placeholder

हरियाणा के सम्मुख सामाजिक चुनौती -कृष्ण स्वरूप गोरखपुरिया

Post Views: 113 समाज एक नवम्बर 1966 से पहले हरियाणा कभी भी प्रशासनिक व राजनीतिक ईकाई (यूनिट) नहीं था। इसके बावजूद इस क्षेत्र (हरियाणा) की एक विशिष्ट सांस्कृतिक व सामाजिक…

placeholder

गुड़गांव से गुरुग्राम तक – जगदीप सिंह

Post Views: 185 शहर भले ही गुड़गांव बतौर नाम अब गुरुग्राम हो जाये लेकिन साइबर सिटी, मिलेनियम सिटी जैसे खिताब उसके साथ जुड़ चुके हैं। इस महानगर की अहमियत व्यावसायिक…

placeholder

हरियाणा में प्रवासी मजदूर – नरेश कुमार

Post Views: 122 सामाजिक न्याय हरियाणा इस वर्ष अपनी स्वर्ण जयंती मना रहा है। ये 50 साल हर क्षेत्र में हुए बदलावों के गवाह हैं। हरित क्रांति के प्रभावों से…

हौसलों से उड़ान होती है – राजेश कुमार

Post Views: 98 मेरे पांव लडख़ड़ाते हैं लेकिन मेरे हौसलों को कभी लडख़ड़ाने नहीं दिया क्योंकि मुझे बहुत आगे तक जाना है इन्हीं पांवों से चलकर और बस आगे बढ़ते…

placeholder

गुडगांव के आटोमोबाइल सेक्टर में मजदूरों के हालात – अजय स्वामी

Post Views: 95 रपट गुड़गांव के हाई-वे पर बने अपार्टमेण्ट-शापिंग मालों, आईटी पार्क, साफ्टवेयर व आटो सेक्टर की कम्पनियों की चमक-दमक के कारण गुडगांव की चर्चा पूरे देश में है।…

placeholder

स्टेज पर वह मां  की आखिरी रात थी संजीव ठाकुर

Post Views: 104 व्यक्तित्व मैं तब साढ़े तीन बरस का था। सिडनी, मेरा भाई, मुझसे चार बरस बड़ा था। मां थिएटर कलाकार थीं, हम दोनों भाइयों को बहुत प्यार से…

placeholder

सदानंद साही मातृभाषाओं को बचाने की जरूरत

Post Views: 140 आलेख सदानंद साही समय आ गया है कि हम भाषा के सवाल को गंभीरता से लें। भाषा मनुष्य होने की शर्त है। इसे सिर्फ अभिव्यक्ति, संपन्न और…

placeholder

जोहड़ जैसे प्राकृतिक जल स्रोतों को बचाना होगा

Post Views: 126  सत्यवीर नाहड़िया  देहात की मनोरम छटा में चार चांद लगाने वाले जोहड़ों का अस्तित्व खतरे में है। कभी लोकजीवन की अगाध श्रद्धा व आस्था के केंद्र रहे…

placeholder

अफवाहों का समाजशास्त्र – सुरेन्द्रपाल सिंह

अफवाह की मारक शक्ति समाज को छिन्न-भिन्न कर सकती है, खून की नदियां बहा सकती है, तबाही का मन्जर और ना भरने वाले जख्मों को पैदा कर सकती है।हरियाणा में जाट आरक्षण आंदोलन  से पनपी सामाजिक दरार को पाटने के उद्देश्य से गठित किये गए सद्भावना मंच के राज्य सयोंजक के नाते मार्च और अप्रैल 2016 के राज्य भर में घूमते हुए अफवाह के खतरनाक चरित्र के व्यवहारिक पक्ष को समझने का मौका मिला।

placeholder

एकला चलो, एकला चलो रे – गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर

यदि तोर डाक सुने केउ न आसे तबे एकला चलो रे, एकला चलो, एकला चलो, एकला चलो रे। यदि केउ कथा न कय, ओरे ओ अभागा यदि सबाई थाके मुख फिराये, सबाई करे भय तबे परान खुले ओरे तुई मुख फुटे तोर मनेर कथा, एकला बोलो रे !ऑ यदि सबाई फिरे जाय, ओरे ओ अभागा! […]