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ज़माने में नया बदलाव लाने की ज़रूरत है -महावीर ‘दुखी’

Post Views: 537 ज़माने में नया बदलाव लाने की ज़रूरत है, अकीदों का सड़ा मलबा उठाने की ज़रूरत है। उजालों के तहफ्फुज में कभी कोई न रह जाए, अंधेरों को…

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गहराई तक जावण म्हं बखत तो लागै सै -रिसाल जांगड़ा

Post Views: 120 हरियाणवी ग़ज़ल रिसाल जांगड़ा   गहराई तक जावण म्हं बखत तो लागै सै। सच्चाई उप्पर ल्यावण म्हं बखत तो लागै से।   करैग जादां तावल जे उलझ…

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एक मधुर सपना था, आख़िर टूट गया

Post Views: 258 महेन्द्र प्रताप ‘चांद’ (वरिष्ठ शायर महेंद्र प्रताप चांद अंबाला में रहते हैं। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र में लंबे समय तक पुस्तकालय अध्यक्ष रहे। पचासों साल से अपनी लेखनी…

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सीली बाळ रात चान्दनी आए याद पिया -कर्मचंद केसर

Post Views: 168   कर्मचन्द ‘केसर’  ग़ज़ल सीळी बाळ रात चान्दनी आए याद पिया। चन्दा बिना चकौरी ज्यूँ मैं तड़फू सूँ पिया। तेरी याद की सूल चुभी नींद नहीं आई,…

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जहां में खौफ़ का व्यापार क्यूं है सोचना होगा – महावीर ‘दुखी’

Post Views: 138 महावीर ‘दुखी’  जहां में खौफ़ का व्यापार क्यूं है सोचना होगा, तशद्दुद की यहां भरमार क्यूं है सोचना होगा। सुना था आदमी ने बेबसी पर पा लिया…

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न दीवानों से वाबस्ता, न फरज़ानों से वाबस्ता -महावीर ‘दुखी’

Post Views: 141 महावीर ‘दुखी’  न दीवानों से वाबस्ता, न फरज़ानों से वाबस्ता, रहा हूं मैं हमेशा आम इन्सानों से वाबस्ता। सुना है देवाओं का कभी था बास धरती पर,…

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धरम घट्या अर बढ़ग्या पाप -कर्मचन्द ‘केसर’

Post Views: 139   कर्मचन्द ‘केसर’  ग़ज़ल कलजुग के पहरे म्हं देक्खो, धरम घट्या अर बढ़ग्या पाप। समझण आला ए समझैगा, तीरथाँ तै बदध सैं माँ बाप। सारे चीब लिकड़ज्याँ…

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हालात तै मजबूर सूं मैं -कर्मचन्द केसर

Post Views: 142 कर्मचन्द ‘केसर’  ग़ज़ल हालात तै मजबूर सूँ मैं। दुनियां का मजदूर सूँ मैं। गरीबी सै जागीर मेरी, राजपाट तै दूर सूँ मैं। कट्टर सरमायेदारी नैं। कर दिया…

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जीन्दे जी का मेल जिन्दगी – कर्मचंद केसर

Post Views: 182 हरियाणवी ग़ज़ल जीन्दे जी का मेल जिन्दगी। च्यार दिनां का खेल जिन्दगी। फल लाग्गैं सैं खट्टे-मीठे, बिन पात्यां की बेल जिन्दगी। किसा अनूठा बल्या दीवा, बिन बात्ती…