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अनुष्ठान -मदन भारती

Post Views: 802  कविता शहर में कर्फ्यू है सब घरों में घुस जाएं इक ऐलान अचानक फैल जाता है। घरों में रहने वाले ओर भीतर हो जाते हैं। शहर में…

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जात -मदन भारती

Post Views: 665 कविता जात कैसी होती है उसका रंग कैसा होता है उसकी पहचान क्या होती रूप कैसा होता है कितनी बड़ी होती दृश्य या अदृश्य गुमान, गर्व या…

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राख -मदन भारती

Post Views: 767 कविता स्वाहा सब कुछ स्वाहा, धर्म ग्रंथों मंत्रों, पोथी पत्रों हर कर्म क्रिया संस्कार और हर मंत्रोचारणोपरांत। स्वाह से बनती है राख! राख में क्या है भीड़…

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नाक अभी बाकी है -मदन भारती

Post Views: 555 कविता बाहुबली हर बार दिखाते हैं अपनी ताकत बताते हैं अपने मंसूबे बेकसूरों की गर्दनों पर उछल कूद करके हर बार कहते हैं मर्यादाएं मिट रही हैं…

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नाक नहीं कटती -मदन भारती

Post Views: 553 कविता बस्तियां जलातें हैं घर में कुकृत्य कर लेते हैं देवर का हक चलता है, जेठ तकता है, ससुर रौंदता है, बस्ती से लड़कियां उठा लेते हैं…

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न्याय का रूप -मदन भारती

Post Views: 571 कविता बस! मजूरी मांगने की हिमाकत की थी उसने। एक एक कर सामान फैंका गया बाहर! नन्हें हाथों के खिलौने, टूटा हुआ चुल्हा, तवा-परात, लोहे का चिमटा,…

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चुप्पी और सन्नाटा -मदन भारती

Post Views: 574 कविता हम आगे जा रहे हैं या पीछे या फिर जंगल आज भी हमारा पीछा कर रहा है आधुनिकता के सब संसाधन इस्तेमाल कर रहे हैं 21वीं…

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हमारा हरियाणा -मदन भारती

Post Views: 572 कविता   हमारा हरियाणा बडा प्यारा है जगत जहां से न्यारा है यहां के लोग बड़े कमाऊ हैं सीधे हैं, सच्चे हैं बहादुरी तो बस, एकदम कमाल…