समाज की धड़कनों को पढ़ लेता है रचनाकार – टी. आर. कुण्डू

समाज व्यक्तियों का घर नहीं है, समूह नहीं, ये एक संवेदनशील सामूहिकता है। जिसका एक मिजाज है, जिसकी एक अंतरात्मा है, जो हमें बुरे-भले की समझ का बोध कराते हैं। मूलत: यह एक नैतिकता में ही बसी हुई है। इसी के बलबूते हम आगे बढ़े हैं। कोई भी संरचना अंतिम नहीं है। उसके बाह्य व भीतरी समीकरण है जो बदलते रहते हैं। हर बदलाव के कुछ दबाव होते हैं। कुछ तनाव होते हैं। कुछ पीड़ाएं होती हैं। सबसे पहले इसकी आहट आप रचनाकारों को मिलती है।

साहित्य की महत्ता – आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी

आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी (1864–1938) हिन्दी के महान साहित्यकार, पत्रकार एवं युगप्रवर्तक थे। हिंदी साहित्य की अविस्मरणीय सेवा की और अपने युग की साहित्यिक और सांस्कृतिक चेतना को दिशा और दृष्टि प्रदान की। 17 वर्ष तक हिन्दी की प्रसिद्ध पत्रिका सरस्वती का सम्पादन किया।

मुक्तिबोध के जन्म शताब्दी अवसर पर एक काव्य-गोष्ठी

Post Views: 271                 22 अगस्त को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की आर्टस फैक्लटी में टीम देस हरियाणा ने गजानन माधव मुक्तिबोध के जन्म शताब्दी अवसर पर एक काव्य-गोष्ठी का आयोजन किया…

placeholder

मां – कामरेड पृथ्वी सिंह गोरखपुरिया

मेरी मां सारी उम्र मेरी सहयोगी बल्कि यो कहिए संघर्ष की साथी रही। पहले मेरी पढ़ाई जारी रखने के लिए और फिर मार्क्सवादी पार्टी की राजनीति (मजदूरों किसानों की राजनीति को आगे बढ़ाने के लिए) ताउम्र मेरा साथ देती रही। उसने अपने जेवरात, गांव के 2 प्लॉट तथा उसके नाम की 20 एकड़ जमीन मुझे  बेचने के लिए दे दी।

placeholder

पीछा करो उनका

Post Views: 518 बड़े चतुर हैं वे गजब के वाचाल और जादूगर रूमाल झटकते हैं तो उड़ने लगती हैं रंग-बिरंगी तितलियां खाली डिब्बों पर घुमाते हैं अपना हाथ और आसमान…

placeholder

बहुत उत्साहित हैं वे

Post Views: 510 बहुत उत्साहित हैं वे इन दिनों वे नए और अच्छे और कलफ़दार कड़क कपड़े पहनकर आते हैं हमारे बीच पहले तो मैं जानता था उन सभी को…

placeholder

सिख गुरूओं का विश्वसपात्र था मेव समुदाय – सिद्दीक अहमद मेव

Post Views: 413   पँजाब में मेवों (मद्रों) की उपस्थिति क प्रमाण तो महाभारत काल से ही मिलते है , मगर सिंकदर के आक्रमण (326 ई.पू.) के समय से प्रमाण…

placeholder

गहराई तक जावण म्हं बखत तो लागै सै -रिसाल जांगड़ा

Post Views: 120 हरियाणवी ग़ज़ल रिसाल जांगड़ा   गहराई तक जावण म्हं बखत तो लागै सै। सच्चाई उप्पर ल्यावण म्हं बखत तो लागै से।   करैग जादां तावल जे उलझ…

placeholder

वेटिंग फॉर वीजा – डॉ. भीम राव आंबेडकर

Post Views: 778 ‘वेटिंग फॉर वीजा ‘ डॉ. भीम राव आंबेडकर डॉ. भीमराव आंबेडकर की पुस्तिका ‘वेटिंग फॉर वीजा’ संयुक्त राज्य अमेरिका के कोलंबिया विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में शामिल है।…