placeholder

पूंजीवादी समाज के प्रति -मुक्तिबोध

Post Views: 324 कविता पूंजीवादी समाज के प्रतिइतने प्राण, इतने हाथ, इतनी बुद्धिइतना ज्ञान, संस्कृति और अन्त शुद्धिइतना दिव्य, इतना भव्य, इतनी शक्तिइतना काव्य, इतने शब्द, इतने छन्दजितना ढोंग, जितना…

placeholder

मैं उनका ही होता -मुक्तिबोध

Post Views: 230 कविता मैं उनका ही होतामैं उनका ही होता, जिनमेंमैंने रूप-भाव पाये हैं।वे मेरे ही हिये  बंधे हैंजो मर्यादाएं लाये हैं।मेरे शब्द, भाव उनके हैं,मेरे पैर और पथ…

placeholder

विचार आते हैं -मुक्तिबोध

Post Views: 296 कविता विचार आते हैं विचार आते हैं-लिखते समय नहीं,बोझ ढोते वक्त पीठ परसिर पर उठाते समय भारपरिश्रम करते समयचांद उगता है वपानी मेें झलमलाने लगता हैहृदय के…