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बगुला और मछली – जयपाल

Post Views: 147 बगुला केवल मछली को ही नहीं देखतापानी को भी देखता हैकितने पानी में है मछली बगुला केवल मछली को ही नहीं देखतासाथ घूम रही दूसरी मछलियों को…

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कहां मानते हैं बच्चे – जयपाल

Post Views: 88 बच्चे तो बच्चे होते हैंकहां मानते हैं बच्चेसामने वाले घर में जायेंगे तो कूदते हुएआएंगे तो फुदकते हुएकभी उनके बच्चों के साथ कुछ खा आएंगेकभी उनको कुछ…

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कविता – जयपाल

Post Views: 81 कविता खोजती है हमारे आकाश के नए रास्तेकविता तोड़ती है हमारे रास्तों की सीमाएंकविता सौंपती है हमें हमारे पंखकविता बोलती है धीरे-धीरे चुपचापकविता देख लेती है हमारी…

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पन्द्रह अगस्त की तैयारी – जयपाल

Post Views: 49 दो दिन बाद पन्द्रह अगस्त हैशहर में झंडा फहराने मंत्री जी आ रहे हैंमैदान के सामने एक झुग्गी बस्ती हैबस्ती के सामने एक विशाल शामियाना लगा दिया…

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पंच परमेश्वर – जय पाल

Post Views: 44 मेरी बेटी को माफ कर देना परमेश्वर जीदरअसल वह नहीं समझ पा रहीकि प्रेम करने से पहले जाति कैसे पूछेगोत्र कहां से पता करेप्रेम की यह अनोखी…

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हो सकता है – जयपाल

Post Views: 51 हो सकता हैआपकी बेटी निकली हो स्कूलऔर आपने अभी-अभी पढ़ी हो कोई बलात्कार की खबरआपकी बहन अभी-अभी बैठी हो डोली मेंऔर अभी-अभी किसी नव ब्याहता ने खा…

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मेज, कुर्सी और आदमी – जयपाल

Post Views: 81 एक जमाने सेएक मेज रखी है साहित्य अकादमी के दफतर मेंदूरदर्शन, आकाशवाणी और अखबार के सम्पादकीय विभाग मेंस्कूल-कालेज-विश्वविद्यालय की पाठ्यक्रम समिति मेंयह मेज न हिलती है, न…