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क्यों हो भरोसा भभूत का! – राजगोपाल सिंह वर्मा

(पत्रकारिता तथा इतिहास में स्नातकोत्तर शिक्षा प्राप्त करके राजगोपाल सिंह वर्मा ने केंद्र एवं उत्तर प्रदेश सरकार में विभिन्न मंत्रालयों में प्रकाशन, प्रचार और जनसंपर्क के क्षेत्र में जिम्मेदार वरिष्ठ…

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सावी – सतीश सरदाना

(लेखक सतीश सरदाना का जोधपुर पाखर, जिला भटिंडा पंजाब में जन्म हुआ।  एम बी ए फाइनेंस की शिक्षा प्राप्त की।  कविता,लघुकथा, कहानी व विचोरोत्तेजक लेख लिखते हैं।  वर्तमान में सर्व…

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खुल्ला बारणा – साकी / एच. एच. मनरो अनु – राजेन्द्र सिंह

साकी’ प्रसिद्ध अंग्रेज लेखक एच. एच. मनरो का उपनाम है जिनका जन्म 1870 में ब्रिटिश बर्मा में हुआ।  13 नवम्बर 1916 को फ़्रांसिसी जमीन पर जर्मन सेना से लड़ते हुये युद्ध के मैदान में इनका देहान्त हुआ। कहानी के क्षेत्र में इनको वैश्विक स्तर पर उस्ताद का दर्जा हासिल है। द इंटरलोपर, द ओपन विण्डो, द टॉयज़ ऑफ़ पीस, द बुल, द ईस्ट विंग आदि इनकी अनेक कालजयी कहानियां हैं।  इस अंक में प्रस्तुत है साकी उर्फ़ एच. एच. मनरो की विश्व प्रसिद्ध कहानी  ‘The Open Window’  का  हरियाणवी अनुवाद। अनुवाद किया है राजेंद्र सिंह ने, जो राजकीय महाविद्यालय, गुड़गांव में अंग्रेजी के सहायक प्रोफेसर हैं।

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खिलवाड़

राधेश्याम भारतीय गांव में एक घर की छत ढहने से परिवार के चार सदस्यों की मौके पर ही मौत हो गई। हादसा इतना दर्दनाक था कि देखने वालों की रूह…

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यक्षप्रश्न

लघुकथा राधेश्याम भारतीय गांव में रघबीर की घुड़चढ़ी हो रही थी। जब वे मंदिर के पास पहुंचे तो गांव के कुछ मनचले सवर्ण जाति के लड़कों ने उसे घोड़ी से…

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कच्चे रास्तों का धनी-धोरी – अमित मनोज

जिमाड़ों में हमारी खास रूचि हो गई थी। स्कूल में पढ़ाते हुए हम और चीजों की बजाय खाने-पीने में ही ज्यादा ध्यान देते। आस-पास के जिमाड़ों में हम सहर्ष शामिल…

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इज्जत की खातिर – नरेश कुमार

मां, सुन, रात को बबली और सोनिया की मौत हो गई। हां, बेटी ,उनके घर वाले कह रहे थे कि कल रात दोनों की पेट दर्द होने से मौत हो…

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भगवाना चौधरी – कुलबीर सिंह मलिक

नवम्बर का महीना। दोपहर का वक्त। सन् सैंतालीस का मुल्क के बंटवारे का दौर। जींद शहर से पांच सात किलोमीटर पर जींद-हांसी रोड पर एक गांव है। जिसका नाम है…

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सरदार जी – ख्वाजा अहमद अब्बास, अनु. शम्भु यादव

लोग समझते हैं सरदार जी मर गये। नहीं यह मेरी मौत थी। पुराने मैं की मौत। मेरे तअस्सुब (धर्मान्धता) की मौत। घृणा की मौत जो मेरे दिल में थी। मेरी…

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वो रात को लाहौर चले गए – नरेश कुमार

भरतो इस साल चौरासी पार कर जाएगी। 15 वर्ष की उम्र में शादी हो गई थी। साढ़े  सोलह की उम्र में पहली बेटी को जन्म दिया। अपने हल्के-फुल्के शरीर को…