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उर्दू शायरी की विधाएं – शशिकांत श्रीवास्तव

Post Views: 414 ( अंग्रेजी के विद्वान शशिकांत श्रीवास्तव साहित्य के गंभीर अध्येता हैं। कई दशकों तक कालेज में अध्यापन किया और हरियाणा के  सरकारी कालेजों में प्रिंसीपल रहे। हिंदुस्तानी…

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इसी जन्म में हर तरह का अनुभव हासिल करना चाहती थी – कमला दास

Post Views: 126 एक स्त्री को कुछ भी बनने से पहले एक अच्छी पत्नी, एक अच्छी मां के रूप में खुद को साबित करना पड़ता है। और इसका मतलब है…

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कविता हमारे भीतर की देवतुल्य मौजूदगी के प्रति एक संकेत है – बेन ओकरी

कविता हमारे भीतर की देवतुल्य मौजूदगी के प्रति एक संकेत है और हमें अस्तित्व के उच्चतम स्थानों तक ले जा एक गूंज में बदल जाने का कारण बनती है। कवि आपसे कुछ नहीं चाहते, सिवाय इसके कि आप अपने आत्म की गहनतम ध्वनि को सुनें।

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जॉर्ज लूकाच – डा. ओमप्रकाश ग्रेवाल

Post Views: 246 साहित्यिक मसलों की मार्क्सवादी दृष्किोण से व्याख्या करने वाले समर्थ आलोचकों में लूकाच का नाम आता है। किन्तु उनकी कुछ मुख्य स्थापनाओं के बारे में मार्क्सवादी चिन्तकों…

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कविता की भाषा और जनभाषा – डा. ओमप्रकाश ग्रेवाल

Post Views: 3,135 आलेख कविता की भाषा का जन-भाषा से किस प्रकार का सम्बन्ध हो इस प्रश्न पर हम यहां केवल जनवादी कविता के संदर्भ में ही विचार करेंगे। कविता…

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‘हम नहीं रोनी सूरत वाले’ : सावित्रीबाई फुले की कविताई – बजरंग बिहारी तिवारी

Post Views: 1,928 जीवन की गहरी समझ के साथ काव्य-रचना में प्रवृत्त होने वाली सावित्रीबाई फुले (1831-1897) अपने दो काव्य-संग्रहों के बल पर सृजन के इतिहास में अमर हैं. उनका…

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राष्ट्रीय एकता और भाषा की समस्या – भीष्म साहनी

Post Views: 660 मैं भाषा वैज्ञानिक नहीं हूं, भाषाएं कैसे बनती और विकास पाती हैं, कैसे बदलती हैं, इस बारे में बहुत कम जानता हूं, इसलिए किसी अधिकार के साथ…

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सामंती व्यवस्था से टकराता साहित्यकार – बी. मदन मोहन

तीसरे हरियाणा सृजन उत्सव के दौरान 9 फरवरी 2019 को ‘लेखक से संवाद’ सत्र का आयोजन किया गया। जिसमें हिमाचल के प्रख्यात साहित्यकार एस.आर. हरनोट के साथ श्रोताओं ने संवाद करना था, लेकिन स्वास्थ्य के चलते वे पहुंच नहीं पाए। एम एल एन कालेज, यमुनानगर में हिंदी के एसोसिएट प्रोफेसर बी.मदनमोहन ने उनकी रचनाओं से परिचित करवाया और उनकी रचनाओं के सामाजिक सरोकारों व सौंदर्य-शिल्प पर चर्चा की। प्रस्तुत है विकास साल्याण की रिपोर्ट –

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संतराम उदासीः जन संघर्षों व आंदोलनों का प्रेरक- प्रोफेसर सुभाष चंद्र

Post Views: 665 संतराम उदासी का संबंध पंजाबी कविता की क्रांतिकारी धारा से है। संतराम उदासी की रचनाओं में दलित कविता तथा इंकलाबी कविता के सरोकारों का संगम है। संतराम…

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एक थे नामवर सिंह – प्रोफेसर सुभाष सैनी

Post Views: 361 प्रोफेसर सुभाष सैनी नामवर सिंह (जन्म: 28 जुलाई 1926 बनारस, उत्तर प्रदेश निधन: 19 फरवरी 2019, नयी दिल्ली) हिन्दी के शीर्षस्थ शोधकार-समालोचक, निबन्धकार तथा मूर्द्धन्य सांस्कृतिक-ऐतिहासिक उपन्यास…