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दरअसल- तारा पांचाल

कहानी (तारा पांचाल 28 मई,1950 – 20 जून, 2009।  ‘सारिका’, ‘हंस’, ‘कथन’, ‘वर्तमान साहित्य’, ‘पल-प्रतिपल’, ‘बया’, ‘गंगा’, ‘अथ’, ‘सशर्त’, ‘जतन’, ‘अध्यापक समाज’, ‘हरकारा’ जैसी प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में पाठक उनकी कहानियों…

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मां की ना कहिए, न्या की कहिए – तारा पांचाल

                                समाज अपने समय की सच्चाई को अपने रचनाकारों की आंख से देखता है। यह जानना हमेशा ही रोचक होता है कि रचनाकार अपने समय को कैसे देखते व अभिव्यक्त…

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सरबजीत की याद में -तारा पांचाल

कविता बहुत उजालों में लिए तुम अपने आसपास नन्हें-नन्हें जुगनुओं जैसे सूरजों के बीच इसलिए दूरी बनी रही तुम्हारे, और तुम्हारी कविताओं के अंधेरे के बीच। पर तुमने बनाए रखा…

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फूली – तारा पांचाल

उचटी नींद के ऊल-जलूल सपने और उन सपनों के शुभ-अशुभ विचार। दुली के परिवार में कुछ दिनों से ऐसे ही सपने देखे जा रहे थे। कभी-कभी ये सपने लाल मिर्च…

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संकट मोचन – तारा पांचाल

कहानी संकट-मोचन        क्योंकि वे बंदर थे अतः स्वाभाविक रूप से उनकी उछल-कूद, उनके उत्पात सब बंदरों वाले थे। गांव वाले उनसे तंग आ चुके थे। गांव के साथ कुछ…