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मार्क्स के जन्म को दो सौ साल पूरे हो चले – अमन वासिष्ठ

Post Views: 213 अमन वासिष्ठ (मार्क्स के जन्म को दो सौ साल हो चुके हैं, मार्क्स ने समाज को नए ढंग से व्याख्यायित किया। द्वंद्वात्मक भौतिकवाद, ऐतिहासिक भौतिकवाद, वर्ग-संघर्ष के…

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सबसे ख़तरनाक होता है हमारे सपनों का मर जाना – महावीर शर्मा

Post Views: 290 महावीर शर्मा  रिटायर्ड कर्मचारी संघ हरियाणा का गठन 6 साल पहले 2012 में किया गया था। वर्तमान में इस संगठन की सदस्यता 20,000 के लगभग है। हरियाणा…

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और सफर तय करना था अभी तो, सरबजीत! – ओमप्रकाश करुणेश

Post Views: 188 ओम प्रकाश करुणेश  (कथाकर व आलोचक सरबजीत की असामयिक मृत्यु पर लिखा गया संस्मरण) सरबजीत के साथ पहली मुलाकात ठीक ठाक से तो याद नहीं, पर खुली-आत्मीय भरी…

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हम ढूंढते फिरे जिन्हें खेतों और गलियों में – ओम सिंह अशफाक

Post Views: 354 ओमसिंह अशफाक  शमशेर बहादुर सिंह  (13-1-1911—12-5-1993) आज से करीब 64 साल पहले मैं शमशेर के इलाके में ही पैदा हुआ था। उनके पैतृक गांव ऐलम (मुज्जफरनगर) से…

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रात भर लोग अंधेरे की बलि चढ़ते हैं – ओम सिंह अशफाक

Post Views: 244 ओमसिंह अशफाक  आबिद आलमी (4-6-1933—9-2-1994) पिछले दिनों अम्बाला में तरक्की पसंद तहरीक में ‘फिकोएहसास के शायर’ जनाब आबिद आलमी हमसे हमेशा के लिए बिछड़ गए। उनका मूल…

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पितृतुल्य प्रो. शिव कुमार मिश्र – ओम सिंह अशफाक

Post Views: 336 ओमसिंह अशफाक  शिव कुमार मिश्र (2-2-1931—21-6-2013) जी का जाना हिन्दी जगत में सक्रिय विमर्श और रचनात्मक आलोचना के एक स्तम्भ का उखड़ जाना है। समकालीन परिदृश्य में इस…

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याद आते हैं पुराने दोस्त नानक चंद से बातचीत -चंद्र त्रिखा

Post Views: 570 चंद्र त्रिखा नानक चंद की उम्र उस समय 21 साल रही होगी, जब पाकिस्तान के नूरगढ़ गांव जिला मुल्तान में उनके गांव पर मुसलमानों ने हमला बोल…