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कैसे मिटे गांव की प्यास – भारत डोगरा

ग्रामीण पेयजल की समस्या बढ़ती जा रही है। सरकारी आंकड़े चाहे उपलब्धियों का कुछ भी दावा करें, पर वास्तविक स्थिति बहुत चिंताजनक है। इस कारण स्वास्थ्य, स्वच्छता, शिक्षा, महिला कल्याण आदि विभिन्न क्षेत्रों की क्षति हो रही है।

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घाणी फोड़ रही थी जोट न्यूं आपस में बतलाई – मंगतराम शास्त्री

(प्रचलित तर्ज- होळी खेल रहे नन्दलाल…)घाणी फोड़ रही थी जोट न्यूं आपस में बतलाईहम रहां माट्टी संग माट्टी, म्हारी जड़ चिन्ता नै चाट्टीपाट्टी पड़ी खेस की गोठ, दे म्हैं को…

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एक चुप्पी -जयपाल

सवेरे-सवेरेएक हाथ में टोकरीदूसरे में झाडूवह निकल पड़ती है घर सेजाती है एक घर से दूसरे घरएक मोहल्ले से दूसरे मोहल्लेकुछ दौड़ती हैकुछ भागती हैकुछ हंसती हैकुछ रोती हैकरती है…

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सर्दी आ रही है – जयपाल

सर्दी आ रही हैकहा बूढ़े आदमी ने अपने आप सेएक हवा का झौंका आयाबच्चे ने फटाक से खिड़की बंद कर दीउधर दादी अम्मा ने दो-तीन बार सन्दूक खोला हैउसे फिर…

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गाम के पान्ने – ओम प्रकाश करुणेश

गाम के पान्ने गांव-मुहल्ले, कस्बे-शहरअगड़-बगड़ में बसी मरोड़पड़ोस के तान्ने, पास के पान्नेबसे सरिक्के-कुणबे होड़जलण में फुकते, राख फांकतेधूल उड़ाते, गोहर टेढ़ेघास-फूंस न्यार ने जारीघर की रोणक नारीसब कुछ सहतीयह…

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जॉर्ज लूकाच – डा. ओमप्रकाश ग्रेवाल

साहित्यिक मसलों की मार्क्सवादी दृष्किोण से व्याख्या करने वाले समर्थ आलोचकों में लूकाच का नाम आता है। किन्तु उनकी कुछ मुख्य स्थापनाओं के बारे में मार्क्सवादी चिन्तकों में काफी मतभेद…

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कविता की भाषा और जनभाषा – डा. ओमप्रकाश ग्रेवाल

आलेख कविता की भाषा का जन-भाषा से किस प्रकार का सम्बन्ध हो इस प्रश्न पर हम यहां केवल जनवादी कविता के संदर्भ में ही विचार करेंगे। कविता की भाषा के…

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राजभाषा संबंधी संवैधानिक प्रावधान

हिन्दी को भारत की राजभाषा के रूप में 14 सितम्बर सन् 1949 को स्वीकार किया गया । इसके बाद संविधान में राजभाषा के सम्बन्ध में धारा 343 से 352 तक…

पीर बुद्धू शाह – सुरेन्द्रपाल सिंह

पीर बुद्धू शाह अपने चार पुत्रों, दो भाइयों और 700 अनुयायियों के साथ सढोरा से चलकर गुरु गोबिन्द सिंह के साथ कंधे से कंधा मिलाकर लड़े। इस लड़ाई में गुरु की फौज को जीत तो हासिल हुई, लेकिन पीर बुद्धू शाह के दो पुत्र अशरफ शाह और मोहम्मद शाह व भाई भूरे शाह शहीद सहित 500 अनुयायी शहीद हुए।