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जनपक्षीय राजनीति का मार्ग प्रशस्त करें

सेवा देश दी जिंदड़िए बड़ी ओखी, गल्लां करणियां ढेर सुखल्लियां ने। जिन्नां देश सेवा विच पैर पाइया उन्नां लख मुसीबतां झल्लियां ने।        – करतार सिंह सराभा यह साल…

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वैचारिक बहस को जन्म दे रही है देस हरियाणा’

विकास होग्या बहुत खुसी, गामां की तस्वीर बदलगी भाईचारा भी टूट्या सै, इब माणस की तासीर बदलगी -रामेश्वर गुप्ता पिछले दस-बारह सालों से ‘हरियाणा नं. 1’ की छवि गढने के…

लिंग-संवेदी भाषा की ओर एक कदम – डा. सुभाष चंद्र

डा. सुभाष चंद्र अपने अल्फ़ाज पर नज़र रक्खो, इतनी बेबाक ग़ुफ्तगू न करो, जिनकी क़ायम है झूठ पर अज़मत, सच कभी उनके रूबरू न करो। – बलबीर सिंह राठी आजकल संवेदनशील स्वतंत्रचेता…

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हरियाणा की पहचान का सवाल

हरियाणा के गठन से ही जब-तब बुद्धिजीवी और राजनीतिज्ञ हरियाणा की पहचान ढूंढने की कवायद करते रहे हैं। लेकिन वे सर्वमान्य पहचान को चिह्नित करने में असफल ही रहे हैं।…

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 छवि का कुहासा और केंचुली उतारता हरियाणा- डा. सुभाष चंद्र

प्रोफेसर सुभाष चंद्र हरियाणा की छवि और वास्तविकता में दूरी बढ़ते बढ़ते इतनी हो गई है कि अब वास्तविकता और उसकी छवि का संबंध टूट गया है। वास्तविकता अपनी जगह…

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हरियाणा के पचास सालः क्या खोया, क्या पाया – डा. सुभाष चंद्र

 संपादकीय इनआमे-हरियाना हमें जिस रोज से हासिल हुआ इनआमे-हरियाना। बनारस की सुबह से खुशनुमा है शामे-हरियाना। न क्यों शादाब हो हर फ़र्दे-खासो आमे हरियाना। तयूरे-बाग़ भी लेते हैं जबकि नामे-हरियाना।…

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नफरत की राजनीतिक बहस और सांप्रदायिक सद्भाव व दोस्ती की दास्तान – डा. सुभाष चंद्र

सुभाष चंद्र  ये दाग़ दाग़ उजाला, ये शबगज़ीदा सहर वो इन्तज़ार था जिस का, ये वो सहर तो नहीं                      …

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कर्ज माफी से कर्ज मुक्ति  न्यूनतम समर्थन मूल्य से निश्चित आय – डा. सुभाष चंद्र

हाय-हाय रै जमींदारा, मेरा गात चीर दिया सारा। ( दयाचंद मायना) पिछले बीस-पच्चीस सालों से खेती-किसानी का संकट निरंतर गहराता जा रहा है। हताश किसान-आत्महत्याओं का सिलसलिा थम नहीं रहा। सरकारें,…

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हरियाणा का पचासवां साल, पूछै कई सवाल- डा. सुभाष चंद्र

सम्पादकीय के बहाने हरियाणा राज्य का पचासवां साल हैं। हरियाणा की बहुत सी उपलब्धियां हैं और विभिन्न क्षेत्रों में कई कीर्तिमान भी स्थापित किए हैं। यह साल हरियाणा के लिए…

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देख कबिरा रोया…डा. सुभाष चंद्र

सुखिया सब संसार है, खावै और सोवै दुखिया दास कबीर है जागै और रोवै कबीर ने झूठ के घटाटोप को भेदकर सच्चाई को पा लिया था, इसलिए उनको ‘रोना’ इस…