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किसानी चेतना की एक रागनी और एक ग़ज़ल- मनजीत भोला

मनजीत भोला का जन्म सन 1976 में रोहतक जिला के बलम्भा गाँव में एक साधारण परिवार में हुआ. इनके पिता जी का नाम श्री रामकुमार एवं माता जी का नाम श्रीमती जगपति देवी है. इनका बचपन से लेकर युवावस्था तक का सफर इनकी नानी जी श्रीमती अनारो देवी के साथ गाँव धामड़ में बीता. नानी जी की छत्रछाया में इनके व्यक्तित्व, इनकी सोच का निर्माण हुआ. इन्होने हरियाणवी बोली में रागनी लेखन से शुरुआत की मगर बाद में ग़ज़ल विधा की और मुड़ गए. इनकी ग़ज़लों में किसान, मजदूर, दलित, स्त्री या हाशिये पर खड़े हर वर्ग का चित्रण बड़ी संजीदगी के साथ चित्रित होता है. वर्तमान में कुरुक्षेत्र में स्वास्थ्य निरीक्षक के पद पर कार्यरत हैं.

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किसान आंदोलन के पर्यायवाची स्वामी सहजानन्द सरस्वती के किसानों के नाम दो संबोधन

स्वामी सहजानन्द सरस्वती (22-2- 1889-26-6-1950) भारत के राष्ट्रवादी नेता एवं स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे। वे भारत में किसान आन्दोलन के जनक थे। वे आदि शंकराचार्य सम्प्रदाय के दसनामी संन्यासी अखाड़े के दण्डी संन्यासी थे। वे एक बुद्धिजीवी, लेखक, समाज-सुधारक, क्रान्तिकारी, इतिहासकार एवं किसान-नेता थे।
मुख्य कृतियाँ- भूमिहार-ब्राह्मण परिचय, ब्रह्मर्षि वंश विस्तर, मेरा जीवन संघर्ष, जंग और राष्ट्रीय आजादी, किसानों के दावे, कर्मकलाप, क्रांति और संयुक्त मोर्चा, गीता हृदय इत्यादि।
उन्होने ‘हुंकार’ नामक एक पत्र भी प्रकाशित किया।

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हरित क्रान्ति के जनक प्रो. एम.एस.स्वामीनाथन – अमर नाथ

आजादी के बाद देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने कहा था, “बाकी सभी चीजों के लिए इंतजार किया जा सकता है, लेकिन कृषि के लिए नहीं।” उस समय हमारे देश की आबादी 30 करोड़ से कुछ अधिक थी। सन 1947 में किसी शादी-ब्याह में 30 से ज्यादा लोगों को नहीं खिलाया जा सकता था, जबकि आज तो जितना पैसा हो, उतने लोगों को दावत दी जा सकती है। आज सरकारी गोदामों में वर्षों के लिए सुरक्षित गेहूं और चावल का भंडार मौजूद है। इस गुणात्मक परिवर्तन के सूत्रधार हैं हरित क्रान्ति के जनक प्रो. एम.एस.स्वामीनाथन।

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गांधी क्या बला है! – चौधरी छोटू राम

Post Views: 814 अनुवाद-हरि सिंह बटलर ने अन्य विषयों के अलावा भारतीय राजनीति पर छाई गांधी नामक परिघटना को भी अपने इस किसान-मित्र के माध्यम से जानना चाहा। जवाब में…

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भारत में अंग्रेजी राज के दो पहलू -चौधरी छोटू राम

Post Views: 476 चौधरी छोटू राम, अनुवाद-हरि सिंह बटलर ने छोटू राम को  लंदन से लिखा-‘भारत में अंग्रेजी राज आज भी खूब धमाके से चल रहा है। ऐसा क्यों और…

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सरकार और आजादी – सर छोटू राम

Post Views: 417 चौधरी छोटू राम, अनुवाद-हरि सिंह हार्टकोर्ट बटलर का मानना था कि तमाम सरकारें नागरिक आजादी पर हावी होती हैं। 1923-24 में, बकौल छोटू राम, ब्रिटिश सरकार का…

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भारतीय नारियां: चौधरी छोटू राम

Post Views: 381 चौधरी छोटू राम, अनुवाद-हरि सिंह बटलर द्वारा पर्दा-प्रथा, शिक्षा एवं सामाजिक जीवन में महिलाओं से भेदभाव पर टिप्पणियों के जवाब में चौधरी छोटू राम ने एक ओर…

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अंग्रेजी राज की न्याय-व्यवस्था: एक सटीक टिप्पणी -चौधरी छोटू राम

Post Views: 339 चौधरी छोटू राम, अनुवाद-हरि सिंह चौधरी छोटू राम खुद वकील होने के नाते ब्रिटिश न्याय प्रणाली को भली-भांति समझते थे। बटलर ने मित्रता के नाते इस विषय…

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भारत में संकट पर – चौधरी छोटू राम

Post Views: 306 अनुवाद-हरि सिंह हार्टकोर्ट बटलर 1914-18 में रोहतक के उपायुक्त रहे। उस दौरान चौधरी छोटूराम एक प्रमुख वकील, जाट गजट उर्दू साप्ताहिक के सम्पादक एवं जिला कांग्रेस कमेटी…

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पंजाब के किसान का भविष्य – सर छोटू राम

Post Views: 446 अनुवाद-हरि सिंह संसार परिवर्तनशील है। परिवर्तन प्रकृति का नियम है और इस समय तो दुनिया में परिवर्तन का तूफान बड़ी तेजी से आया हुआ है। भारत भी…