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कछुआ और खरगोश – इब्ने इंशा

लोक कथा एक था कछुआ, एक था खरगोश। दोनों ने आपस में दौड़ की शर्त लगाई। कोई कछुए से पूछे कि तूने शर्त क्यों लगाई? क्या सोचकर लगाई? बहरहाल…तय यह…

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सरकारी विद्यालयों में शिक्षा का गिरता स्तर

अमरजीत सैनी शिक्षा ही मनुष्य को सही मायने में मानव बनाती है। समय परिवर्तन के साथ-साथ शिक्षा के क्षेत्रों में बहुत परिवर्तन हुए। सरकार ने शिक्षा के स्तर को ऊंचा…

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आई टी आई करनाल में छात्रों व शिक्षकों पर पुलिस की दमनात्मक करवाई

सुदेश कुमारी जन संघर्ष मंच हरियाणा की तथ्यान्वेषी टीम की रिपोर्ट 16 अप्रैल 2019 को जन संघर्ष मंच हरियाणा की एक तथ्यान्वेषी टीम ने बाबू मूल चंद जैन राजकीय आईटीआई…

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जलियांवाला बाग का बसन्त – सुभद्राकुमारी चौहान

  यहाँ कोकिला नहीं, काग हैं, शोर मचाते, काले काले कीट, भ्रमर का भ्रम उपजाते। कलियाँ भी अधखिली, मिली हैं कंटक-कुल से, वे पौधे, व पुष्प शुष्क हैं अथवा झुलसे।…

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एक नदी के गंदे नाले में बदल जाने का सफर – पंकज चतुर्वेदी

पंकज चतुर्वेदी आज के हिंदुस्तान के सम्पादकीय पर यह लेख बहुत दुःख के साथ, हमारी काहिली के प्रति रोष के साथ है, काश इस लोकसभा चुनाव में आप वोट मांगने…

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मैं हिन्दू भी हूं और मुसलमान भी

विनोबा भावे रामकृष्ण परमहंस ने इस्लाम, ईसाई आदि अन्य धर्मों की उपासना की थी, उनकी प्रत्यक्ष अनुभूति प्राप्त करने के लिए साधना की थी और सब धर्मों का समन्वय उन्हें…

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आर. डी. आनंद की कविताएं

(आर. डी. आनंद, भारतीय जीवन बीमा निगम, फैज़ाबाद में उच्च श्रेणी सहायक हैं।  कवि व आलोचक के रूप में स्थापित हैं। दलित समीक्षा में विशिष्ट पहचान है। उनकी 30  से अधिक…

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मैक्सिम गोर्की का पत्र रूसी कामरेडों के नाम

मैक्सिम गोर्की का पत्र रूसी कामरेडों के नाम गरीबी की क्रूरता के विरुद्ध संघर्ष का अर्थ है, दुनिया में फैले उत्पीडऩ के जाल से मुक्ति के लिए छेडी गई जंग,…

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छाती, तू और मैं – निकिता आजाद

निकिता आजाद (युनिवर्सिटी ऑफ आक्सफोर्ड) में पढ़ी हैं। उन्होंने  ‘हैपी टु ब्लीड’ लिखे सैनिटरी नैपकिन के साथ अपनी तसवीर पोस्ट करते हुए लोगों को पितृसत्तात्मक रवैए के खिलाफ खड़े होने…