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काव्य-गोष्ठी का आयोजन

अरुण कैहरबा राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, इंद्री के प्रांगण में 28 अक्तूबर 2018 को सृजन मंच इन्द्री के तत्वावधान में देस हरियाणा काव्य-गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में…

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स्वच्छ हवा और पानी एक बिजनेस बन गया है

गतिविधि ‘देस हरियाणा फिल्म सोसाइटी’ के माध्यम से हर महीने ही सामाजिक सरोकारों से जुड़ी फिल्मों का प्रदर्शन किया जाएगा और उस पर गंभीर चर्चा होगी जिससे हरियाणा में फिल्म…

युद्ध नहीं बुद्ध चाहिए : अमन दोस्ती यात्रा

गतिविधियां 13 अगस्त, 2018 को  दिल्ली से वाघा बार्डर तक चल रही अमन दोस्ती यात्रा का पीपली (कुरुक्षेत्र) स्थित पैराकीट में देस हरियाणा द्वारा जोरदार स्वागत किया गया। स्वतंत्रता दिवस…

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लोकतंत्र व सामाजिक न्याय की शत्रु है – मॉब लींचिंग

गतिविधियां डॉ ओम प्रकाश ग्रेवाल अध्ययन संस्थान ,कुरुक्षेत्र की सामाजिक न्याय समिति की तरफ से 9अगस्त 2018 को ‘माब लींचिंग -भारत छोड़ो’ विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी…

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पवित्र किताब की छाया में आकार लेता जनतंत्र – सुभाष गाताड़े

हलचल डा. ओमप्रकाश ग्रेवाल अध्ययन संस्थान, कुरुक्षेत्र द्वारा 26 जून 2016 को डा. ओमप्रकाश ग्रेवाल स्मृति व्याख्यान-7 का आयोजन किया। विषय था ‘भारतीय लोकतंत्र: दशा और दिशा’। इसकी अध्यक्षता प्रो….

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कबीर का नजरिया

कबीरा खड़ा बजार में लिए लुकाठी हाथ जो घर जालैआपना वो चलै हमारे साथ                 20 जून 2016 को कबीर जयंती के अवसर पर ‘देस हरियाणा’ पत्रिका की ओर से…

पहली बार लेखक की हैसियत से – सोना चौधरी

9 मई 2016 को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र में ‘देस हरियाणा’ पत्रिका की ओर से लेखक से मिलिए कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें लेखक सोना चौधरी से छात्रों, शोधार्थियों तथा शिक्षकों…

कृषि संकट एक व्यापक प्रश्न बने

16 अप्रैल को ‘देस हरियाणा’ पत्रिका द्वारा रोहतक में एक परिचर्चा आयोजित की गयी। विषय था -‘हरियाणा में खेती किसानी -अंतर्विरोध और समाधान’। इस परिचर्चा में मुख्य रूप से दो…

समता मूलक समाज था आम्बेडकर का सपना – डा. सुभाष चंद्र

प्रस्तुति-  गुंजन कैहरबा इन्द्री (करनाल) स्थित रविदास मंदिर के सभागार में 10 अप्रैल, 2016 को बाबा साहेब भीम राव आंबेडकर की 125वीं जयंती और महात्मा ज्योतिबा फुले जयंती के उपलक्ष्य…

हमारी कल्चर व समाज सारा ही सेक्सुअल – कृष्ण बेनीवाल

इंसान उसको कहते हैं जिसमें प्रेम हो, करुणा हो, दया हो, सहानुभूति हो। हमारी शक्ल इंसानों से मिलती है हम इंसान थोड़े ही हैं।