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हरियाणा के सम्मुख सामाजिक चुनौती -कृष्ण स्वरूप गोरखपुरिया

Post Views: 719 समाज एक नवम्बर 1966 से पहले हरियाणा कभी भी प्रशासनिक व राजनीतिक ईकाई (यूनिट) नहीं था। इसके बावजूद इस क्षेत्र (हरियाणा) की एक विशिष्ट सांस्कृतिक व सामाजिक…

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गुड़गांव से गुरुग्राम तक – जगदीप सिंह

Post Views: 992 शहर भले ही गुड़गांव बतौर नाम अब गुरुग्राम हो जाये लेकिन साइबर सिटी, मिलेनियम सिटी जैसे खिताब उसके साथ जुड़ चुके हैं। इस महानगर की अहमियत व्यावसायिक…

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हरियाणा में प्रवासी मजदूर – नरेश कुमार

Post Views: 628 सामाजिक न्याय हरियाणा इस वर्ष अपनी स्वर्ण जयंती मना रहा है। ये 50 साल हर क्षेत्र में हुए बदलावों के गवाह हैं। हरित क्रांति के प्रभावों से…

हौसलों से उड़ान होती है – राजेश कुमार

Post Views: 683 मेरे पांव लडख़ड़ाते हैं लेकिन मेरे हौसलों को कभी लडख़ड़ाने नहीं दिया क्योंकि मुझे बहुत आगे तक जाना है इन्हीं पांवों से चलकर और बस आगे बढ़ते…

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गुडगांव के आटोमोबाइल सेक्टर में मजदूरों के हालात – अजय स्वामी

Post Views: 639 रपट गुड़गांव के हाई-वे पर बने अपार्टमेण्ट-शापिंग मालों, आईटी पार्क, साफ्टवेयर व आटो सेक्टर की कम्पनियों की चमक-दमक के कारण गुडगांव की चर्चा पूरे देश में है।…

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स्टेज पर वह मां  की आखिरी रात थी संजीव ठाकुर

Post Views: 605 व्यक्तित्व मैं तब साढ़े तीन बरस का था। सिडनी, मेरा भाई, मुझसे चार बरस बड़ा था। मां थिएटर कलाकार थीं, हम दोनों भाइयों को बहुत प्यार से…

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सदानंद साही मातृभाषाओं को बचाने की जरूरत

Post Views: 677 आलेख सदानंद साही समय आ गया है कि हम भाषा के सवाल को गंभीरता से लें। भाषा मनुष्य होने की शर्त है। इसे सिर्फ अभिव्यक्ति, संपन्न और…

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जोहड़ जैसे प्राकृतिक जल स्रोतों को बचाना होगा

Post Views: 807  सत्यवीर नाहड़िया  देहात की मनोरम छटा में चार चांद लगाने वाले जोहड़ों का अस्तित्व खतरे में है। कभी लोकजीवन की अगाध श्रद्धा व आस्था के केंद्र रहे…

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अफवाहों का समाजशास्त्र – सुरेन्द्रपाल सिंह

अफवाह की मारक शक्ति समाज को छिन्न-भिन्न कर सकती है, खून की नदियां बहा सकती है, तबाही का मन्जर और ना भरने वाले जख्मों को पैदा कर सकती है।हरियाणा में जाट आरक्षण आंदोलन  से पनपी सामाजिक दरार को पाटने के उद्देश्य से गठित किये गए सद्भावना मंच के राज्य सयोंजक के नाते मार्च और अप्रैल 2016 के राज्य भर में घूमते हुए अफवाह के खतरनाक चरित्र के व्यवहारिक पक्ष को समझने का मौका मिला।

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एकला चलो, एकला चलो रे – गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर

यदि तोर डाक सुने केउ न आसे तबे एकला चलो रे, एकला चलो, एकला चलो, एकला चलो रे। यदि केउ कथा न कय, ओरे ओ अभागा यदि सबाई थाके मुख फिराये, सबाई करे भय तबे परान खुले ओरे तुई मुख फुटे तोर मनेर कथा, एकला बोलो रे !ऑ यदि सबाई फिरे जाय, ओरे ओ अभागा! […]