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सावित्रीबाई फुले : जीवन जिस पर अमल किया जाना चाहिए

Post Views: 105 7 जनवरी को दलित शोषण मुक्ति मंच (DSMM), दिल्ली ने भारत की पहली महिला शिक्षक सावित्रीबाई फुले की 187वें जन्मदिवस पर एक कार्यक्रम का आयोजन किया न्यूज़क्लिक…

हिंदी साहित्य अध्ययन-अध्यापनः चुनौतियां और सरोकार- डा. सुभाष चंद्र

Post Views: 228  1922-25 के आस-पास बी.एच.यू. और इलाहाबाद में हिन्दी विभाग खुलने शुरू हुए थे। अभी  उच्च शिक्षा में एक विषय के तौर पर हिंदी साहित्य-अध्ययन के सौ साल…

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वैचारिक योद्धा डा. ओमप्रकाश ग्रेवाल – डा. सुभाष चंद्र

Post Views: 12 डा ओमप्रकाश ग्रेवाल बदलाव के लिए प्रयासरत सक्रिय बुद्धिजीवी थे। हरियाणा के साहित्यिक-सांस्कृतिक परिवेश को उन्होंने गहरे से प्रभावित किया। रचनाकारों-संस्कृतिकर्मियों से हमेशा विमर्श में रहे। उनकी…

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प्रो. भीम सिंह दहिया- अँग्रेजी साहित्य शिक्षण में प्रो. ओम प्रकाश ग्रेवाल का योगदान

Post Views: 12 संस्मरण जाने-माने शिक्षाविद प्रोफेसर भीम सिंह दहिया कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति के पद पर रहते हुए सेवानिवृत्त हुए। इस से पहले वे महर्षि दयानन्द विश्वविद्यालय , रोहतक…

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राजबीर पाराशर – डॉ. ग्रेवाल को याद करते हुए

Post Views: 20 संस्मरण             प्रो. ओ.पी. ग्रेवाल ने अपने जीवनकाल में विभिन्न शिक्षण संस्थाओं में अध्यापन कार्य करते हुए बहुत से विद्यार्थियों को असाधारण ढंग से प्रभावित किया और…

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वी.बी.अबरोल – डॉ. ओम प्रकाश ग्रेवाल : एक जुझारू अध्यापक

Post Views: 20 संस्मरण प्रो. ओम प्रकाश ग्रेवाल के सौम्य, शालीन व्यक्तित्व में ही कहीं छिपा था एक जुझारूपन जो इन्सानी कद्रों के साथ हो रही बेइंसाफी के प्रति विरोध…

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हरियाणा में पंजाबी भाषा -डा. हरविन्द्र सिंह

Post Views: 283 भाषा विमर्श ‘पंजाबी’ शब्द से तात्पर्य पंजाब का निवासी होने से भी है और यह पंजाब-वासियों की भाषा भी है। पंजाब की यह उत्तम भाषा ‘गुरमुखी’ लिपि…

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हरियाणा में सभ्यता का उदय- सूरजभान

          मध्य कांस्य-काल में जो, पच्चीस सौ ई.पू. से सत्रह सौ ई.पू. के बीच रखा जाता है, हरियाणा में भी अन्य पड़ोसी प्रदेशों की भाँति सभ्यता का उदय है। इस काल की अनेक बस्तियाँ हिसार, जींद, कुरुक्षेत्र, रोहतक तथा भिवानी जिलों में खोज निकाली गई हैं। इनमें मित्ताथल, राखीगढ़ी, बानावली और बालू इनके प्रमुख केंद्र थे। राखीगढ़ी, में आज भी एक विशाल टीले के अवशेष विद्यमान हैं। बानावली, बालू और सम्भवतः मित्ताथल और राखीगढ़ी में किले और बस्तियों का विन्यास सिन्धु-सभ्यता के नगर-विन्यास से मेल खाता है। इनके मकान कच्ची एवं पक्की ईंटों के बने थे। सड़कें एवं गलियाँ बस्ती के आर-पार विद्यमान थीं। घरों में चौक, स्नानघर, रसोई आदि की सुविधाएँ विद्यमान थीं।