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जन-जन का चेहरा एक- गजानन माधव मुक्तिबोध

Post Views: 206 चाहे जिस देश, प्रान्त, पुर का हो जन-जन का चेहरा एक! एशिया की, यूरोप की, अमरीका की गलियों की धूप एक। कष्ट-दुख सन्ताप की, चेहरों पर पड़ी…