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उर्दू शायरी की विधाएं – शशिकांत श्रीवास्तव

Post Views: 415 ( अंग्रेजी के विद्वान शशिकांत श्रीवास्तव साहित्य के गंभीर अध्येता हैं। कई दशकों तक कालेज में अध्यापन किया और हरियाणा के  सरकारी कालेजों में प्रिंसीपल रहे। हिंदुस्तानी…

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ज़माने में नया बदलाव लाने की ज़रूरत है -महावीर ‘दुखी’

Post Views: 555 ज़माने में नया बदलाव लाने की ज़रूरत है, अकीदों का सड़ा मलबा उठाने की ज़रूरत है। उजालों के तहफ्फुज में कभी कोई न रह जाए, अंधेरों को…

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सीली बाळ रात चान्दनी आए याद पिया -कर्मचंद केसर

Post Views: 168   कर्मचन्द ‘केसर’  ग़ज़ल सीळी बाळ रात चान्दनी आए याद पिया। चन्दा बिना चकौरी ज्यूँ मैं तड़फू सूँ पिया। तेरी याद की सूल चुभी नींद नहीं आई,…

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जहां में खौफ़ का व्यापार क्यूं है सोचना होगा – महावीर ‘दुखी’

Post Views: 138 महावीर ‘दुखी’  जहां में खौफ़ का व्यापार क्यूं है सोचना होगा, तशद्दुद की यहां भरमार क्यूं है सोचना होगा। सुना था आदमी ने बेबसी पर पा लिया…

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न दीवानों से वाबस्ता, न फरज़ानों से वाबस्ता -महावीर ‘दुखी’

Post Views: 141 महावीर ‘दुखी’  न दीवानों से वाबस्ता, न फरज़ानों से वाबस्ता, रहा हूं मैं हमेशा आम इन्सानों से वाबस्ता। सुना है देवाओं का कभी था बास धरती पर,…

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धरम घट्या अर बढ़ग्या पाप -कर्मचन्द ‘केसर’

Post Views: 139   कर्मचन्द ‘केसर’  ग़ज़ल कलजुग के पहरे म्हं देक्खो, धरम घट्या अर बढ़ग्या पाप। समझण आला ए समझैगा, तीरथाँ तै बदध सैं माँ बाप। सारे चीब लिकड़ज्याँ…

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हालात तै मजबूर सूं मैं -कर्मचन्द केसर

Post Views: 142 कर्मचन्द ‘केसर’  ग़ज़ल हालात तै मजबूर सूँ मैं। दुनियां का मजदूर सूँ मैं। गरीबी सै जागीर मेरी, राजपाट तै दूर सूँ मैं। कट्टर सरमायेदारी नैं। कर दिया…

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रात भर लोग अंधेरे की बलि चढ़ते हैं – ओम सिंह अशफाक

Post Views: 238 ओमसिंह अशफाक  आबिद आलमी (4-6-1933—9-2-1994) पिछले दिनों अम्बाला में तरक्की पसंद तहरीक में ‘फिकोएहसास के शायर’ जनाब आबिद आलमी हमसे हमेशा के लिए बिछड़ गए। उनका मूल…

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सादी भोली प्यारी माँ – कर्मचंद केसर

Post Views: 251 हरियाणवी ग़ज़ल सादी भोली प्यारी माँ, सै फुल्लां की क्यारी माँ। सबके चरण नवाऊं मैं, मेरी हो चै थारी माँ। सारी दुनियां भुल्ली जा, जाती नहीं बिसारी…

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नफरत नै भी प्रीत समझ ले – कर्मचंद केसर

Post Views: 165 हरियाणवी ग़ज़ल नफरत नै भी प्रीत समझ ले, सबनैं अपणा मीत समझ ले। लय, सुर, ताल सहीं हों जिसके, जिन्दगी नै वा गीत समझ ले। आदर तै…