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घाणी फोड़ रही थी जोट न्यूं आपस में बतलाई – मंगतराम शास्त्री

(प्रचलित तर्ज- होळी खेल रहे नन्दलाल…)घाणी फोड़ रही थी जोट न्यूं आपस में बतलाईहम रहां माट्टी संग माट्टी, म्हारी जड़ चिन्ता नै चाट्टीपाट्टी पड़ी खेस की गोठ, दे म्हैं को…

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भीतरला हो साफ मणस का चाहे रंग बेशक तै काला हो – विक्रम राही

भीतरला हो साफ मणस का चाहे रंग बेशक तै काला हो हो रंग भी काला दिल भी काला उसका के उपराला हो भूरा हो जै देखण मैं नर जाणू चांद…

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बेटी गैल्यां धोखा होग्या इब के कह दयूं सरकार तनै- विक्रम राही

बेटी गैल्यां धोखा होग्या इब के कह दयूं सरकार तनै जै गर्भ बीच तै बचा लई तो आग्गे फेर दई मार तनै लिंगानुपात सुधर गया इसका कारण हम तम जाणै…

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झूठ कै पांव नहीं होते- मंगत राम शास्त्री

मंगतराम शास्त्री झूठ कै पांव नहीं होते सदा जीत ना होया करै छल कपट झूठ बेईमाने की एक न एक दिन सच्चाई बणती पतवार जमाने की झूठ कै पांव नहीं…

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साथ चांदडे माणस का दिया होया तंग करज्यागा- विक्रम राही

विक्रम राही साथ चांदडे माणस का दिया होया तंग करज्यागा जीण जोग भी खामैखा तो बिन आई मैं मरज्यागा चतुर चलाक बेशर्म आदमी सदा मीट्ठे चोपे लावैगा कई तरियां के…

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छब्बीस जनवरी आले पर ना बात होवै सविंधान की- विक्रम राही

विक्रम राही छब्बीस जनवरी आले पर ना बात होवै सविंधान की टैंक तोप झांकी भाषण तै खुश जनता हिन्दूस्तान की । सविंधान सभा नै लिखया म्हारा संविधान तीन साल मैं…

कौण कड़ै ताहीं तरै आडै कौण कड़ै कद बहज्या- विक्रम राही

विक्रम राही कौण कड़ै ताहीं तरै आडै कौण कड़ै कद बहज्या बालू बरगी भीत समझले कौण जमै कौण ढहज्या समो समो का मोल बताया पर समो आवणी जाणी किसे समो…

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रोज ताण ल्यो कट्टे पिस्टल जेली और तलवारां नै- विक्रम राही

विक्रम राही रोज ताण ल्यो कट्टे पिस्टल जेली और तलवारां नै हांगें आली जिद्द ले बैठी या बहोत घणे परिवारां नै छोट्टी मोट्टी कहया सुणी रुप दूसरा लेज्या सै नहीं…

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ठाड्डा रहया पाल बांदता पुश्त आगली की खातिर- विक्रम राही

विक्रम राही ठाड्डा रहया पाल बांदता पुश्त आगली की खातिर कमजोर कमी तेरी रहगी तनै समझे नहीं कदे चात्तर वेद शास्त्र छाण लिए वैं के कहरे सै पुराण बता रामायण…