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लूकाच का वास्तविकतावाद – डा. ओमप्रकाश ग्रेवाल

मार्क्सवाद के बारे में बहुत से पर्वाग्रह लोगों के मन में घर कर गये हैं। उनमें से एक मुख्य धारणाा यह है कि इस दृष्टिकोण से प्रतिबद्धता गंभीर साहित्यिक विवेचन…

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जॉर्ज लूकाच – डा. ओमप्रकाश ग्रेवाल

साहित्यिक मसलों की मार्क्सवादी दृष्किोण से व्याख्या करने वाले समर्थ आलोचकों में लूकाच का नाम आता है। किन्तु उनकी कुछ मुख्य स्थापनाओं के बारे में मार्क्सवादी चिन्तकों में काफी मतभेद…

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कविता की भाषा और जनभाषा – डा. ओमप्रकाश ग्रेवाल

आलेख कविता की भाषा का जन-भाषा से किस प्रकार का सम्बन्ध हो इस प्रश्न पर हम यहां केवल जनवादी कविता के संदर्भ में ही विचार करेंगे। कविता की भाषा के…

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डा. ओमप्रकाश ग्रेवाल व रमेश उपाध्याय का पत्र-व्यवहार

ई-16, यूनिवर्सिटी कैम्पस, कुरुक्षेत्र (हरियाणा)-132119 30 अगस्त 1991 प्रिय भाई रमेश,             आपका पत्र। बीच में एकाध दिन के लिए बाहर जाना पड़ा। इसीलिए तुरंत जवाब देने की इच्छा के…

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मध्यवर्ग के आदर्शवादी तत्व और आरक्षण का सवाल -डा. ओमप्रकाश ग्रेवाल

आलेख पिछले साल मंडल आयोग की सिफारिशों के आधार पर सरकारी नौकरियों में से सत्ताईस प्रतिशत को सामाजिक दृष्टि से पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षित करने के राष्ट्रीय मोर्चा सरकार…

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विकल्प की कोई एक अवधारणा नहीं – डा. ओमप्रकाश ग्रेवाल

आलेख             विकल्प का सवाल आज पहले से भी जटिल हो गया है, लेकिन विकल्प की अनिवार्यता में कोई अन्तर नहीं आया है। आप ने…

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जातिवाद जनविरोधी राजनीति का एक औजार – डा. ओमप्रकाश ग्रेवाल

आलेख             एक सामाजिक ढांचे के तौर पर ग्राम-समाज या विलेज कम्युनिटी ऐतिहासिक विकास का प्रतिफलन है। इसके उभरकर आने के बाद इतिहास में इसको बनाए रखने की भरसक कोशिशें…

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रचना के कलात्मक और ज्ञानात्मक मूल्यों का सहयोजन-डा. ओमप्रकाश ग्रेवाल

आलेख इस प्रश्न पर विचार करते समय सबसे पहले हमें यह याद रखना होगा कि किसी भी रचना के कलात्मक और ज्ञानात्मक पक्षों को एक-दूसरे के विरोध में खड़ा करना…

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हरियाणा में रागनी की परम्परा और जनवादी रागनी की शुरुआत – डा. ओमप्रकाश ग्रेवाल

रागनी की असली जान, ठेठ लोकभाषा के मुहावरों में सीधी-सादी लय अपनाने में और ऐसे मर्म-स्पर्शी कथा प्रसंगों के चुनाव में होती हैं ” जो लोगों के मन में रच-बस गये हों। इन सबके सहारे ही रागनी लोगों की भावनाओं को, उनकी पीड़ाओं तथा दबी हुई अभिलाषाओं को सुगम और सरल ढंग से प्रस्तुत करने में सफल होती हैं।

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जॉर्ज लूकाच -डा. ओमप्रकाश ग्रेवाल

          आलेख साहित्यिक मसलों की मार्क्सवादी दृष्किोण से व्याख्या करने वाले समर्थ आलोचकों में लूकाच का नाम आता है। किन्तु उनकी कुछ मुख्य स्थापनाओं के बारे…