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कविता – जयपाल

Post Views: 39 कविता खोजती है हमारे आकाश के नए रास्तेकविता तोड़ती है हमारे रास्तों की सीमाएंकविता सौंपती है हमें हमारे पंखकविता बोलती है धीरे-धीरे चुपचापकविता देख लेती है हमारी…

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पन्द्रह अगस्त की तैयारी – जयपाल

Post Views: 14 दो दिन बाद पन्द्रह अगस्त हैशहर में झंडा फहराने मंत्री जी आ रहे हैंमैदान के सामने एक झुग्गी बस्ती हैबस्ती के सामने एक विशाल शामियाना लगा दिया…

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पंच परमेश्वर – जय पाल

Post Views: 18 मेरी बेटी को माफ कर देना परमेश्वर जीदरअसल वह नहीं समझ पा रहीकि प्रेम करने से पहले जाति कैसे पूछेगोत्र कहां से पता करेप्रेम की यह अनोखी…

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हो सकता है – जयपाल

Post Views: 16 हो सकता हैआपकी बेटी निकली हो स्कूलऔर आपने अभी-अभी पढ़ी हो कोई बलात्कार की खबरआपकी बहन अभी-अभी बैठी हो डोली मेंऔर अभी-अभी किसी नव ब्याहता ने खा…

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मेज, कुर्सी और आदमी – जयपाल

Post Views: 48 एक जमाने सेएक मेज रखी है साहित्य अकादमी के दफतर मेंदूरदर्शन, आकाशवाणी और अखबार के सम्पादकीय विभाग मेंस्कूल-कालेज-विश्वविद्यालय की पाठ्यक्रम समिति मेंयह मेज न हिलती है, न…

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सर्दी आ रही है – जयपाल

Post Views: 20 सर्दी आ रही हैकहा बूढ़े आदमी ने अपने आप सेएक हवा का झौंका आयाबच्चे ने फटाक से खिड़की बंद कर दीउधर दादी अम्मा ने दो-तीन बार सन्दूक…

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गाम के पान्ने – ओम प्रकाश करुणेश

Post Views: 40 गाम के पान्ने गांव-मुहल्ले, कस्बे-शहरअगड़-बगड़ में बसी मरोड़पड़ोस के तान्ने, पास के पान्नेबसे सरिक्के-कुणबे होड़जलण में फुकते, राख फांकतेधूल उड़ाते, गोहर टेढ़ेघास-फूंस न्यार ने जारीघर की रोणक…