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हम तालिबान बनना चाहते हैं – सहीराम

सहीराम  खाप पंचायती वैसे तो तालिबान बन ही चुके थे, सब उन्हें मान भी चुके थे। लेकिन पक्के और पूरे तालिबान बनने की उनकी इच्छा ने इतना जोर मारा कि…

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मीडिया, छवियां और गोत्र विवाद – डॉ. देवव्रत सिंह

हरियाणा के लोगों को एक बात का अहसास तो हो चुका है कि मीडिया द्वारा दिखाये जाने के बाद उनकी छवि को बट्टा लग चुका है। अधिकांश हरियाणवी इस दर्द…

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मीडिया में हरियाणवी महिला की छवि – सहीराम

सहीराम  मीडिया में हरियाणवी महिला की छवि क्या है? जैसे हरियाणवी पुरुष जिसे आमतौर पर हाळी-पाळी कहा जाता है, की छवि खेतों में खटनेवाले एक मेहनतकश किसान की छवि है…

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दायरा’ संकीर्ण सामाजिक दायरों पर प्रहार -विकास साल्याण

सिनेमा-चर्चा रोहतक के फि़ल्म एवम् टेलीविजन संस्थान के छात्रों द्वारा बनाई गई ‘दायरा’ फि़ल्म हरियाणवी सिनेमा को नई दिशा की ओर ले जा रही है। इस फिल्म में उस गहरे…

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स्त्री-चिंतन मार्फत ‘गूंगे इतिहासों की सरहदों पर -अंकित नरवाल

दुनिया की आधी आबादी होने के बावजूद स्त्रियों की अपनी स्वतंत्रता, समानता और सत्ता के लिए तथाकथित लैंगिक नियमों, संस्कृतियों और पितृसत्तावादी मानदण्डों से जद्दोजहद जारी है। शताब्दियों से विवाह, विज्ञापन, सौंदर्य-प्रसाधन और सामंती सारणियों के तमाम प्रयोजन उसे माल में तब्दील कर उसकी खरीद-फरोत पर आमादा हैं। स्त्री-जीवन की इसी जद्दोजहद के भावबोध से भरी सुबोध शुक्ल की अनूदित पुस्तक ‘गूंगे इतिहासों की सरहदों तक’ नारी-जीवन के पाश्चात्यी दृष्टिकोण को सामने लाती है, जिससे मुख्यतः अमेरिका और यूरोप का बीसवीं शताब्दी का स्त्रीवादी-चिंतन हमारे सामने आता है। बेट्टी फ्रीडन, केट मिलेट, शुलामिथ फायरस्टोन, एंड्रिया डुआर्किन, नवल अल सादवी, ग्लोरिया जां वॉटकिंस ‘बेल हुक्स’, नाओमी वुल्फ और फ्रिस्टीना हॉफ सॉमर्स नामक आठ स्त्री-चिंतकों की प्रमुख पुस्तकों से कुछ चुने हुए लेख इस पुस्तक में शामिल किए गए हैं, जो स्त्री-जीवन के संघर्षों की ओर हमारा ध्यान ले जाते हैं। 

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कृषि और महिलाएं -अंजू

आलेख हमारा प्रदेश कृषि प्रधान है। प्रदेश की जनसंख्या का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा कृषि के कार्य में संलग्न है। यहां के निवासियों की आजीविका का मुख्य साधन कृषि होने…

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महिला की पूर्व निर्धारित भूमिका में बदलाव -सुमित सौरभ 

सामाजिक न्याय अपने निर्माण के पचास वर्षों के दौरान हरियाणा राज्य का तीव्र आर्थिक विकास हुआ है। विकास के माप हेतु निर्मित सूचकांक के विभिन्न सूचकों को इस राज्य के…

महिलाओं के प्रति सामाजिक नजरिया -जगमति सांगवान

महिला जब हम छोटे थे तो हमारी दादी-मांओं, चाची-ताइयों से सुना करते थे कि जब आजादी का आंदोलन जारी था तो वो ये गीत बड़े ही चाव से गाया करती…

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लड़की जो कर सकती है अमा अता आयडू, अनु.- विपुला

अफ्रीकी कहानी उनका कहना है कि मेरा जन्म घाना के मध्यभाग में स्थित एक बड़े गांव हसोडजी में हुआ। वे ऐसा भी कहते हैं कि जब सारा अफ्रीका सूखा-ग्रस्त था,…

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जरा सोचिए 

पिछले दशक में हरियाणा प्रेम-विवाह करने वाले नवयुवक-नवयुवतियों की उनके परिजनों द्वारा हत्या के लिए खासा बदनाम हुआ। इस तरह का माहोल बनाने में काफी बड़ी भूमिका समाज के ठेकेदारों-खाप पंचायतियों की भी रही।