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फ्लाई किल्लर – एस आर हरनोट

एस. आर. हरनोट (एस. आर. हरनोट शिमला में रहते हैं। हिंदी के महत्वपूर्ण कहानीकार के साथ-साथ साहित्य को जन जीवन में स्थापित करने के लिए अनेक उपक्रम करते हैं ।…

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दरअसल- तारा पांचाल

कहानी (तारा पांचाल 28 मई,1950 – 20 जून, 2009।  ‘सारिका’, ‘हंस’, ‘कथन’, ‘वर्तमान साहित्य’, ‘पल-प्रतिपल’, ‘बया’, ‘गंगा’, ‘अथ’, ‘सशर्त’, ‘जतन’, ‘अध्यापक समाज’, ‘हरकारा’ जैसी प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में पाठक उनकी कहानियों…

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सांप – रत्न कुमार सांभरिया

वरिष्ठ साहित्यकार रत्न कुमार सांभरिया कहानी के नामचीन हस्ताक्षर हैं। कहानी सृजन के क्षेत्र में उन्होंने राष्ट्रीय-अंतराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। उनकी कहानियों में ठेठ देसीपन व जमीनी गंध…

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करवा का व्रत – यशपाल

कन्हैयालाल अपने दफ्तर के हमजोलियों और मित्रों से दो तीन बरस बड़ा ही था, परन्तु ब्याह उसका उन लोगों के बाद हुआ। उसके बहुत अनुरोध करने पर भी साहब ने…

जाट कहवै, सुण जाटणी – प्रदीप नील वशिष्ठ

एक बात ने कई सालों से मुझे परेशान कर रखा था। और वह शर्म की बात यह कि अपने  हरियाणा में हरियाणवी बोलने वाले को नाक-भौं चढ़ा कर इस नजऱ…

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भैत्तर हजार की भोड़िया – नवरत्न पांडे

                भैत्तर हजार की भोड़िया के साथ गांव की साधारण भोड़िया की कहा सुनी हो गयी। बात कहासुनी से शुरू होकर पिलमा पछाड़ी तक…

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फासला – ज्ञान प्रकाश विवेक

वालैंट्री रिटायरमेंट स्कीम किसी उपकार की तरह पेश की गई थी, जिसमें लफाज्जियों का तिलिस्म था और कारपोरेट  जगत का मुग्धकारी छल! इस छल का मुझे बाद में पता चला।…

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किश्तियाँ – हरभगवान चावला

‘भूमिहीन खेतिहर मज़दूर के लिए कुँवारी, परित्यक्ता, विधवा कैसी भी वधू चाहिए। शादी एकदम सादी, शादी का सारा ख़र्च वर पक्ष की ओर से होगा। अगर ज़रूरत हुई तो वधू…

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बिरादरी को गोली मारो – रोहतास

                  सेठ त्रिलोकचंद बंसल टूथपेस्ट के झाग कम, थूक ज्यादा उगल रहा है।                 अंधेरा आकाश से समाप्त हो चुका है। सूर्य लाल हो रहा है, शहर के गगन…

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तीन दृश्य :  एक चेहरा – कमलेश भारतीय

तीन दृश्य मेरी आंखों में ठहरे हुए हैं और इन दृश्यों में एक ही चेहरा सामने आता है। सोते-जागते मैं इन्हें देखता रहता हूँ। उस दिन मेरी ड्यूटी नाइट-शिफ्ट में…