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जब छोरे गाभरू होंगे-  प्रभात सिंह

Post Views: 311 कहानी जब छोरे गाभरू होंगे ताजा लेकर खाने वाले मजदूरों व गरीब किसानों के लिए भादवे का महीना तेरहवां महीना होता है। जहां खाते-पीते लोग सावण-भादवे में…

संकट मोचन – तारा पांचाल

Post Views: 822 कहानी संकट-मोचन        क्योंकि वे बंदर थे अतः स्वाभाविक रूप से उनकी उछल-कूद, उनके उत्पात सब बंदरों वाले थे। गांव वाले उनसे तंग आ चुके थे। गांव…

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कसूरवार – अंतोन चेखव

अंतोन चेखव की मैलइफेक्टर का हरयाणवी अनुवाद। जिसमें 19 वीं सदी के रूसी किसान के भोलेपन एवं उसकी दुर्दशा का वर्णन के साथ असवेंदनशील न्याय व्यवस्था के क्रियाकलापों पर करारा व्यंग्य है। – सं.

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माई डीयर डैडी – विपिन चौधरी

Post Views: 608 कहानी बचपन पूरे जीवन का माई-बाप होता है। बचपन के बाद अपना कद निकालता हुआ जीवन इसी बचपन की जुबान से ही बोलता-बतियाता है। इसके बावजूद इस…

ले परधान बीड़ी जला-हरभगवान चावला

Post Views: 884 कहानी ले परधान बीड़ी जला गांव के लगभग मध्य में बने मकान के सामने वाले चबूतरे पर चीेकट तहमद-कमीज धारण किए ‘परधान’ अक्सर बैठा रहता। उसके पैरों…

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आग – एस.आर. हरनोट

Post Views: 958 कहानी आग  एस.आर. हरनोट शास्त्री वेदराम आज जैसे ही कुर्सी पर बैठने लगे तीसरी कक्षा के एक बच्चे बादिर ने उनसे पूछ लिया, गुरू जी! गुरू जी!…

लेणे के देणे – चिनवा अचेबे

चिनवा अचेबे की रचनाओं ने विश्व के साहित्य के लेखन, अध्ययन व अध्यापन को प्रभावित किया है। प्रस्तुत कहानी अचेबे की कलम से निकली एक इग्बो लोक कथा का हरियाणवी अनुवाद है जिसको ‘थिंग्स फॉल अपार्ट’ से लिया गया है। इसमें चालाक कछुए और भोले-भाले पक्षियों के माध्यम से चालाक लोग वाक्चातुर्य से किस तरह से सीधे-सादे लोगों को ठगते व शोषण करते हैं इसको उदघाटित करने की कोशिश की और लोग किस तरह से प्रतिरोध प्रकट करते हैं – सं.

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जकड़न -अशोक भाटिया

Post Views: 306 अगले दिन उन्होंने शापिंग मॉल का रुख किया। वहां वे  हबड़-तबड में सामान देखते रहे। इस बार वे काफी पैसे लेकर गए थे। पत्नी की निगाहें एक…

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किरेळिया – अंटोन चेखव

विश्व प्रसिद्ध रुसी कहानीकार अंटोन चेखव ने अपनी प्रसिद्ध कहानी गिरगिट में शासन-प्रशासन  में फैला भ्रष्टाचार, जनता के प्रति बेरुखी और अफसरशाही की चापलूसी को उकेरा है। भारतीय संदर्भों में भी प्रासंगिक है। प्रस्तुत है इस कहानी का राजेंद्र सिंह द्वारा हरियाणवी अनुवाद। सं.

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बहनें

 दक्षिणी अफ्रीकी लेखिका पॉलिन स्मिथ (1882-1959) लघु कहानियों के लिए प्रसिद्ध है। प्रस्तुत कहानी में एक किसान अपनी जमीन बचाने के लिए अपनी बेटी को एक बूढ़े जमींदार के साथ ब्याह देने के लिये मजबूर है। औरत की दुविधा और व्यथा बड़ी गंभीरता से प्रस्तुत की है। भारतीय कृषि प्रधान समाज के सामंती भू-संबंधों में यह बेहद प्रासंगिक है। प्रस्तुत है काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी में अंग्रेजी विभाग में  एसिसटेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत डॉ. देवेन्द्र कुमार द्वारा  किया गया अनुवाद। सं.-