को नाक-भौं चढ़ा कर इस नजऱ…