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मेरा जोबन, तन, मन बिघन करै, कुछ जतन बणा मेरी सास – धनपत सिंह

मेरा जोबन, तन, मन बिघन करै, कुछ जतन बणा मेरी सासदिन रैन चैन नहीं पिया बिना, छ: ऋत बारहा मास चैत चाहता चित चोर को चले गए चतर सुजानचित के…

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तुम जाओ सुसरा सास – धनपत सिंह

तुम जाओ सुसरा सास,समझा ल्यूंगी जब आज्यागा मेरे पास मेरे बुझे ताझे बिना कित भरतार जावैगामेरा वो गुनाहगार क्यूकर तजकै नार जावैगाधमका द्यूंगी करड़ी हो कै क्यूकर बाहर जावैगाहो मनैं…

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जाण द्यो बस रहाण द्यो हे दबी दबाई बात – पं. लख्मी चंद

पं. लख्मीचंद के पदमावत सांग से एक रागनी. मर्दवाद पर स्त्री की प्रतिक्रिया. ये सृजनात्मक दृष्टि का ही प्रतिफल है कि जब कोई लेखक चाहे वह खुद किसी विचार को…

सामण का स्वागत – मंगतराम शास्त्री

शीळी शीळी बाळ जिब पहाड़ां म्ह तै आण लगै होवैं रूंगटे खड़े गात के भीतरला करणाण लगै राम राचज्या रूई के फोयां ज्यूं बादळ उडण लगैं समझो सामण आग्या करो…

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देखे मर्द नकारे हों सैं गरज-गरज के प्यारे हों सैं – पं. लख्मीचंद

बात सही है कि लोक कवि लोक बुद्धिमता, प्रवृतियों और बौद्धिक-नैतिक रुझानों का अतिक्रमण नहीं कर पाते। लेकिन लोक प्रचलित मत की सीमाओं का अतिक्रमण करना भी अपवाद नहीं है।इसका उदाहरण है पं. लख्मीचंद  की ये  रागनी जिसमें पौराणिक किस्सों में पुरुषों ने स्त्रियों के प्रति जो अन्याय किया उसे एक जगह रख दिया है और वो भी स्त्री की नजर से.

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लोग्गां की हुसयारी देक्खी – सत्यवीर नाहड़िया

लोग्गां की हुसयारी देक्खी, न्यारी दुनियादारी देक्खी। चोर-चोर की बात छोड़ इब, चोर-पुलिस म्हं यारी देक्खी। दरद मीठल़ा देग्यी बैरण, सूरत इतनी प्यारी देक्खी। घूम्मै नित अफसरी का कुणबा, जीप…

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किसान की मुसीबत नैं जाणै सै किसान – धनपत सिंह

किसान की मुसीबत नैं जाणै सै किसानलूट-खसोट मचावणियां तूं के जाणै बेईमान माह, पोह के पाळे म्हं भी लाणा पाणी होदिन रात रहे जा बंध पै कस्सी बजाणी होगिरड़ी फेरां,…

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दिन – संगीता बैनीवाल

 बाजरे की सीट्टियां पै खेत की मचाण पै चिड्ड़ियां की लुक-मिच्चणी संग खेल्या अर छुपग्या दिन। गोबर तैं लीपे आंगण म्ह हौळे हौळे आया दिन। टाबर ज्यूं खेल्या,हांस्या-रोया, खाया-पिया अर…

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वा राजा की राजकुमारी मैं सिर्फ लंगोटे आळा सूं – पं. मांगेराम

वा राजा की राजकुमारी मैं सिर्फ लंगोटे आळा सूंभांग रगड़ कै पीवणियां मैं कुण्डी सोट्टे आळा सूं उसकी सौ सौ टहल करैं आड़ै एक भी दासी दास नहींवा शाल दुशाले…