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गढ़ घासेड़ा – ऐतिहासिक गांव – सिद्दीक अहमद मेव

 सिद्दीक अहमद मेव (सिद्दीक अहमद मेव पेशे से इंजीनियर हैं, हरियाणा सरकार में कार्यरत हैं। मेवाती समाज, साहित्य, संस्कृति के  इतिहासकार हैं। इनकी मेवात पर कई पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी…

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हरियाणा का इतिहास-प्रारम्भिक काल

बुद्ध प्रकाश वर्तमान हरियाणा राज्य, देश का वह भाग है जहाँ भारतीय संस्कृति अद्भुत, पल्लवित, विकसित एवं समृद्ध हुई है। इतिहास के प्रारम्भ में यहीं पर उन विचारों, मूल्यों एवं…

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महात्मा गांधीः धर्म और साम्प्रदायिकता – डा. सुभाष चंद्र

साम्प्रदायिकता आधुनिक युग की परिघटना है। अंग्रेजों ने भारत की शासन सत्ता संभाली तो राजनीति और आर्थिक व्यवस्था प्रतिस्पर्धात्मक हो गई। अंग्रेजी शासन में हिन्दुओं व मुसलमानों के उच्च वर्ग…

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हरियाणा का इतिहास-कुरु कीर्ति का चरमोत्कर्ष – बुद्ध प्रकाश

बुद्ध प्रकाश कालांतर में कुरु साम्राज्य राजनीतिक गौरव तथा आर्थिक उत्थान का केंद्र बन गया। महाभारत से यह पता चलता है कि उस समय कुरुवंश का गौरव तथा समृद्धि पराकाष्ठा…

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महाभारत-युद्ध के दुष्परिणाम – बुद्ध प्रकाश

बुद्ध प्रकाश महाभारत में वर्णित अनुसार कुरुओं के पतन से यह क्षेत्र बिल्कुल ही नष्ट-भ्रष्ट हो गया। उपनिषद् में कुरु के पतन का टिड्डीदल द्वारा उनकी फसलों के विनाश का…

हरियाणा-आक्रमण तथा एकीकरण का इतिहास – बुद्ध प्रकाश

बुद्ध प्रकाश इस प्रकार लोग कृषि-कार्य में प्रवृत्त हो गये जबकि पूर्व में साम्राज्य-वादी गतिविधियों तथा उत्तर-पश्चिम में आक्रमणकारी शक्तियों की गति तीव्र से तीव्रतर होती गई। मगध साम्राज्य गंगा…

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हरियाणा का इतिहास-सैन्य तंत्र का विकास – बुद्ध प्रकाश

बुद्ध प्रकाश     चौथी शताब्दी में गुप्त वंश ने उत्तरी भारत को एकता प्रदान की। हरियाणा के लोगों ने उनकी इस कार्रवाई का स्वागत किया तथा यौधेय तथा अन्य…

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हरियाणा का इतिहास-राजकीय वैभव के पथ पर – बुद्ध प्रकाश

बुद्ध प्रकाश  गुप्त युग में शांतिकाल के दौरान हरियाणा का भौतिक एवं आर्थिक विकास हुआ। यहां के लोग देश के अन्य भागों में फैल गए, जहां वे अपने क्षेत्र का…

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मैक्सिम गोर्की का पत्र रूसी कामरेडों के नाम

मैक्सिम गोर्की का पत्र रूसी कामरेडों के नाम गरीबी की क्रूरता के विरुद्ध संघर्ष का अर्थ है, दुनिया में फैले उत्पीडऩ के जाल से मुक्ति के लिए छेडी गई जंग,…

पंज प्यारे – जातिवाद पर कड़ा प्रहार और जनवाद का प्रतीक

अपना शीश देने के लिए तैयार हुए पांचों व्यक्तियों में से ज्यादा समाज द्वारा नीची समझी जाने वाली जातियों में थे और खासतौर पर दस्तकार थे। उनमें से एक खत्री था, एक जाट, एक धोबी, एक नाई और एक कुम्हार था। इस से पता चलता है कि गुरु गोबिंद सिंह जी को तमाम जातियों और खासकर छोटी समझी जाने वाली जनता का अपार समर्थन था। उसे मेहनतकश किसान और मजदूरों का समर्थन हासिल था। उसे व्यापारी वर्ग का समर्थन था।