आजादी मेरा ब्रांड -अनुराधा बेनीवाल

7 अप्रैल 2016 को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र में ‘देस हरियाणा’ पत्रिका के तत्वाधान में ‘अपने लेखक से मिलिए’ कार्यक्रम हुआ, जिसमें ‘आजादी मेरा ब्रांड’ की लेखिका अनुराधा बेनीवाल ने भाग…

placeholder

उसूल और जिंदगी में से एक चुनना पड़ा तो मैं उसूल चुनूंगा – जगमोहन

16 मार्च 2016 को देस हरियाणा पत्रिका की ओर से ‘युवा पीढ़ी और शहीद भगत सिंह की विचारधारा’ विषय पर सेमीनार आयोजित किया, जिसमें शहीद भगत सिंह के भानजे व…

placeholder

गुरू रविदास की महानता चमत्कारों में नहीं विचारों में है

गांव नन्हेड़ा स्थित राजकीय प्राथमिक पाठशाला के सुंदर प्रांगण में 31जनवरी को गुरू रविदास जयंती के उपलक्ष्य में देस हरियाणा सृजनशाला में ‘गुरू रविदास के सपनों का समाज’ विषय पर…

सावित्रीबाई फुले जयंती पर काव्य-गोष्ठी

रिपोर्ट कुरुक्षेत्र स्थित महात्मा ज्योतिबा फुले सावित्री बाई फुले पुस्तकालय एवं शोधकेन्द्र में 3 जनवरी 2018 को देस हरियाणा द्वारा भारत की पहली शिक्षिका एवं समाज सुधारक सावित्रीबाई फुले जयंती…

placeholder

आवाज़ें और चुप्पी

प्रस्तुति – मानव प्रदीप वशिष्ठ 27 नवम्बर, 2018 को कुरुक्षेत्र के  सावित्री बाई-जोतिबा फुले पुस्तकालय तथा शोध संस्थान में इंडियन फाउन्डेशन फॉर आर्ट  तथा देस हरियाणा ने एक संयुक्त संगोष्ठी…

placeholder

हरियाणा की संस्कृति के विविध रंग

हरियाणा सृजन उत्सव में  24 फरवरी 2018 को ‘हरियाणा की संस्कृति के विविध रंग’ विषय पर परिचर्चा हुई जिसमें मेवात इतिहास एवं संस्कृति विशेषज्ञ सिद्दीक अहमद मेव तथा साहित्यकार एवं…

शब्द और अर्थ के भेद को पाटना होगाः उर्मिलेश

रिपोर्ट – अरुण कुमार कैहरबा कुरुक्षेत्र हरियाणा से मैं वाकिफ हूं। चंडीगढ़ में दो साल तक एक अखबार के ब्यूरो में मैंने काम किया है। कुरुक्षेत्र में किसी संगोष्ठी या…

placeholder

स्त्री सृजनः अनुभव व उपलब्धियां

प्रस्तुति – अनुराधा हरियाणा सृजन उत्सव के दौरान 25 फरवरी 2018 को ‘स्त्री सृजन संकल्पः उपलब्धियाँ और अनुभव’ विषय पर परिचर्चा हुई। युवा कवियत्री विपिन चौधरी, नाटक कलाकार व शिक्षाविद…

placeholder

दलित जब लिखता है

सुनो ब्राह्मण – और सफेद हाथी
मलखान सिंह की कविताएं
हरियाणा सृजन उत्सव में 24 फरवरी 2018 को ‘दलित जब लिखता है’ विषय पर परिचर्चा हुई। प्रख्यात दलित कवि मलखान सिंह ने अपने अनुभवों के माध्यम से भारतीय समाज व दलित साहित्य से जुड़े ज्वलंत और विवादस्पद सवालों पर अपने विचार प्रस्तुत किए और दो कविताएं सुनाई