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ड्राईंग रूम – जयपाल

अपने घर के दरवाजे के पासमैंने एक ड्राईंग रूम सजा लिया हैऔर खुद को खुद से छिपा लिया हैजब भी मैं कहीं बाहर जाता हूंड्राईंग रूम भी मेरे साथ होता…

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पंच परमेश्वर – जय पाल

मेरी बेटी को माफ कर देना परमेश्वर जीदरअसल वह नहीं समझ पा रहीकि प्रेम करने से पहले जाति कैसे पूछेगोत्र कहां से पता करेप्रेम की यह अनोखी विधि उसकी समझ…

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हो सकता है – जयपाल

हो सकता हैआपकी बेटी निकली हो स्कूलऔर आपने अभी-अभी पढ़ी हो कोई बलात्कार की खबरआपकी बहन अभी-अभी बैठी हो डोली मेंऔर अभी-अभी किसी नव ब्याहता ने खा लिया हो जहरआपके…

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मेज, कुर्सी और आदमी – जयपाल

एक जमाने सेएक मेज रखी है साहित्य अकादमी के दफतर मेंदूरदर्शन, आकाशवाणी और अखबार के सम्पादकीय विभाग मेंस्कूल-कालेज-विश्वविद्यालय की पाठ्यक्रम समिति मेंयह मेज न हिलती है, न डुलती हैन देखती…

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सर्दी आ रही है – जयपाल

सर्दी आ रही हैकहा बूढ़े आदमी ने अपने आप सेएक हवा का झौंका आयाबच्चे ने फटाक से खिड़की बंद कर दीउधर दादी अम्मा ने दो-तीन बार सन्दूक खोला हैउसे फिर…

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गाम के पान्ने – ओम प्रकाश करुणेश

गाम के पान्ने गांव-मुहल्ले, कस्बे-शहरअगड़-बगड़ में बसी मरोड़पड़ोस के तान्ने, पास के पान्नेबसे सरिक्के-कुणबे होड़जलण में फुकते, राख फांकतेधूल उड़ाते, गोहर टेढ़ेघास-फूंस न्यार ने जारीघर की रोणक नारीसब कुछ सहतीयह…

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पीछा करो उनका

बड़े चतुर हैं वे गजब के वाचाल और जादूगर रूमाल झटकते हैं तो उड़ने लगती हैं रंग-बिरंगी तितलियां खाली डिब्बों पर घुमाते हैं अपना हाथ और आसमान भर जाता है…

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बहुत उत्साहित हैं वे

बहुत उत्साहित हैं वे इन दिनों वे नए और अच्छे और कलफ़दार कड़क कपड़े पहनकर आते हैं हमारे बीच पहले तो मैं जानता था उन सभी को अलग अलग उनके…

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दयाल चंद जास्ट की कविताएं

(दयाल चंद जास्ट, रा.उ.वि.खेड़ा, करनाल में हिंदी के प्राध्यापक हैं। कविता लेखन व रागनी लेखन में निरंतर सक्रिय हैं) (1) मैं सूखे पत्ते सी उड़ रही हूं पहुंचूंगी किस ओर…

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जलियांवाला बाग का बसन्त – सुभद्राकुमारी चौहान

  यहाँ कोकिला नहीं, काग हैं, शोर मचाते, काले काले कीट, भ्रमर का भ्रम उपजाते। कलियाँ भी अधखिली, मिली हैं कंटक-कुल से, वे पौधे, व पुष्प शुष्क हैं अथवा झुलसे।…