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सांप – रत्न कुमार सांभरिया

वरिष्ठ साहित्यकार रत्न कुमार सांभरिया कहानी के नामचीन हस्ताक्षर हैं। कहानी सृजन के क्षेत्र में उन्होंने राष्ट्रीय-अंतराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। उनकी कहानियों में ठेठ देसीपन व जमीनी गंध…

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चुराही पहेलियां (फड़ौणी)

चुराही (चंबा जिले के चुराह तहसील की पहाड़ी बोली) में पहेलियों को फड़ौणी कहा जाता है। जब बर्फ गिर रही होती है तो घर के सारे सदस्य रसोई में जमा…

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हिमाचली व्यंजन

– अर्शदीप सिंह बिच्छु बूटी की सब्जी यह एक जहरीला पौधा है। हरे रंग और पान के आकार के पत्तों वाले इस पौधे पर असंख्य कांटे होते हैं। अगर कांटा…

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शंवाई-पंझेई – दो लड़कियों की बलि देकर बनाया गया था शिव मंदिर

– अर्शदीप सिंह चंबा जिले की सुंदर वादियों में स्थित है एक छोटी सी तहसील चुराह। चुराह तहसील ऊंचे पहाड़ों पर बसने वाले दो गांव इस इलाके के प्रसिद्ध गांव…

जाट कहवै, सुण जाटणी – प्रदीप नील वशिष्ठ

एक बात ने कई सालों से मुझे परेशान कर रखा था। और वह शर्म की बात यह कि अपने  हरियाणा में हरियाणवी बोलने वाले को नाक-भौं चढ़ा कर इस नजऱ…

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फुहशनिगार नहीं, हकीकतनिगार इस्मत चुगताई – गुरबख्श मोंगा

गुरबख्श सिंह मोंगा समूचे भारतीय उपमहाद्वीप में इस्मत चुगताई का नाम किसी तआरूफ  का मोहताज नहीं। अपने ही घर में मजहब, मर्यादा, झूठी इज्जत के नाम पर गुलाम बना ली…

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पानीपत थर्मल प्लांट का पास-परिवेश – आशु वर्मा/अंशु मालवीय

जवाहर लाल नेहरू ने जिन बड़े सार्वजनिक प्रतिष्ठानों को आधुनिक युग के मंदिर और ‘कमांडिंग हाइट्स’ कहा था, उन्हीं में से एक, इस प्लांट के आसपास की हवा इतनी बोझिल…

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सरबजीत, तारा पांचाल और पिलखन का पेड़ -ओमसिंह अशफाक

ओमसिंह अशफाक सरबजीत (30-12-1961—13-12-1998) दोस्तों का बिछडऩा बड़ा कष्टदायक होता है। ज्यों-ज्यों हमारी उम्र बढ़ती जाती है पीड़ा सहने की शक्ति भी क्षीण होती रहती है। जवानी का जोश तो…

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समाजवाद की स्थापना चाहते थे शहीद भगत सिंह

राजविन्द्र सिंह चन्दी  आल इंडिया लार्यर्स यूनियन जिला कांऊसिल कुरुक्षेत्र ने शहीद-ए-आजम भगत सिंह जयंती के उपलक्ष्य में 27 सितम्बर 2018 को बार रूम जिला न्यायालय कुरुक्षेत्र में शहीद-ए-आजम भगत…

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दास्तान एक शहर की – ओम सिंह अशफाक

ओमसिंह अशफाक  दास्तान- ए -शहर कैसे बयां करूं जीऊँ तो कैसे जीऊँ, मरूँ तो कैसे मरूँ मैं सन् 1984 में इस शहर में आया तो इसे आदतन शहर कहकर अपने…