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आम्बेडकर और रविदास – जयपाल

Post Views: 165 अधिकारी महोदयतुम चाहे जिस भी जाति से होंहम अपनी बेटी की शादी तुम्हारे बेटे से कर सकते हैंपर हमारी भी एक प्रार्थना हैसगाई से पूर्व तुम्हें अपने…

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एक दिन के अखबार का सच – डा. श्रेणिक बिम्बिसार

Post Views: 87 जवान ने खाई गोली सम्मान नहीं आई ए एस की मौज शहीद भगत सिंह की जन्म तिथि पर संशय बर्थ-डे गिफ्ट से वंचित पी.एम. एटमी करार लटका…

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कात्यक की रुत आ गई – डा. राजेंद्र गौतम

Post Views: 118 वरिष्ठ साहित्यकार एवं समीक्षक राजेंद्र गौतम, दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदी-विभाग से सेवानिवृत हुए हैं। इनके दोहे छंद-निर्वाह की कारीगरी नहीं, बल्कि आधुनिक कविता के तमाम गुण लिए…

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खाली हाथ – जयपाल

Post Views: 58 वे दिन भर शहर की सूरत संवारते हैंऔर अपनी सूरत बिगाड़ते हैंदिन ढलने परसिर नीचा करमुंह लटकाएचल पड़ते हैं वापिसअपने घरों की तरफहताश-निराशजैसे शमशान से लौटते हैं…

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जाले – जयपाल

Post Views: 49 जाले हर युग के होते हैंहर युग बुन लेता है अपने जालेहर युग चुन लेता है अपने जालेधूल मिट्टी से सने प्राचीन जालेमोती से चमकते नवीन जालेसमय…

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पाखण्डी – जयपाल

Post Views: 48 वे आर्थिक सुधार करेंगेमरने को मजबूर कर देंगेवे रोजगार की बात करेंगेरोटी छीन लेंगेवे शिक्षा की बात करेंगेव्यापार के केन्द्र खोल देंगेवे शान्ति की अपील करेंगेजंग का…

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बच्चा – जयपाल

Post Views: 40 तमाशा दिखाता है बच्चान सांप से डरता है न नेवले सेन बंदर से न भालू सेन शेर से न हाथी सेरस्सी पर चलता है बच्चागिरने से नहीं…

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बहिष्कृत औरत – जयपाल

Post Views: 55 शहर से बाहर सेएक औरत शहर के अंदर आती हैघरों पर से मिट्टी झाड़ती हैफर्श चमकाती हैगलियों को बुहारती हैपी जाती है नालियों की सारी दुर्गंधगली-मुहल्लों को…

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पत्नी – जयपाल

Post Views: 42 पत्नी का लौट आता है बचपनजब दूर पार से मिलने आते हैं पिता जीपत्नी की आंखों में उतर आता है संमदरजब अचानक आकर मां सिर पर रखती…

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उनका सवाल – जयपाल

Post Views: 122 वे पूछते हैं –आज भी उनके सिर पर गंदगी का टोकरा क्यों रखा हैउनकी बस्ती शहर या गांवों से बाहर ही क्यों होती हैउनके मंदिरों-गुरुद्वारों में दूसरे…