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हरियाणा में स्कूली शिक्षा की बिगड़ती स्थिति – नरेश कुमार

हरियाणा में स्कूली शिक्षा की तस्वीर आए दिन लगातार धुंधली होती जा रही है। हाल ही में राज्य सरकार ने प्रदेश में 25 हजार नए शिक्षकों की नियुक्ति का ऐलान…

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परीक्षा से अधिक कठिन है मूल्यांकन – कमलानंद झा

मेरे बिहार (वैसे लगभग पूरे देश में) में मूल्यांकन के संदर्भ में एक फिकरा अत्यंत प्रसि़द्ध है कि एक साल की पढा़ई तीन घंटे की लिखाई और तीन मिनट की…

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बाजार के हवाले शिक्षा -सुरेन्द्र ढिल्लों

शिक्षा हरियाणा प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र  में आए परिवर्तनों पर जैसे ही नजर जाती है, तो यह बात स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ती है कि प्रदेश में विद्यालयों-महाविद्यालयों व…

उमंग स्कूल – जिसका तसव्वुर करने के लिए साहस चाहिए…. -विरेन्द्र सरोहा

शिक्षा प्रतियोगिता की दौड़ में जकड़े और अंक हासिल करने के बचपन विरोधी माहौल में एक ऐसा स्कूल जिसमें परीक्षाएं नहीं होंगी, खेल खेल के लिए होंगे, मेल-जोल के लिए…

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स्वास्थ्य के क्षेत्र में हरियाणा के 50 साल – डा. रणबीर सिंह दहिया

सेहत एक तरफ हरियाणा में धनाढ्य वर्ग है दूसरी तरफ बड़ा हरियाणा इस विकास की अन्धी दौड़ में गिरता पड़ता गुजर बसर कर रहा है। एक हिस्सा ऐसा भी है…

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हरियाणा में स्कूली शिक्षा दशा और दिशा- अरुण कुमार कैहरबा

अधिकतर निजी स्कूलों के पास ना तो खेल के मैदान हैं, ना ही बच्चों की संख्या के अनुकूल बड़ा प्रांगण। कमरों के आकार छोटे हैं। कइ अध्यापकों के पास बुनियादी प्रशिक्षण नहीं है। स्कूलों के मालिक और प्रबंधकों की मुनाफाखोरी अलग से आफत है। अधिकतर निजी स्कूलों में पढ़ा रहे प्रशिक्षित और गैर-प्रशिक्षित अध्यापकों का मानदेय इतना कम है कि वे मुश्किल से गुजारा कर पाते हैं। तमाम पहलुओं के बावजूद समय का यथार्थ यही है कि निजी शिक्षा संस्थान लगातार बढ़ रहे हैं। सरकार द्वारा भी उन्हें संरक्षण दिया जा रहा है। जबकि सरकारी स्कूलों की उपेक्षा हो रही है।

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रेनू यादव – भारत में उच्च शिक्षा और युवा वर्ग

शिक्षा आज भारत का उच्च शिक्षा का ढांचा पूरे विश्व में अमेरिका और चीन के बाद तीसरे स्थान पर है। सरकारी रिपोर्टों के अनुसार उच्च शिक्षण संस्थानों और उनमें पढऩे…

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संभ्रात वर्ग की पहुंच से भी बाहर स्वास्थ्य सेवाएं तथा उनकी कीमत – डा. पंकज गुप्ता

सेहत भारत में  1980-90 के दशकों तक ‘हस्पताल’ सुविधा ज्यादातर सरकारी या पब्लिक क्षेत्र में थी। आर्थिक उदारीकरण के बाद ढांचागत परिवर्तन से सरकारों ने निजी संस्थाओं के लिए सस्ती…

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गांधी स्कूल एक उम्मीद –  नरेश शर्मा

पढ़ेंगे पढ़ाएंगे, जीवन सफल बनाएंगे, जहाज भी उड़ाएंगे, हम भी मास्टर बन जाएंगे, लड़का-लड़की एक समान, हम सब एक हैं, जैसे सलोगन प्रवासी मजदूरों के बच्चों के लिए शाम को…

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वर्तमान शिक्षा बालक को एक अच्छी मशीन बनाती है – प्रो. नन्द किशोर आचार्य

15-16 मार्च को पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ में यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग के पंजाबी विभाग की ओर से ‘शिक्षा और मानवीय विकास के संदर्भ में मातृ भाषा का योगदान’ विषय पर दो- दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया ।