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भारत की पहली शिक्षिका – माता सावित्रीबाई फुले

दिनांक 03-01-2019 को जोतिबा-सावित्री बाई फुले पुस्तकालय, सैनी समाज भवन, कुरूक्षेत्र में माता सावित्री बाई फुले के जन्मोत्सव पर सत्य शोधक फाउंडेशन की ओर से एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें देस हरियाणा के संपादक और कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग प्रोफेसर डॉ. सुभाषचन्द्र द्वारा लिखित सावित्री बाई फुले के जीवन और चिंतन पर केन्द्रित पुस्तक ‘भारत की पहली शिक्षिका माता सावित्रीबाई फुले’ का विमोचन किया गया।

शिक्षा जिंदगी का गेम चेंजर – सुभाष चंद्र

सावित्रीबाई फुले जयंती 2 जनवरी 2020 को गांव बरसत जिला करनाल में सत्यशोधक फाउंडेशन व सृजन कला मंच, बरसत द्वारा आयोजित कार्यक्रम

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सिपाही के मन की बात – मंगतराम शास्त्री

Post Views: 117 कान खोल कै सुणल्यो लोग्गो कहरया दर्द सिपाही का। लोग करैं बदनाम पुलिस का धन्धा लूट कमाई का।। सारी हाणां रहूँ नजर म्ह मेरी नौकरी वरदी की…

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सै दरकार सियासत की इब फैंको गरम गरम – मंगतराम शास्त्री

मंगतराम शास्त्री हरियाणा के समसामयिक विषयों पर रागनी लिखते हैं. यथार्थपरकता उनकी विशेषता है.

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बन्दानवाज

1322 ई. में बंदा नवाज का जन्म हुआ। बंदा नवाज का पूरा नाम था सैयद मुहम्मद बिन सैयद युसुफुल अरूफ। इनके बाल बहुत बड़े-बड़े थे। अतः लोग इन्हें गेसू दराज (गेसू-बाल, दराज-बड़ा) भी कहते थे। इस समय ये ख्वाजा बन्दे नवाज गेसूदराज के नाम से स्मरण किए जाते हैं।

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ननकाना साहिब : एक ऐतिहासिक विरासत – सुरेंद्र पाल सिंह

आजकल करतारपुर कॉरिडोर खुल चुका है और गुरु नानकदेव जी की 550वीं जयन्ती के उपलक्ष्य में रोजाना हज़ारों श्रद्धालु पाकिस्तान जा पा रहे हैं. फ़रवरी 1921 में ननकाना साहब गुरुद्वारा के महंत नारायण दास ने पठानों के हाथों 139 सिक्खों को (थॉर्नबर्न ICS के अनुसार) या तो ज़िन्दा जलवा दिया था या मरवा दिया था क्योंकि उसे शक था कि वे उसे गद्दी से हटाना चाहते थे.

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बाबा नानक – संतोख सिंह धीर

गुरु नानक का जन्म 1469 में, पंजाब प्रान्त के ननकाना साहब नामक स्थान पर हुआ, जो आज कल पाकिस्तान में है। वे महान विचारक और समाज सुधारक थे। उनका व्यक्तित्व साम्प्रदायिक सद्भाव का प्रतीक है। उन्होंने इनसान की समानता का संदेश दिया।

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निराशावादी – रामधारी सिंह ‘दिनकर’

Post Views: 268 पर्वत पर, शायद, वृक्ष न कोई शेष बचा धरती पर, शायद, शेष बची है नहीं घास उड़ गया भाप बनकर सरिताओं का पानी, बाकी न सितारे बचे…

भैंस का स्वर्ग – बालमुकुंद गुप्त

सन् 1905 में ‘स्फुट कविताएं’ नाम से बालमुकुंद गुप्त की कविताओं का संग्रह प्रकाशित हुआ। जिसमें उनकी समस्त कविताएं संकलित हैं। ‘भैंस का स्वर्ग’ गुप्त जी की पहली कविता है।