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जीवन के विविध रंगों जीवन-दृष्टि देता रंगमंच – अरुण कुमार कैहरबा

थियेटर या रंगमंच जीवन के विविध रंगों को मंच पर प्रस्तुत करने की जीवंत विधा है। रंगमंच सही गलत के भेद को बारीकी से चित्रित करता है। रंगमंच सवाल खड़े करता है। रंगमंच समाज का आईना ही नहीं है, बल्कि परिवर्तन का सशक्त औजार भी है।

ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन

Post Views: 125 विकास साल्याण  (देस हरियाणा फ़िल्म सोसाइटी के तत्वावधान में डा. ओमप्रकाश ग्रेवाल अध्ययन संस्थान, कुरुक्षेत्र में 2 सितंबर 2018 को पर्यावरण संकट पर केन्द्रित फ़िल्म ‘कार्बन’ की…

अलीगढ़ : समलैंगिकता पर विमर्श -विकास साल्याण

Post Views: 423 समलैंगिकता को अलग-अलग दृष्टि से देखा जाता है कुछ समलैंगिकता को मानसिक बीमारी मानते हैं। कुछ इसे परिस्थितियों के कारण उत्पन्न आदत मानते हैं तो कुछ एक…

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स्वच्छ हवा और पानी एक बिजनेस बन गया है

Post Views: 124 गतिविधि ‘देस हरियाणा फिल्म सोसाइटी’ के माध्यम से हर महीने ही सामाजिक सरोकारों से जुड़ी फिल्मों का प्रदर्शन किया जाएगा और उस पर गंभीर चर्चा होगी जिससे…

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कुछ मुंबइया फिल्में और हरियाणवी जनजीवन का यथार्थ – सहीराम

Post Views: 301                 सिनेमा अभी तक यही माना जाता रहा है कि हरियाणवी जन जीवन खेती किसानी का बड़ा ही सादा और…

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दायरा’ संकीर्ण सामाजिक दायरों पर प्रहार -विकास साल्याण

Post Views: 288 सिनेमा-चर्चा रोहतक के फि़ल्म एवम् टेलीविजन संस्थान के छात्रों द्वारा बनाई गई ‘दायरा’ फि़ल्म हरियाणवी सिनेमा को नई दिशा की ओर ले जा रही है। इस फिल्म…

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पचास साल का सफर हरियाणवी सिनेमा -सत्यवीर नाहडिया

Post Views: 1,408 सिनेमा हरियाणा प्रदेश के स्वर्ण जयंती वर्ष के पड़ाव पर यदि हरियाणवी सिनेमा की स्थिति का सूक्ष्म अध्ययन करें तो निराशा ही हाथ लगती है। सन् 1984…

पहाड़ में कायांतरित होता आदमी -कमलानंद झा                                                 

Post Views: 780 सिनेमा                 पहाड़ पुरुष दशरथ मांझी के व्यक्तित्व ने एक बार फिर यह सिद्ध किया है कि ज्ञान, बुद्धिमत्ता और गहन संवेदनशीलता सिर्फ औपचरिक शिक्षा की मोहताज…

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हिन्दी सिनेमा में किसान-जीवन -सुनील दत्त

Post Views: 639 सिनेमा माध्यम भारत में अपने सौ साल पूरे कर चुका है। सिनेमा ने भारतीय समाज को गहरे से प्रभावित किया है। बदलते हुए समाज को भी सिनेमा…