एक अशांत अदीब की खामोश मौत -ज्ञान प्रकाश विवेक

Post Views: 826 ज्ञान प्रकाश विवेक ललित कार्तिकेय का जन्म हरियाणा के सारन में हुआ। उन्होंने ‘हिलियम’, ‘तलछट का कोरस’, कहानी संग्रह, ‘सामने का समय’, आलोचना तथा देरिदा की ‘स्पेक्टर्स…

placeholder

प्रेमचंद से दोस्ती- विकास नारायण राय

Post Views: 650 आलेख महान लेखक प्रेमचंद के साहित्य से हर कोई परिचित है। उनके साहित्य में तत्कालीन सामाजिकशक्तियों की टकराहट-संघर्ष-आंदोलन स्पष्टत: मौजूद हैं। विकास नारायण राय का प्रस्तुत विशेष…

placeholder

किताबें ज्ञान का प्रवेश द्वार हैं – परमानंद शास्त्री

Post Views: 683 परिचर्चा किसी व्यक्ति व समाज की बेहतरी में पुस्तकोंं की भूमिका निर्विवाद है, लेकिन पुस्तक पठन-अध्ययन-मनन की संस्कृति पर मंडराते खतरे की चिंता निरंतर यत्र-तत्र सुनने में…

पहली बार लेखक की हैसियत से – सोना चौधरी

Post Views: 968 9 मई 2016 को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र में ‘देस हरियाणा’ पत्रिका की ओर से लेखक से मिलिए कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें लेखक सोना चौधरी से छात्रों,…

placeholder

दलित साहित्य: एक अन्तर्यात्रा – कमलानंद झा

Post Views: 351 पठनीय पुस्तक दलित साहित्य के लिए यह शुभ संकेत है कि अब हिंदी में भी लगातार आलोचनात्मक पुस्तकें प्रकाशित हो रहीं हैं। रचना के साथ-साथ आलोचना का…

हमारी कल्चर व समाज सारा ही सेक्सुअल – कृष्ण बेनीवाल

इंसान उसको कहते हैं जिसमें प्रेम हो, करुणा हो, दया हो, सहानुभूति हो। हमारी शक्ल इंसानों से मिलती है हम इंसान थोड़े ही हैं।

आजादी मेरा ब्रांड -अनुराधा बेनीवाल

Post Views: 1,303 7 अप्रैल 2016 को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र में ‘देस हरियाणा’ पत्रिका के तत्वाधान में ‘अपने लेखक से मिलिए’ कार्यक्रम हुआ, जिसमें ‘आजादी मेरा ब्रांड’ की लेखिका अनुराधा…

placeholder

उसूल और जिंदगी में से एक चुनना पड़ा तो मैं उसूल चुनूंगा – जगमोहन

Post Views: 867 16 मार्च 2016 को देस हरियाणा पत्रिका की ओर से ‘युवा पीढ़ी और शहीद भगत सिंह की विचारधारा’ विषय पर सेमीनार आयोजित किया, जिसमें शहीद भगत सिंह…

placeholder

मैं कासी का जुलहा बूझहु मोर गिआना – डा.सेवा सिंह

Post Views: 464 आलेख ब्राह्मणवाद की विचारधारा ने श्रम-जन्य कर्मों का तिरस्कार करते हुए वर्णधर्मी व्यवस्था के अंतर्गत उत्पादनशील श्रेणियों का शोषण बनाए रखा है।  कबीर की वाणियों में इस…

placeholder

सांचि कहौं तो मारन धावै – डा. सुभाष चंद्र

Post Views: 724 आलेख कबीर दास मध्यकालीन भारत के प्रसिद्घ संत हैं, जिन्होंने अपनी रचनाओं में हिन्दू-मुस्लिम एकता का प्रयास किया तथा ब्राह्मणवादी धार्मिक आडम्बरों की आलोचना की। इनकी प्रसिद्घ…