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5 कविताएं- डॉ. पूनम तुषामड़

हिन्दी साहित्य में दलित साहित्य की प्रतिनिधि डॉ. पूनम तुषामड़ का जन्म दिल्ली में एक निम्न आयवर्गीय परिवार में हुआ।दलित कविता की नई पीढ़ी के जिन रचनाकारों ने समकालीन साहित्य को प्रभावित किया है, उनमें डॉ. तुषामड़ का नाम उल्लेखनीय है। उनकी रचनाओं को हिन्दी जगह में व्यापक स्तर पर सराहा गया है। हिन्दी अकादमी, दिल्ली द्वारा चयनित काव्य संग्रह “माँ मुझे मत दो” से उन्हें विशेष ख्याति मिली। उनकी कविताओं में नए संदर्भों के साथ दलित चेतना का विकसित रूप अपनी विशिष्टता के साथ अभिव्यक्त हुआ है। “राइटर्स एंड जर्नलिस्ट एसोसिएशन” द्वारा सम्मानित एवं “सम्यक प्रकाशन” द्वारा प्रकाशित कहानी संग्रह “मेले में लड़की’ने भी पाठकों को खासा प्रभावित किया। वर्ष 2004 में हिन्दी अकादमी, दिल्ली का नवोदित लेखक पुरस्कार उनके कविता संग्रह “माँ मुझे मत दो” के लिए तथा 2010 में हिन्दी कविता कोश सम्मान-2010 व ”हम साथ-साथ हैं पत्रिका” द्वारा प्राप्त युवा रचनाकार सम्मान आदि शामिल हैं।

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धर्म में लिपटी वतनपरस्ती क्या-क्या स्वांग रचाएगी – गौहर रज़ा

‘देस हरियाणा’ और ‘सत्यशोधक फाउंडेशन’ द्वारा 14-15 मार्च 2020 को कुरुक्षेत्र स्थित सैनी धर्मशाला में आयोजित ‘हरियाणा सृजन उत्सव-4’ में दोनों दिन सवाल उठाने और चेतना पैदा करने वाली कविताएं गूंजती रही। देश के जाने-माने वैज्ञानिक एवं शायर गौहर रज़ा के कविता पाठ के लिए विशेष सत्र आयोजित किया गया। सत्र का संचालन रेतपथ के संपादक डॉ. अमित मनोज ने किया। पत्रकार गुंजन कैहरबा ने इसे लिपिबद्ध करके यहाँ प्रस्तुत किया है – सं.

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हरभगवान चावला की दस कविताएं

हरभगवान चावला सिरसा में रहते हैं। हरियाणा सरकार के विभिन्न महाविद्यालयों में कई दशकों तक हिंदी साहित्य का अध्यापन किया। प्राचार्य पद से सेवानिवृत हुए। तीन कविता संग्रह प्रकाशित हुए और एक कहानी संग्रह। हरभगवान चावला की रचनाएं अपने समय के राजनीतिक-सामाजिक यथार्थ का जीवंत दस्तावेज हैं। सत्ता चाहे राजनीतिक हो या सामाजिक-सांस्कृतिक उसके चरित्र का उद्घाटन करते हुए पाठक का आलोचनात्मक विवेक जगाकर प्रतिरोध का नैतिक साहस पैदा करना इनकी रचनाओं की खूबी है। हाल ही में हरभगवान चावला को मैथिलीशरण गुप्त श्रेष्ठ कृति पुरस्कार से सम्मानित किए जाने की घोषणा हुई है। प्रस्तुत हैं उनकी कविताएं-

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वर्ष 2020 के लिए नोबेल पुरस्कार हेतु घोषित अमेरिकी कवियत्री लुईस ग्लूक की कविता- अवेर्नो, (अनुवाद-विनोद दास)

लुईस ग्लूक बेहद सम्मानित साहित्यकार हैं. वो सामाजिक मुद्दों पर भी काफी सक्रिय रहती हैं. लुईस येल यूनिवर्सिटी में अंग्रेजी की प्रोफेसर हैं. उनका जन्म 1943 में न्यूयॉर्क में हुआ था. उनके नोबेल प्रशस्ति पत्र में कहा गया कि उनके लेखन में बाद की पुनरावृत्ति के लिए इन तीन विशेषताओं में एकजुट होना दिखाई देता ह्रै. लुईस ग्लुक के कविता के बारह संग्रह और कुछ संस्करणों को प्रकाशित हुए हैं. उनकी कविताओं में खुद के सपनों और भ्रमों के बारे में जो कुछ बचा है, उसे कहा गया है. स्वीडिश एकेडमी ने कहा कि कवयित्री लुईस को उनकी बेमिसाल काव्यात्मक आवाज के लिए यह सम्मान दिया गया, जो खूबसूरती के साथ व्यक्तिगत अस्तित्व को सार्वभौमिक बनाता है. (स्त्रोत-इंटरनेट)

सिद्दीक अहमद मेव की 2 कविताएँ

सिद्दीक अहमद मेव का जन्म 10 अप्रैल 1961 को हरियाणा के नूहं के बनारसी गाँव में हुआ. सिद्दीक अहमद मेव प्रतिष्ठित इतिहासकार हैं.
रचनाएं- मेवात एक खोज (इतिहास), मेवाती संस्कृति , संग्राम 1857; मेवातियों का योगदान, अमर शहीद राजा हसन खाँ मेवाती, मेवाती लोक साहित्य में दोहा परम्परा, गुल-ए-शहीदाँ और भरमारू, महान् स्वतन्त्रता सेनानी चौधरी अब्दुल हई, विश्व सभ्यता को इस्लाम की देन

सम्मान – चिराग-ए-मेवात (1996), हरियाणा साहित्य अकादमी प्रथम पुस्तक पुरस्कार(2000), हरियाणा उर्दू अकादमी, हरियाणा दलित अकादमी का सादल्लाह पुरस्कार, दीन दयाल उपाध्याय ग्रंथ सम्मान (2016), हसन खाँ मेवाती सम्मान (2012), मेवात रत्न (2017)

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सुरजीत सिरड़ी की तीन कविताएं

सुरजीत सिरड़ी हरियाणा राज्य के सिरसा जिले में रहते हैं तथा पेशे से एक शिक्षक हैं। सुरजीत मूलतः पंजाबी भाषा के कवि हैं। इनकी कविताओं में इतिहास के साथ संवाद के समानांतर वर्तमान राजनैतिक चेतना भी नजर आती है जो पाठक को एक पल के लिए ठहरकर सोचने को विवश करती है। प्रस्तुत है उनकी तीन कविताएं-

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सुरेश बरनवाल की कविताएं

सुरेश बरनवाल
प्रकाशित कृतिः संवेदनाओं संग संवाद- कहानी संग्रह 2010, कविता संग्रह- कतरा-कतरा आसमान 2015
कादम्बिनी, आजकल, देस हरियाणा, हरिगंधा, व अन्य पत्र-पत्रिकाओं में कहानी, लघुकथा, कविता, गजल, लेख, बालकविता। कथादेश, हंस, इतिहास बोध व अन्य पुस्तकों में स्वरचित चित्र प्रकाशित। विशेषः कहानी संग्रह काशी विद्यापीठ के पाठ्यक्रम में शामिल। कहानी सैनिक और बन्दूक को 2005 में भारत सरकार द्वारा आयोजित अखिल भारतीय युवा कहानीकार प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त। कहानी अस्थि विसर्जन को हरियाणा साहित्य अकादमी द्वारा आयोजित कहानी प्रतियोगिता 2014 में तृतीय स्थान प्राप्त। विभिन्न कहानियों पर मंचन व रेडियो नाट्य प्रसारण। आकाशवाणी द्वारा कविता प्रसारण।

एस.एस.पंवार की पांच हरियाणवी-राजस्थानी कविताएं

एस.एस.पंवार
जन्म- 19 अप्रैल 1990
फतेहाबाद के पीली मंदोरी गांव में जन्म। चौधरी देवी लाल विश्वविद्यालय से जनसंचार में स्नातकोतर। प्रिंट और टी.वी. पत्रकारिता में तीन साल काम करने के उपरांत फिलहाल हिसार के दयानंद पी जी कॉलेज में बतौर सहायक प्रोफेसर (जनसंचार) कार्यरत।
कथा-समय, आजकल, कथेसर, दोआबा एवं दस्तक सहित विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में कविताएं और लेख प्रकाशित। पहली कहानी ‘अधुरी कहानी’ नाम से साल 2013 में हरियाणा ग्रंथ अकादमी की पत्रिका ‘कथा समय’ में प्रकाशित व पहली कविता 2009 में हरियाणा साहित्य अकादमी की पत्रिका ‘दस्तक’ में प्रकाशित।

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अशोक भाटिया की कविताएं

अशोक भाटिया अम्बाला छावनी (पूर्व पंजाब) में जन्म। साहित्यकार एवं समीक्षक। हिन्दी में पी – एच.डी.। पूर्व एसोसिएट प्रोफेसर। विभिन्न पत्र – पत्रिकाओं में लेखों, लघुकथाओं, कविताओं आदि का निरन्तर प्रकाशन। प्रकाशित पुस्तकों में आलोचना एवं शोध तथा कविताओं, लघुकथाओं के संग्रह और बाल – पुस्तकें। कई पुस्तकों का संपादन। बाल – पुस्तक समुद्र का संसार’ (1990) पर हरियाणा साहित्य अकादमी द्वारा श्रेष्ठ कृति सम्मान सहित अनेक पुरस्कार व सम्मान। लघुकथा पर विशेष कार्य।

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दो हरियाणवी ग़ज़लें- कर्मचंद केसर

कर्मचंद केसर हरियाणा राज्य के कैथल जिले में रहते हैं। केसर की गज़लें पाठक का हरियाणवी समाज से सीधा संबंध स्थापित कराती हैं। प्रस्तुत है उनकी दो गज़लें: