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मानवीय संवेदना व जिजीविषा हमेशा ज़िंदा रहती है – सुभाष चंद्र

पुरानी होने से ही न तो सभी वस्तुएँ अच्छी होती हैं और न नयी होने से बुरी तथा हेय।विवेकशील व्यक्ति अपनी बुद्धि से परीक्षा करके श्रेष्ठकर वस्तु को अंगीकार कर लेते हैं और मूर्ख लोग दूसरों द्वारा बताने पर ग्राह्य अथवा अग्राह्य का निर्णय करते हैं।

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रहीम – राहुल सांकृत्यायन

रहीम असाधारण सुन्दर तरुण था। चित्रकार उसकी तस्वीरें उतारते थे, जिन्हें अमीर लोग अपनी बैठकों को सजाने के लिए लगाते थे। होश संभालते ही, रहीम का शायरों और कवियों, संगीतज्ञों और कलाकारों से संपर्क हुआ। लेकिन अकबर रहीम को कलाकार नहीं, सैनिक बनाना चाहता था। रहीम के जीवन का अधिकांश भाग सिपाही के तौर पर ही बीता।

गदर पार्टी के पहले प्रधान सोहन सिंह भकना – बूटा सिंह सिरसा 

देश के आजादी आंदोलन में गदर पार्टी की भूमिका को इतिहास में वह स्थान नहीं दिया गया जो मिलना चाहिए था। पंजाब व पंजाबी भाषायी क्षेत्र के बाहर बहुत कम लोग गदर पार्टी के बलिदानों से परिचित हैं। 1 जनवरी 2020 गदर पार्टी के पहले प्रधान सोहन सिंह भकना का 150 वां जन्म दिन है।

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कायमखानीःसाझी संस्कृति की मिसाल – सुरेंद्र पाल सिंह

आज हम ऐसे दौर से गुज़र रहे हैं जब इतिहास को एकपक्षीय और दुर्भावनापूर्ण तरीके से हमें परोसा जा रहा है। ऐसे में इतिहास के वे अध्याय जो साझी संस्कृति के उदाहरण हैं और तमाम तरह की साम्प्रदायिक संकीर्णता से ऊपर उठे हुए हैं उनका अध्ययन आवश्यक हो जाता है। सामाजिक- राजनीतिक आयाम को भी ऐतिहासिक तौर पर बेहतर तरीके से समझने के लिए इस प्रकार के वृतांत महत्वपूर्ण है।

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क्रांतिकारी शहीद भगवतीचरण बोहरा व दुर्गादेवी – डा. सुभाष चंद्र

भगवतीचरण बोहरा व दुर्गादेवी (क्रांतिकारी इन्हें दुर्गा भाभी कहकर पुकारते थे) का क्रांतिकारी इतिहास में उल्लेखनीय योगदान है। संगठन की रणनीति बनाने का काम हो, परचे-पेम्फलेट लिखने का काम हो, धन जुटाने को काम हो, सूचनाएं एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने का काम हो या फिर बम बनाने का क्रांतिकारियों के हर काम में इस दंपति ने अग्रणी भूमिका निभाई।

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‘हम भारत के लोग‘ और आप बाबा साहब? – कनक तिवारी

बाबा साहब! ताजा इतिहास में गांधी सुकरात की तरह सत्य के उपासक, नेहरू प्लेटो की तरह गणतंत्र के रचयिता और आप पूरा ज्ञानशास्त्र विवेक, जेहन और कर्म में बिखेरते महान अरस्तू की भूमिका में रहे। तीनों हमारी आत्मा के रचयिता नहीं होते, तो ‘हम भारत के लोग‘ गोरों की गुलामी से कहां छूटते। गांधी और नेहरू ने इतिहास की खुर्दबीन से तुम्हें ढूंढ़कर नायाब हीरा निकाला।

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भारत की पहली शिक्षिका सावित्रीबाई फुले – सुभाष चंद्र

भारत की पहली शिक्षिका सावित्रीबाई फुले ने भारतीय समाज में मौजूद धर्मभेद, वर्णभेद, जातिभेद, लिंगभेद के खिलाफ कार्य किया। वे जैविक बुद्धिजीवी थी, जिन्होंने अपने अनुभवों से ही अपने जीवन-दर्शन का निर्माण किया। सावित्रीबाई फुले ने समाज में सत्य, न्याय, समानता, स्वतंत्रता और मानव भाईचारे की स्थापना के लिए अनेक क्रांतिकारी कदम उठाए।

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बन्दानवाज

1322 ई. में बंदा नवाज का जन्म हुआ। बंदा नवाज का पूरा नाम था सैयद मुहम्मद बिन सैयद युसुफुल अरूफ। इनके बाल बहुत बड़े-बड़े थे। अतः लोग इन्हें गेसू दराज (गेसू-बाल, दराज-बड़ा) भी कहते थे। इस समय ये ख्वाजा बन्दे नवाज गेसूदराज के नाम से स्मरण किए जाते हैं।

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ननकाना साहिब : एक ऐतिहासिक विरासत – सुरेंद्र पाल सिंह

आजकल करतारपुर कॉरिडोर खुल चुका है और गुरु नानकदेव जी की 550वीं जयन्ती के उपलक्ष्य में रोजाना हज़ारों श्रद्धालु पाकिस्तान जा पा रहे हैं. फ़रवरी 1921 में ननकाना साहब गुरुद्वारा के महंत नारायण दास ने पठानों के हाथों 139 सिक्खों को (थॉर्नबर्न ICS के अनुसार) या तो ज़िन्दा जलवा दिया था या मरवा दिया था क्योंकि उसे शक था कि वे उसे गद्दी से हटाना चाहते थे.

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यादों के आइने में भगतसिंह और उनके साथी – यशपाल

Post Views: 594 मैं यह कहानी व्यक्तिगत अनुभवों के आधार पर लिख रहा हूं। भगत सिंह, सुखदेव और मैं कालिज के सहपाठी थे। भगवतीचरण हम लोगों से दो बरस आगे…