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ननकाना साहिब : एक ऐतिहासिक विरासत – सुरेंद्र पाल सिंह

आजकल करतारपुर कॉरिडोर खुल चुका है और गुरु नानकदेव जी की 550वीं जयन्ती के उपलक्ष्य में रोजाना हज़ारों श्रद्धालु पाकिस्तान जा पा रहे हैं. फ़रवरी 1921 में ननकाना साहब गुरुद्वारा के महंत नारायण दास ने पठानों के हाथों 139 सिक्खों को (थॉर्नबर्न ICS के अनुसार) या तो ज़िन्दा जलवा दिया था या मरवा दिया था क्योंकि उसे शक था कि वे उसे गद्दी से हटाना चाहते थे.

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हिटलर के नाम गांधी के पत्र

Post Views: 153 गांधी जी संवाद पूरा करने में विश्वास रखते थे। मन में कोई ग्लानि हो, किसी से शिकायत हो, अपनी बात किसी तक पहुंचाने की ज़रूरत हो या…

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सामाजिक सुरक्षा के नाम पर – रीतिका खेड़ा

अफसोस की बात यह है कि हमारे यहां अभिजात वर्ग के बीच सामाजिक सुरक्षा पर सहमति और समर्थन कमजोर है। हम यह भूल जाते हैं कि खुद की सफलता में सौभाग्य या लॉटरी का उतना ही हाथ है, जितना खुद के जतन या मेहनत का है।

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अंतर-जातीय विवाह से मिटेगा जातिवाद – स्वामी अग्निवेश

Post Views: 136 हमें अंतरजातीय विवाह करने वाले जोड़ों के पक्ष में अभियान चलाना होगा, क्योंकि प्रेमी जोड़े किसी दबाव में आकर शादी नहीं करते हैं बल्कि अपने मन के…

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जाति प्रथा से भीषण है लैंगिक विषमता – तस्लीमा नसरीन

धार्मिक कट्टरवाद तो पहले से ही दुनिया के अनेक देशों में है। अब भारत में भी धर्म को ज्यादा महत्व दिया जाने लगा है। जब कि इतिहास गवाह है कि जहां-जहां धार्मिक कट्टरवाद को बढ़ावा मिलता है, वहां वहां समाज के कमजोर वर्गों, जैसे निचली जातियों और महिलाओं, का शोषण और बढ़ जाता है।

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कैसे मिटे गांव की प्यास – भारत डोगरा

ग्रामीण पेयजल की समस्या बढ़ती जा रही है। सरकारी आंकड़े चाहे उपलब्धियों का कुछ भी दावा करें, पर वास्तविक स्थिति बहुत चिंताजनक है। इस कारण स्वास्थ्य, स्वच्छता, शिक्षा, महिला कल्याण आदि विभिन्न क्षेत्रों की क्षति हो रही है।

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पंचकूला से मेलबॉर्न – सुरेन्द्रपाल सिंह

Post Views: 165 थेम्स नदी में कितने ही समुद्री जहाज एक ही स्थान पर खड़े हैं और उनमें सज़ायाफ्ता कैदियों को रखा जाता है। स्थिति यहाँ तक पहुंच चुकी है…

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राजभाषा संबंधी संवैधानिक प्रावधान

Post Views: 131 हिन्दी को भारत की राजभाषा के रूप में 14 सितम्बर सन् 1949 को स्वीकार किया गया । इसके बाद संविधान में राजभाषा के सम्बन्ध में धारा 343…

पीर बुद्धू शाह – सुरेन्द्रपाल सिंह

पीर बुद्धू शाह अपने चार पुत्रों, दो भाइयों और 700 अनुयायियों के साथ सढोरा से चलकर गुरु गोबिन्द सिंह के साथ कंधे से कंधा मिलाकर लड़े। इस लड़ाई में गुरु की फौज को जीत तो हासिल हुई, लेकिन पीर बुद्धू शाह के दो पुत्र अशरफ शाह और मोहम्मद शाह व भाई भूरे शाह शहीद सहित 500 अनुयायी शहीद हुए।

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निजी स्कूल शिक्षा के प्रति बढ़ रहा असंतोष -दीपक राविश

Post Views: 100 वर्तमान समय में निजी स्कूल शिक्षा के प्रति बढ़ रहे असंतोष के दो मुख्य तात्कालिक कारण हैं। पहला समय-समय पर की जाने वाली फीस वृद्धियों से अभिभावकों…