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नूरू की थाली – रामकिशन राठी 

घोड़े दौड़ रहे थे…क्यड़पड़-क्यड़पड़, नगाड़े बज रहे थे…पडग़ड़ाम…पडग़ड़ाम-पडग़ड़ाम… लड़ाई के मैदान के नजारे को बयान करते हुए वह मुंह से ऐसी आवाजें निकालता था जो हूबहू घोड़े की टापों से…

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माई दे मालोटा – कमलेश चौधरी

हरियाणवी कहानी हरियाणा के जिस स्थान पर मैं रहती हूं, वह कुछ सालों पहले तक ठेठ गांव  था। धीरे-धीरे वह विकसित होकर कस्बे का रूप धारण कर गया। अब वह…

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करवा का व्रत

यशपाल जन्म: 3 दिसम्बर, 1903 ई. फ़िरोजपुर छावनी, पंजाब, भारत मृत्यु: 26 दिसंबर, 1976 ई.   कन्हैयालाल अपने दफ्तर के हमजोलियों और मित्रों से दो तीन बरस बड़ा ही था, परन्तु ब्याह उसका उन लोगों के…

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फूली – तारा पांचाल

उचटी नींद के ऊल-जलूल सपने और उन सपनों के शुभ-अशुभ विचार। दुली के परिवार में कुछ दिनों से ऐसे ही सपने देखे जा रहे थे। कभी-कभी ये सपने लाल मिर्च…

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कब्रिस्तान की बेरियां -कुलबीर सिंह मलिक

कहानी मुल्क के बंटवारे के साथ हिन्दुओं और मुसलमानों के बीच जो खून की होली खेली गई उसके कहर से उत्तर भारत का, विशेषत: पंजाब का, कोई गांव या शहर…

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अपराधी – दिनेश दधिची

दिनेश दधीचि पार्क में पेड़ प्रतीक्षा कर रहे हैं और पौधे बालकों की तरह ठुनक रहे हैं। इन दिनों पेड़ पौधों को तीखी भूख लगने से पूर्व ही, पूर्व दिशा…

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काकी – सियारामशरण गुप्त

बाल कहानी उस दिन शामू की नींद बड़े सवेरे खुल गई। उसने देखा कि घर में कोहराम मचा हुआ है। उसकी काकी जमीन पर सो रही है। उस पर कपड़ा…

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दो मुंह वाला देवता

अमृत लाल मदान                 मामी जी को दो दिनों के लिए तावडू वापिस जाना पड़ा, जहां जाकर उन्हें अपने और मामा जी के मैले कपड़े धोने थे, धुले और कपड़े…

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हरियाणा में हिन्दी कहानी का परिदृश्य

ज्ञान प्रकाश विवेक ज्ञान प्रकाश विवेक हरियाणा के प्रख्यात कथाकार हैं। उन्होंने नई कथा-भाषा का सृजन करते हुए कहानी को कलात्मक उच्चता प्रदान की है। अपने समय के यथार्थ की…

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कहानी का रंगमंच -पंकज कुमार

आलेख आधुनिक काल में रंगमंच शब्द का प्रयोग व्यापक धरातल पर किया जाता है जिसमें रंगमंच के स्थूल तत्व, मंच, दृश्य-सज्जा, प्रकाश-व्यवस्थाओं, ध्वनि-संगीत योजना, नेपथ्य इत्यादि तो आते ही हैं…