placeholder

Post Views: 10 प्रश्न-“आपके यहाँ इतनी अधिक भाषाएँ, इतनी अधिक जातियाँ हैं कि उनका पूरा गड़बड़झाला है। आप एक-दूसरे को किस तरह से समझ पाते हैं?”  अबूतालिब का जवाब-“जो भाषाएँ…

placeholder

जन-जन का चेहरा एक- गजानन माधव मुक्तिबोध

Post Views: 6 चाहे जिस देश, प्रान्त, पुर का हो जन-जन का चेहरा एक!  एशिया की, यूरोप की, अमरीका की  गलियों की धूप एक।  कष्ट-दुख सन्ताप की,  चेहरों पर पड़ी…

placeholder

गाँव एक गुरुद्वारे दो – सुरेंद्र पाल सिंह

बात सामान्य सी है लेकिन सामान्य लगने वाली बातों के हम इतने अभ्यस्त हो जाते हैं कि असामान्य बातें आँखों से ओझल होनी शुरू हो जाती हैं। हिंदू मन्दिर तो सदियों से केवल द्विजों के लिए ही शास्त्रसम्मत विधान से बनते रहे हैं लेकिन कोई गुरुद्वारा जब समुदाय के आधार पर बने तो सवालिया निशान लगना वाजिब है। मगर जब कोई बात आम हो जाए तो खास नहीं लगती। फिर भी आम के पीछे छुपे हुए खास को देखना आवश्यक है जिससे हमें सामाजिक डायनामिक्स की शांत और सहज दिशा और दशा का भान होता है।

गदर पार्टी के पहले प्रधान सोहन सिंह भकना – बूटा सिंह सिरसा 

देश के आजादी आंदोलन में गदर पार्टी की भूमिका को इतिहास में वह स्थान नहीं दिया गया जो मिलना चाहिए था। पंजाब व पंजाबी भाषायी क्षेत्र के बाहर बहुत कम लोग गदर पार्टी के बलिदानों से परिचित हैं। 1 जनवरी 2020 गदर पार्टी के पहले प्रधान सोहन सिंह भकना का 150 वां जन्म दिन है।

placeholder

शिक्षा, शिक्षक और बदलावः एक चुनौती, एक अवसर – मुलख सिंह 

शिक्षा का मतलब यह नहीं है कि दिमाग में कई ऐसी सूचनाएं एकत्रित कर ली जाएं जिसका जीवन में कोई इस्तेमाल ही नहीं हो। हमारी शिक्षा जीवन निर्माण, व्यक्ति निर्माण और चरित्र निर्माण पर आधारित होनी चाहिए। ऐसी शिक्षा हासिल करने वाला व्यक्ति उस व्यक्ति से अधिक शिक्षित माना जाना चाहिए जिसने पूरे पुस्तकालय को कण्ठस्थ कर लिया हो। अगर सूचनाएं ही शिक्षित होती तो पुस्तकालय ही संत हो गये हाते। – स्वामी विवेकानंद

placeholder

ज्ञान का दीप जलाओ साथी – राजकुमार जांगडा ‘राज’

Post Views: 18 ज्ञान का दीप जलाओ साथीअज्ञान अंधेरा मिटाओ साथी प्रेमपथ  को अपनाने कोनफ़रत  के मिट जाने कोसबको गले लग जाने कोअपनी बांहे फैलाओ साथी ज्ञान का दीप जलाओ…

placeholder

सिद्दिक अहमद ‘मेव’ की कविताएं

Post Views: 6 धर्म धर्म नाम पर कदी लड़ा ना, ना कदी कीनी हमने राड़, धर्म नाम पे लड़े जो पापी, वापे हाँ सौ-सौ धिक्कार । धर्म सिखावे प्यार-मुहब्बत, धर्म…

placeholder

कायमखानीःसाझी संस्कृति की मिसाल – सुरेंद्र पाल सिंह

आज हम ऐसे दौर से गुज़र रहे हैं जब इतिहास को एकपक्षीय और दुर्भावनापूर्ण तरीके से हमें परोसा जा रहा है। ऐसे में इतिहास के वे अध्याय जो साझी संस्कृति के उदाहरण हैं और तमाम तरह की साम्प्रदायिक संकीर्णता से ऊपर उठे हुए हैं उनका अध्ययन आवश्यक हो जाता है। सामाजिक- राजनीतिक आयाम को भी ऐतिहासिक तौर पर बेहतर तरीके से समझने के लिए इस प्रकार के वृतांत महत्वपूर्ण है।

सूचना कानून इतिहास और बदलाव – राजविंदर सिंह चंदी

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 (1)(a) के अनुसार हर भारतीय नागरिक को बोलने व अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार प्राप्त है। हमने संसदीय लोकतंत्र अपनाया है। जनतंत्र में राज्य की सारी शक्तियाँ जनता में निहित होती हैं। जनता द्वारा अपने कार्यों जिनमें नीतियां, कानून-व्यवस्था,परियोजनाओं, निर्णय, प्राशसनिक गतिविधियों का क्रियान्वयन आदि शामिल है, के लिए सरकार चुनी जाती है।

placeholder

औरत की कहानी – रामफल गौड़

Post Views: 10 रागनी देवी अबला पां की जूत्ती, मिले खिताब हजार मनैं, जब तै बणी सृष्टि, कितने ओट्टे अत्याचार मनैं ।।टेक।। परमगति हो सती बीर की, पति की गैल…