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सुरजीत सिरड़ी की तीन कविताएं

सुरजीत सिरड़ी हरियाणा राज्य के सिरसा जिले में रहते हैं तथा पेशे से एक शिक्षक हैं। सुरजीत मूलतः पंजाबी भाषा के कवि हैं। इनकी कविताओं में इतिहास के साथ संवाद के समानांतर वर्तमान राजनैतिक चेतना भी नजर आती है जो पाठक को एक पल के लिए ठहरकर सोचने को विवश करती है। प्रस्तुत है उनकी तीन कविताएं-

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सुरेश बरनवाल की कविताएं

सुरेश बरनवाल
प्रकाशित कृतिः संवेदनाओं संग संवाद- कहानी संग्रह 2010, कविता संग्रह- कतरा-कतरा आसमान 2015
कादम्बिनी, आजकल, देस हरियाणा, हरिगंधा, व अन्य पत्र-पत्रिकाओं में कहानी, लघुकथा, कविता, गजल, लेख, बालकविता। कथादेश, हंस, इतिहास बोध व अन्य पुस्तकों में स्वरचित चित्र प्रकाशित। विशेषः कहानी संग्रह काशी विद्यापीठ के पाठ्यक्रम में शामिल। कहानी सैनिक और बन्दूक को 2005 में भारत सरकार द्वारा आयोजित अखिल भारतीय युवा कहानीकार प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त। कहानी अस्थि विसर्जन को हरियाणा साहित्य अकादमी द्वारा आयोजित कहानी प्रतियोगिता 2014 में तृतीय स्थान प्राप्त। विभिन्न कहानियों पर मंचन व रेडियो नाट्य प्रसारण। आकाशवाणी द्वारा कविता प्रसारण।

एस.एस.पंवार की पांच हरियाणवी-राजस्थानी कविताएं

एस.एस.पंवार
जन्म- 19 अप्रैल 1990
फतेहाबाद के पीली मंदोरी गांव में जन्म। चौधरी देवी लाल विश्वविद्यालय से जनसंचार में स्नातकोतर। प्रिंट और टी.वी. पत्रकारिता में तीन साल काम करने के उपरांत फिलहाल हिसार के दयानंद पी जी कॉलेज में बतौर सहायक प्रोफेसर (जनसंचार) कार्यरत।
कथा-समय, आजकल, कथेसर, दोआबा एवं दस्तक सहित विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में कविताएं और लेख प्रकाशित। पहली कहानी ‘अधुरी कहानी’ नाम से साल 2013 में हरियाणा ग्रंथ अकादमी की पत्रिका ‘कथा समय’ में प्रकाशित व पहली कविता 2009 में हरियाणा साहित्य अकादमी की पत्रिका ‘दस्तक’ में प्रकाशित।

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अशोक भाटिया की कविताएं

अशोक भाटिया अम्बाला छावनी (पूर्व पंजाब) में जन्म। साहित्यकार एवं समीक्षक। हिन्दी में पी – एच.डी.। पूर्व एसोसिएट प्रोफेसर। विभिन्न पत्र – पत्रिकाओं में लेखों, लघुकथाओं, कविताओं आदि का निरन्तर प्रकाशन। प्रकाशित पुस्तकों में आलोचना एवं शोध तथा कविताओं, लघुकथाओं के संग्रह और बाल – पुस्तकें। कई पुस्तकों का संपादन। बाल – पुस्तक समुद्र का संसार’ (1990) पर हरियाणा साहित्य अकादमी द्वारा श्रेष्ठ कृति सम्मान सहित अनेक पुरस्कार व सम्मान। लघुकथा पर विशेष कार्य।

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दो हरियाणवी ग़ज़लें- कर्मचंद केसर

कर्मचंद केसर हरियाणा राज्य के कैथल जिले में रहते हैं। केसर की गज़लें पाठक का हरियाणवी समाज से सीधा संबंध स्थापित कराती हैं। प्रस्तुत है उनकी दो गज़लें:

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तीन कविताएं- दयाल चंद जास्ट

Post Views: 8 1. कितना दुखद होता है वह लम्हा जब औरत की होती है खरीद-फरोख्त होती है जबरन शादी   होता है उसके साथ दुष्कर्म और पुलिस लेती रहती है सपना कि गली-गली और कूचे-कूचे सब सुरक्षित हैं।   कितना दुखद होता है वह लम्हा जब कोई बेरोजगार रह जाता है नौकरी लगने से होती रहती है प्रतिभाओं के साथ ज्यादती वह रोता है अपनी डिग्रियों को देखकर और अफसर खेलते हैं नोटों में प्रचार कि साफ-सुथरी भर्ती हुई है।   कितना दुखद होता है वह लम्हा जब हार जाता है सच्चा इंसान बिक जाते हैं गवाह और बिक जाते हैं जज साहब वह उम्र-भर सडता है सलाखों के पीछे कि न्याय भटक जाता है पथ से।   कितना दुखद होता है वह लम्हा जब अन्न-भंडार भरे होते हैं मंडियों में और भूख से मर जाए कोई बच्चा होता रहता है आयात-निर्यात…

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दो कविताएं- अमित मनोज

अमित मनोज हरियाणा केंद्रीय विश्विद्यालय के हिंदी विभाग में विभाग प्रभारी के रुप में कार्यरत हैं। लोक जीवन और सरल मुहावरा अमित मनोज की कविताओं की खासियत है। अमित के दो कविता संग्रह ‘कठिन समय में’ और ‘दुख कोई चिड़िया तो नहीं’ प्रकाशित हो चुके हैं।

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दस हरियाणवी गज़लें- मंगत राम शास्त्री

मंगत राम शास्त्री- जिला जींद के ढ़ाटरथ गांव में सन् 1963 में जन्म। शास्त्री (शिक्षा शास्त्री), हिंदी तथा संस्कृत में स्नातकोत्तर। साक्षरता अभियान में सक्रिय हिस्सेदारी तथा समाज-सुधार के कार्यों में रुचि। ज्ञान विज्ञान आंदोलन में सक्रिय भूमिका। “अध्यापक समाज” पत्रिका का संपादन। कहानी, व्यंग्य, गीत, रागनी एंव गजल विधा में निरंतर लेखन तथा पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशन। “अपणी बोली अपणी बात” नामक हरियाणवी रागनी-संग्रह प्रकाशित।

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हरियाणा सृजन उत्सव-4 के दौरान कवि सम्मेलन

हरियाणा सृजन उत्सव 2020 में 15 मार्च को कवि सम्मेलन में अमित मनोज,हरभगवान चावला,विरेंद्र भाटिया,सुरजीत सिरड़ी,जयपाल, कर्मचंद केसर,अरुण कैहरबा, एस एस पंवार, योगेश कुमार ने कविता पाठ किया।