placeholder

आम्बेडकर और रविदास – जयपाल

Post Views: 259 अधिकारी महोदयतुम चाहे जिस भी जाति से होंहम अपनी बेटी की शादी तुम्हारे बेटे से कर सकते हैंपर हमारी भी एक प्रार्थना हैसगाई से पूर्व तुम्हें अपने…

placeholder

खाली हाथ – जयपाल

Post Views: 107 वे दिन भर शहर की सूरत संवारते हैंऔर अपनी सूरत बिगाड़ते हैंदिन ढलने परसिर नीचा करमुंह लटकाएचल पड़ते हैं वापिसअपने घरों की तरफहताश-निराशजैसे शमशान से लौटते हैं…

placeholder

जाले – जयपाल

Post Views: 97 जाले हर युग के होते हैंहर युग बुन लेता है अपने जालेहर युग चुन लेता है अपने जालेधूल मिट्टी से सने प्राचीन जालेमोती से चमकते नवीन जालेसमय…

placeholder

पाखण्डी – जयपाल

Post Views: 96 वे आर्थिक सुधार करेंगेमरने को मजबूर कर देंगेवे रोजगार की बात करेंगेरोटी छीन लेंगेवे शिक्षा की बात करेंगेव्यापार के केन्द्र खोल देंगेवे शान्ति की अपील करेंगेजंग का…

placeholder

बच्चा – जयपाल

Post Views: 91 तमाशा दिखाता है बच्चान सांप से डरता है न नेवले सेन बंदर से न भालू सेन शेर से न हाथी सेरस्सी पर चलता है बच्चागिरने से नहीं…

placeholder

एक चुप्पी -जयपाल

Post Views: 169 सवेरे-सवेरेएक हाथ में टोकरीदूसरे में झाडूवह निकल पड़ती है घर सेजाती है एक घर से दूसरे घरएक मोहल्ले से दूसरे मोहल्लेकुछ दौड़ती हैकुछ भागती हैकुछ हंसती हैकुछ…

placeholder

बहिष्कृत औरत – जयपाल

Post Views: 109 शहर से बाहर सेएक औरत शहर के अंदर आती हैघरों पर से मिट्टी झाड़ती हैफर्श चमकाती हैगलियों को बुहारती हैपी जाती है नालियों की सारी दुर्गंधगली-मुहल्लों को…

placeholder

पत्नी – जयपाल

Post Views: 85 पत्नी का लौट आता है बचपनजब दूर पार से मिलने आते हैं पिता जीपत्नी की आंखों में उतर आता है संमदरजब अचानक आकर मां सिर पर रखती…

placeholder

उनका सवाल – जयपाल

Post Views: 167 वे पूछते हैं –आज भी उनके सिर पर गंदगी का टोकरा क्यों रखा हैउनकी बस्ती शहर या गांवों से बाहर ही क्यों होती हैउनके मंदिरों-गुरुद्वारों में दूसरे…

placeholder

बगुला और मछली – जयपाल

Post Views: 205 बगुला केवल मछली को ही नहीं देखतापानी को भी देखता हैकितने पानी में है मछली बगुला केवल मछली को ही नहीं देखतासाथ घूम रही दूसरी मछलियों को…