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मेवाती लोक गीत – हुकम करो तो मईयां आऊं तेेरे र भवन में

Post Views: 67 मेवाती लोक गीत हुकम करो तो मईयां आऊं तेेरे र भवन में। गइया को दूध हमारे बछड़ा ने बिगाड़ो। कांई की धार चढ़ाऊ, मईया तेरे र भवन…

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हरियाणा में रागनी की परम्परा और जनवादी रागनी की शुरुआत – डा. ओमप्रकाश ग्रेवाल

रागनी की असली जान, ठेठ लोकभाषा के मुहावरों में सीधी-सादी लय अपनाने में और ऐसे मर्म-स्पर्शी कथा प्रसंगों के चुनाव में होती हैं ” जो लोगों के मन में रच-बस गये हों। इन सबके सहारे ही रागनी लोगों की भावनाओं को, उनकी पीड़ाओं तथा दबी हुई अभिलाषाओं को सुगम और सरल ढंग से प्रस्तुत करने में सफल होती हैं।

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मेवाती लोक गीत – मैं तो चिड़िया-सी उड़ जाऊंगी मेरा बाबल

Post Views: 92 मेवाती लोक गीत मैं तो चिड़िया-सी उड़ जाऊंगी मेरा बाबल। मैं तो तीन दिना भारी मेरा बाबल। मोसू हड़क-बड़क मत बोले मेरा बाबल मैं तो चिड़िया सी…

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हरियाणा का हाल

Post Views: 51 अरुण कुमार कैहरबा हरि के हरियाले प्रदेश हरियाणा का हाल सुणो, खरी-खरी कड़वी-सी बात और चुभते हुए सवाल सुणो। दूध-दही के खाणे वाला मीठा-मीठा गीत कहां सै,…

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मैं टोहूं वो हरियाणा जित दूध-दही का खाणा है- मंगत राम शास्त्री

Post Views: 66 मंगत राम शास्त्री देशां में सुण्या देश अनोखा वीर देश हरियाणा है। मैं टोहूं वो हरियाणा जित दूध-दही का खाणा है।। था हरियाणा हिन्दू-मुस्लिम मेलजोल की कहाणी…

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आंगण बीच कूई राजा (लोकगीत)

Post Views: 123 आंगण बीच कूई राजा डूब क: मरूंगी तू मत डरिए मैं तो औरां न: डराऊंगी जेठ लड़ैगा पाछा फेर क: लडूंगी आजा री जिठानी तेरे धान से…

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इसा गीत सुणाओ हे कवि- मंगत राम शास्त्री

Post Views: 68 मंगत राम शास्त्री  इसा गीत सुणाओ हे कवि! होज्या सारै रम्मन्द रोळ, उट्ठे चोगरदै घमरौळ इसा राग्गड़ गाओ हे कवि! माच्ची उथल-पुथल सारै कोए झूठ और साच…

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हरियाणा में सांग परम्परा – सपना रानी

Post Views: 630 आलेख हरियाणा में लोक मंच को ‘सांग’ के नाम से जाना जाता है। ‘सांग’ शब्द,  स्वांग शब्द से बना है जो नाट्य शास्त्र के ‘रूपक’ शब्द का…

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उस्ताद धुलिया खान

लखमी चंद जब भी कोई धुन रचते और उस्ताद धुलिया खान से सारंगी के मधुर वादन पर उस धुन को सुनते तो झूम उठते और तब एक ही बात उनकी जुबान से निकला करती – उस्ताद। कमाल कर दिया। 

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सुधीर शर्मा – मेरा नौकर वर ढुंढवाइए मेरी मां

Post Views: 221 हरियाणवी नृत्य गीत मेरा नौकर वर ढुंढवाइए मेरी मां विवाह योग्य होने पर परम्परागत समाज में अपना पति पसंद करने वाली युवतियों की भूमिका नहीं होती। पर…