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कर जोड़ खड़ी सूं प्रभु लाज राखियो मेरी – पं. लख्मीचंद

महाभारत में द्रोपदी का एक ऐतिहासिक सवाल किया जो अभी तक अनुत्तरित है।बहुत ही खूब रागनी में पं. लख्मीचंद ने भारतीय समाज की पितृसत्तात्मक बनावट का स्पष्ट संकेत भी है।

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हिंदी-साहित्य के इतिहास पर पुनर्विचार – नामवर सिंह

इतिहास लिखने की ओर कोई जाति तभी प्रवृत्त होती है जब उसका ध्‍यान अपने इतिहास के निर्माण की ओर जाता है। यह बात साहित्‍य के बारे में उतनी ही सच है जितनी जीवन के।

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हो पिया भीड़ पड़ी मैं नार मर्द की खास दवाई हो – पं. लख्मीचंद

जब भी मर्द पर संकट आता है तो स्त्री की गोद ही संबल होती है। कितने ही साहित्यकारों ने इस तरह के भाव प्रकट किए हैं। आमतौर पर लख्मीचंद की रागनियों में स्त्री की छवि पुरुष की सफलता में बाधक की ही है, लेकिन यहां एक स्त्री-स्वर में पं. लख्मीचंद की आत्मा की पुकार उठी है और ऐसा वे इसलिए कर सके कि यहां शास्त्र समर्थित रुढियों के बोझ को उतार फेंका जिसे वे अकसर ढोते रहे थे.

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ये सफर है तीरगी से रोशनी तक दोस्तो!

Post Views: 2  बलबीर राठी (16 अक्तूबर 2018 को बलबीर सिंह राठी का देहावसान हो गया। बलबीर सिंह राठी का जन्म अप्रैल 1933 में रोहतक जिले के लाखन माजरा गांव…

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लोग्गां की हुसयारी देक्खी – सत्यवीर नाहड़िया

Post Views: 3 लोग्गां की हुसयारी देक्खी, न्यारी दुनियादारी देक्खी। चोर-चोर की बात छोड़ इब, चोर-पुलिस म्हं यारी देक्खी। दरद मीठल़ा देग्यी बैरण, सूरत इतनी प्यारी देक्खी। घूम्मै नित अफसरी…

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बिखरे हुए ख्वाबों को – राजकुमार जांगड़ा ‘राज’

Post Views: 3 बिखरे हुए ख्वाबों को, एक साथ संजोना है गिरते भी रहना है चलते भी जाना है खुशियों सा कोलाहल  तो सिर्फ दिखावा है गायेगा सिर्फ वही आता…

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किसान की मुसीबत नैं जाणै सै किसान – धनपत सिंह

Post Views: 0 किसान की मुसीबत नैं जाणै सै किसानलूट-खसोट मचावणियां तूं के जाणै बेईमान माह, पोह के पाळे म्हं भी लाणा पाणी होदिन रात रहे जा बंध पै कस्सी…

मुक्तिबोध के जन्म शताब्दी अवसर पर एक काव्य-गोष्ठी

Post Views: 4                 22 अगस्त को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की आर्टस फैक्लटी में टीम देस हरियाणा ने गजानन माधव मुक्तिबोध के जन्म शताब्दी अवसर पर एक काव्य-गोष्ठी का आयोजन किया…

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दिन – संगीता बैनीवाल

Post Views: 3  बाजरे की सीट्टियां पै खेत की मचाण पै चिड्ड़ियां की लुक-मिच्चणी संग खेल्या अर छुपग्या दिन। गोबर तैं लीपे आंगण म्ह हौळे हौळे आया दिन। टाबर ज्यूं…