placeholder

हरियाणा में स्कूली शिक्षा की बिगड़ती स्थिति – नरेश कुमार

Post Views: 37 हरियाणा में स्कूली शिक्षा की तस्वीर आए दिन लगातार धुंधली होती जा रही है। हाल ही में राज्य सरकार ने प्रदेश में 25 हजार नए शिक्षकों की…

placeholder

परीक्षा से अधिक कठिन है मूल्यांकन – कमलानंद झा

Post Views: 316 मेरे बिहार (वैसे लगभग पूरे देश में) में मूल्यांकन के संदर्भ में एक फिकरा अत्यंत प्रसि़द्ध है कि एक साल की पढा़ई तीन घंटे की लिखाई और…

placeholder

बाजार के हवाले शिक्षा -सुरेन्द्र ढिल्लों

Post Views: 30 शिक्षा हरियाणा प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र  में आए परिवर्तनों पर जैसे ही नजर जाती है, तो यह बात स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ती है कि प्रदेश…

उमंग स्कूल – जिसका तसव्वुर करने के लिए साहस चाहिए…. -विरेन्द्र सरोहा

Post Views: 136 शिक्षा प्रतियोगिता की दौड़ में जकड़े और अंक हासिल करने के बचपन विरोधी माहौल में एक ऐसा स्कूल जिसमें परीक्षाएं नहीं होंगी, खेल खेल के लिए होंगे,…

placeholder

स्वास्थ्य के क्षेत्र में हरियाणा के 50 साल – डा. रणबीर सिंह दहिया

Post Views: 25 सेहत एक तरफ हरियाणा में धनाढ्य वर्ग है दूसरी तरफ बड़ा हरियाणा इस विकास की अन्धी दौड़ में गिरता पड़ता गुजर बसर कर रहा है। एक हिस्सा…

placeholder

हरियाणा में स्कूली शिक्षा दशा और दिशा- अरुण कुमार कैहरबा

अधिकतर निजी स्कूलों के पास ना तो खेल के मैदान हैं, ना ही बच्चों की संख्या के अनुकूल बड़ा प्रांगण। कमरों के आकार छोटे हैं। कइ अध्यापकों के पास बुनियादी प्रशिक्षण नहीं है। स्कूलों के मालिक और प्रबंधकों की मुनाफाखोरी अलग से आफत है। अधिकतर निजी स्कूलों में पढ़ा रहे प्रशिक्षित और गैर-प्रशिक्षित अध्यापकों का मानदेय इतना कम है कि वे मुश्किल से गुजारा कर पाते हैं। तमाम पहलुओं के बावजूद समय का यथार्थ यही है कि निजी शिक्षा संस्थान लगातार बढ़ रहे हैं। सरकार द्वारा भी उन्हें संरक्षण दिया जा रहा है। जबकि सरकारी स्कूलों की उपेक्षा हो रही है।

placeholder

रेनू यादव – भारत में उच्च शिक्षा और युवा वर्ग

Post Views: 198 शिक्षा आज भारत का उच्च शिक्षा का ढांचा पूरे विश्व में अमेरिका और चीन के बाद तीसरे स्थान पर है। सरकारी रिपोर्टों के अनुसार उच्च शिक्षण संस्थानों…

placeholder

संभ्रात वर्ग की पहुंच से भी बाहर स्वास्थ्य सेवाएं तथा उनकी कीमत – डा. पंकज गुप्ता

Post Views: 152 सेहत भारत में  1980-90 के दशकों तक ‘हस्पताल’ सुविधा ज्यादातर सरकारी या पब्लिक क्षेत्र में थी। आर्थिक उदारीकरण के बाद ढांचागत परिवर्तन से सरकारों ने निजी संस्थाओं…

placeholder

गांधी स्कूल एक उम्मीद –  नरेश शर्मा

Post Views: 30 पढ़ेंगे पढ़ाएंगे, जीवन सफल बनाएंगे, जहाज भी उड़ाएंगे, हम भी मास्टर बन जाएंगे, लड़का-लड़की एक समान, हम सब एक हैं, जैसे सलोगन प्रवासी मजदूरों के बच्चों के…

placeholder

वर्तमान शिक्षा बालक को एक अच्छी मशीन बनाती है – प्रो. नन्द किशोर आचार्य

15-16 मार्च को पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ में यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग के पंजाबी विभाग की ओर से ‘शिक्षा और मानवीय विकास के संदर्भ में मातृ भाषा का योगदान’ विषय पर दो- दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया ।