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दिल्ली से कलकत्ता – बालमुकुंद गुप्त

(16 जनवरी 1899 को भारत मित्र अखबार बालमुकुंद गुप्त के संपादन में प्रकाशित हुआ। इस अंक में दिल्ली से कलकत्ता तक लेख में अपनी यात्रा का वर्णन किया है। इस वृतांत में बालमुकुंद गुप्त की विलक्षण वर्णन क्षमता, संवेदनशीलता और संवेदनशील दृष्टि के दर्शन होते हैं। )

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पीछे मत फेंकिये – बालमुकुंद गुप्त

Post Views: 376              बालमुकुंद गुप्त ती ख्याति का आधार हैं ‘शिवशंभु के चिट्ठे’। शिवशंभु के चिट्ठे तत्कालीन वायसराय को लिखी गई खुले पत्र हैं। ये शिवशंभु शर्मा के नाम…

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हँसी-खुशी  – बालमुकुंद गुप्त 

हँसी भीतर आनंद का बाहरी चिन्ह (चिह्न) है। जीवन की सबसे प्यारी और उत्तम से उत्तम वस्तु एक बार हँस लेना तथा शरीर के अच्छा रखने की अच्छी से अच्छी दवा एक बार खिलखिला उठना है। पुराने लोग कह गए हैं कि हँसो और पेट फुलाओ।

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यादों के आइने में भगतसिंह और उनके साथी – यशपाल

Post Views: 578 मैं यह कहानी व्यक्तिगत अनुभवों के आधार पर लिख रहा हूं। भगत सिंह, सुखदेव और मैं कालिज के सहपाठी थे। भगवतीचरण हम लोगों से दो बरस आगे…

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इसाए जी हो गरीब्बां जो अन्न पाणी वो दास – धनपत सिंह

Post Views: 275 इसाए जी हो गरीब्बां जो अन्न पाणी वो दासइसीए हो सै भूख जयसिंह इसी ए होया कर प्यास सांप के पिलाणे तैं भाई बणै दूध का जहरप्यार…

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जमाना ही चोर है – धनपत सिंह

Post Views: 318 जमाना ही चोर है, पक्षी-पखेरू क्या ढोर है कोये-कोये चोर है जग म्हं लीलो आने और दो आने काजवाहरात का चोर है कोय, कोय है चोर खजाने…

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हे तूं बालम के घर जाइये चंद्रमा – धनपत सिंह

Post Views: 254 हे तूं बालम के घर जाइये चंद्रमा,जाइये चंद्रमा और के चाहिये चंद्रमा आज सखीयां तैं चाली पट, दो बात सुणैं नैं म्हारी डटघूंघट तणना मुश्किल, बोहड़ीया बणना…

गुगा पीर की छड़ी, नानी कूद के पड़ी – सोनिया सत्या नीता

Post Views: 578 भादव के शुरू होते ही डेरू बजने की परम्परा भी जीवंत होती है. गांव देहात मे भादव के आने पर डेरू वाले एकम से लेकर नवमी तक…

शहीद भगत सिंह और जलियाँवाला बाग के कुछ अनछुए प्रसंग

Post Views: 567 लेखक व सामाजिक कार्यकर्ता सुरेन्द्रपाल सिंह द्वारा प्रसिद्ध चितंक व शहीद भगत सिंह के भानजे प्रो.जगमोहन सिंह जी का साक्षात्कार। 13 अगस्त 2019 की सुबह हरिजन सेवक…