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बच्चा – जयपाल

तमाशा दिखाता है बच्चान सांप से डरता है न नेवले सेन बंदर से न भालू सेन शेर से न हाथी सेरस्सी पर चलता है बच्चागिरने से नहीं डरताआग में कूदता…

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बहिष्कृत औरत – जयपाल

शहर से बाहर सेएक औरत शहर के अंदर आती हैघरों पर से मिट्टी झाड़ती हैफर्श चमकाती हैगलियों को बुहारती हैपी जाती है नालियों की सारी दुर्गंधगली-मुहल्लों को सजा देती है…

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पत्नी – जयपाल

पत्नी का लौट आता है बचपनजब दूर पार से मिलने आते हैं पिता जीपत्नी की आंखों में उतर आता है संमदरजब अचानक आकर मां सिर पर रखती है हाथपत्नी को…

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उनका सवाल – जयपाल

वे पूछते हैं –आज भी उनके सिर पर गंदगी का टोकरा क्यों रखा हैउनकी बस्ती शहर या गांवों से बाहर ही क्यों होती हैउनके मंदिरों-गुरुद्वारों में दूसरे लोग क्यों नहीं…

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बगुला और मछली – जयपाल

बगुला केवल मछली को ही नहीं देखतापानी को भी देखता हैकितने पानी में है मछली बगुला केवल मछली को ही नहीं देखतासाथ घूम रही दूसरी मछलियों को भी देखता है…

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कहां मानते हैं बच्चे – जयपाल

बच्चे तो बच्चे होते हैंकहां मानते हैं बच्चेसामने वाले घर में जायेंगे तो कूदते हुएआएंगे तो फुदकते हुएकभी उनके बच्चों के साथ कुछ खा आएंगेकभी उनको कुछ खिला आएंगेवैसे बच्चे…

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कविता – जयपाल

कविता खोजती है हमारे आकाश के नए रास्तेकविता तोड़ती है हमारे रास्तों की सीमाएंकविता सौंपती है हमें हमारे पंखकविता बोलती है धीरे-धीरे चुपचापकविता देख लेती है हमारी आंखों में दूर-दूर…

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पन्द्रह अगस्त की तैयारी – जयपाल

दो दिन बाद पन्द्रह अगस्त हैशहर में झंडा फहराने मंत्री जी आ रहे हैंमैदान के सामने एक झुग्गी बस्ती हैबस्ती के सामने एक विशाल शामियाना लगा दिया गया हैअब मंच…