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खाली हाथ – जयपाल

Post Views: 110 वे दिन भर शहर की सूरत संवारते हैंऔर अपनी सूरत बिगाड़ते हैंदिन ढलने परसिर नीचा करमुंह लटकाएचल पड़ते हैं वापिसअपने घरों की तरफहताश-निराशजैसे शमशान से लौटते हैं…

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जाले – जयपाल

Post Views: 103 जाले हर युग के होते हैंहर युग बुन लेता है अपने जालेहर युग चुन लेता है अपने जालेधूल मिट्टी से सने प्राचीन जालेमोती से चमकते नवीन जालेसमय…

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पाखण्डी – जयपाल

Post Views: 100 वे आर्थिक सुधार करेंगेमरने को मजबूर कर देंगेवे रोजगार की बात करेंगेरोटी छीन लेंगेवे शिक्षा की बात करेंगेव्यापार के केन्द्र खोल देंगेवे शान्ति की अपील करेंगेजंग का…

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बच्चा – जयपाल

Post Views: 93 तमाशा दिखाता है बच्चान सांप से डरता है न नेवले सेन बंदर से न भालू सेन शेर से न हाथी सेरस्सी पर चलता है बच्चागिरने से नहीं…

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बहिष्कृत औरत – जयपाल

Post Views: 111 शहर से बाहर सेएक औरत शहर के अंदर आती हैघरों पर से मिट्टी झाड़ती हैफर्श चमकाती हैगलियों को बुहारती हैपी जाती है नालियों की सारी दुर्गंधगली-मुहल्लों को…

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पत्नी – जयपाल

Post Views: 88 पत्नी का लौट आता है बचपनजब दूर पार से मिलने आते हैं पिता जीपत्नी की आंखों में उतर आता है संमदरजब अचानक आकर मां सिर पर रखती…

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उनका सवाल – जयपाल

Post Views: 170 वे पूछते हैं –आज भी उनके सिर पर गंदगी का टोकरा क्यों रखा हैउनकी बस्ती शहर या गांवों से बाहर ही क्यों होती हैउनके मंदिरों-गुरुद्वारों में दूसरे…

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बगुला और मछली – जयपाल

Post Views: 208 बगुला केवल मछली को ही नहीं देखतापानी को भी देखता हैकितने पानी में है मछली बगुला केवल मछली को ही नहीं देखतासाथ घूम रही दूसरी मछलियों को…

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कहां मानते हैं बच्चे – जयपाल

Post Views: 129 बच्चे तो बच्चे होते हैंकहां मानते हैं बच्चेसामने वाले घर में जायेंगे तो कूदते हुएआएंगे तो फुदकते हुएकभी उनके बच्चों के साथ कुछ खा आएंगेकभी उनको कुछ…