placeholder

कन्या भ्रूण की गुहार

Post Views: 35 सही राम माई री, तुम धीरज रखना। गर्भ में मुझको धारे रखना।। खुसपुस-खुसपुस बातें होंगी, गुमसुम-गुमसुम बापू होंगे। टेढ़ी सबकी नज़रें होंगी, मुंह भी फूले-फूले होंगे। लंबी-लंबी…

placeholder

मनुष्य की नई प्रजाति – सहीराम

Post Views: 74 सहीराम  हम मनुष्य की नई प्रजाति हैं। हमारी खासियत यह है कि हम अपने बच्चों को खा जाते हैं। हम सांप नहीं हैं, हम कोई ऐसे बनैले…

placeholder

एक गांव दो चेहरे – सहीराम

Post Views: 55 कोई दो महीने पहले यह गांव पहली बार तब चर्चा में आया था,जब बीजिंग ओलंपिक में इस गांव के बेटे विजेंद्र ने मुक्केबाजी में कांस्य पदक जीत…

placeholder

हम तालिबान बनना चाहते हैं – सहीराम

Post Views: 31 सहीराम  खाप पंचायती वैसे तो तालिबान बन ही चुके थे, सब उन्हें मान भी चुके थे। लेकिन पक्के और पूरे तालिबान बनने की उनकी इच्छा ने इतना…

placeholder

मीडिया में हरियाणवी महिला की छवि – सहीराम

Post Views: 188 सहीराम  मीडिया में हरियाणवी महिला की छवि क्या है? जैसे हरियाणवी पुरुष जिसे आमतौर पर हाळी-पाळी कहा जाता है, की छवि खेतों में खटनेवाले एक मेहनतकश किसान…

placeholder

भाईचारे की अवधारणा और खाप पंचायतें -सहीराम

Post Views: 139 टूटते सामाजिक मूल्यों और संबंधों के इस दौर में भाईचारा एक बहुत ही पवित्र सी अवधारणा के रूप में सामने आता है। भाईचारे की यह अवधारणा वैसे…

placeholder

संघर्ष कथा – सहीराम

Post Views: 152 आंखिन देखी मैं कहता हूं, सुनी सुनायी झूठ कहाय। गाम राम की कथा सुनाऊं, पंचों सुनियो ध्यान लगाय। हल और बल कुदाली कस्सी, धान बाजरा फसल गिनाय।…

placeholder

1857, किस्सा सदरूद्दीन मेवाती का – सहीराम 

Post Views: 441 नौटंकी पात्र : नट तथा नटी। दो देहाती (बार-बार उन्हीं को दोहराया जा सकता है),एक ढिढ़ोरची (दो देहातियों में एक हो सकता है या नट भी हो…

placeholder

कुछ मुंबइया फिल्में और हरियाणवी जनजीवन का यथार्थ – सहीराम

Post Views: 76                 सिनेमा अभी तक यही माना जाता रहा है कि हरियाणवी जन जीवन खेती किसानी का बड़ा ही सादा और…

placeholder

सिनेमा में हरियाणा – सहीराम

   यह पहली हरियाणवी फिल्म ‘‘चंद्रावल’’ के आने से पहले की बात है जब हिंदी की एक बड़ी हिट फिल्म आयी थी। नाम था ‘नमक हलाल’। यह हिंदी फिल्मों में अमिताभ बच्चन का जमाना था और अमिताभ बच्चन की उन दिनों थोड़ा आगे-पीछे मिलते-जुलते नामोंवालो दो फिल्में आयी थी – एक ‘नमक हलाल’ और दूसरी ‘नमक हराम’। ‘नमक हलाल’ में मालिक के नमक का हक अदा करने वाले जहां खुद अमिताभ बच्चन थे, वहीं ‘नमक हराम’ में फैक्टरी मालिक बने अमिताभ बच्चन अपने जिगरी दोस्त को इसलिए ‘नमक हराम’ मान लेते हैं क्योंकि खुद उन्होंने ही अपने इस जिगरी दोस्त को मजदूरों के बीच मजदूर बनाकर भेजा तो हड़ताल वगैरह तोड़ने के लिए था, लेकिन मजदूरों के दुख-तकलीफों को देखकर वह उनका हमदर्द बन जाता है। अच्छी बात यह है कि नमक हलाली हरियाणवियों के हिस्से आयी थी।