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जमाना ही चोर है – धनपत सिंह

Post Views: 335 जमाना ही चोर है, पक्षी-पखेरू क्या ढोर है कोये-कोये चोर है जग म्हं लीलो आने और दो आने काजवाहरात का चोर है कोय, कोय है चोर खजाने…

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हे तूं बालम के घर जाइये चंद्रमा – धनपत सिंह

Post Views: 273 हे तूं बालम के घर जाइये चंद्रमा,जाइये चंद्रमा और के चाहिये चंद्रमा आज सखीयां तैं चाली पट, दो बात सुणैं नैं म्हारी डटघूंघट तणना मुश्किल, बोहड़ीया बणना…

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कलम घिसे और दवात सुकज्या हरफ लिखणियां थक ले – धनपत सिंह

Post Views: 348 कलम घिसे और दवात सुकज्या हरफ लिखणियां थक लेरै मेरी इसी पढ़ाई नैं कौण लिखणियां लिख ले इतणै भूक्खा मरणा हो इतणै वा झाल मिलै नागुमसुम रहैगा…

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मात, पिता और भाई, ब्याही, सब नकली परिवार – धनपत सिंह

Post Views: 465 मात, पिता और भाई, ब्याही, सब नकली परिवारदुनियां के म्हं बड़ा बताया पगड़ी बदला यार किरसन और सुदामा यारी लाए सुणे होंएक ब्राह्मण और एक हीर कै…

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हळ जोतै खेत कमावै जगपालन जमीदार हो सैं – धनपत सिंह

Post Views: 351 हळ जोतै खेत कमावै जगपालन जमीदार हो सैंचाक घुमावै बास्सण तारै वोहे लोग कुम्हार हो सैं क्यूं लागी मनैं विसवासण, हम घड़ते माट्टी के बास्सणतांबे और पीतळ…

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पाक है मोहब्बत म्हारी ना हे बदमाशी – धनपत सिंह

Post Views: 313 पाक है मोहब्बत म्हारी ना हे बदमाशीहीरामल तैं पहल्यां मनैं टुटणा है फांसी पाक मोहब्बत दुनियां के म्हं सबतैं बड़ी करारी हो सैफेर जी के लेणा हो…

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तुम जाओ सुसरा सास – धनपत सिंह

Post Views: 209 तुम जाओ सुसरा सास,समझा ल्यूंगी जब आज्यागा मेरे पास मेरे बुझे ताझे बिना कित भरतार जावैगामेरा वो गुनाहगार क्यूकर तजकै नार जावैगाधमका द्यूंगी करड़ी हो कै क्यूकर…

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जाण द्यो बस रहाण द्यो हे दबी दबाई बात – पं. लख्मी चंद

Post Views: 278 पं. लख्मीचंद के पदमावत सांग से एक रागनी. मर्दवाद पर स्त्री की प्रतिक्रिया. ये सृजनात्मक दृष्टि का ही प्रतिफल है कि जब कोई लेखक चाहे वह खुद…