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मीडिया में हरियाणवी महिला की छवि – सहीराम

सहीराम  मीडिया में हरियाणवी महिला की छवि क्या है? जैसे हरियाणवी पुरुष जिसे आमतौर पर हाळी-पाळी कहा जाता है, की छवि खेतों में खटनेवाले एक मेहनतकश किसान की छवि है…

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नई रागनी के शिखर पुरुष पं. जगन्नाथ से संवाद – रोशन वर्मा 

नई रागनी के शिखर पुरुष पं. जगन्नाथ हमारे बीच नहीं रहे। देस हरियाणा की ओर से कलाकार को विनम्र श्रद्धांजलि। रचनाकार के स्वयं के बारे में जानना भी एक अनूठा अनुभव होता है। पं. जगन्नाथ जी के अवदान को याद करते हुए प्रस्तुत है  2013 में  रोशन वर्मा की पंडित जगन्नाथ से हुआ संवाद –

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पचास साल का सफर हरियाणवी सिनेमा -सत्यवीर नाहडिया

सिनेमा हरियाणा प्रदेश के स्वर्ण जयंती वर्ष के पड़ाव पर यदि हरियाणवी सिनेमा की स्थिति का सूक्ष्म अध्ययन करें तो निराशा ही हाथ लगती है। सन् 1984 मेंं प्रदर्शित हुई…

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हरियाणा में मीडिया – डा. अशोक कुमार

डा. अशोक कुमार  हरियाणा बनने के बाद पिछले 50 वर्षों में हरियाणा में बड़े बदलाव हुए हैं। हरियाणा व इसके समाज को सशक्त बनाने में संचार माध्यमों की भूमिका काफी…

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सिनेमा में हरियाणा – सहीराम

   यह पहली हरियाणवी फिल्म ‘‘चंद्रावल’’ के आने से पहले की बात है जब हिंदी की एक बड़ी हिट फिल्म आयी थी। नाम था ‘नमक हलाल’। यह हिंदी फिल्मों में अमिताभ बच्चन का जमाना था और अमिताभ बच्चन की उन दिनों थोड़ा आगे-पीछे मिलते-जुलते नामोंवालो दो फिल्में आयी थी – एक ‘नमक हलाल’ और दूसरी ‘नमक हराम’। ‘नमक हलाल’ में मालिक के नमक का हक अदा करने वाले जहां खुद अमिताभ बच्चन थे, वहीं ‘नमक हराम’ में फैक्टरी मालिक बने अमिताभ बच्चन अपने जिगरी दोस्त को इसलिए ‘नमक हराम’ मान लेते हैं क्योंकि खुद उन्होंने ही अपने इस जिगरी दोस्त को मजदूरों के बीच मजदूर बनाकर भेजा तो हड़ताल वगैरह तोड़ने के लिए था, लेकिन मजदूरों के दुख-तकलीफों को देखकर वह उनका हमदर्द बन जाता है। अच्छी बात यह है कि नमक हलाली हरियाणवियों के हिस्से आयी थी।